{"_id":"57c9c7774f1c1bd2352cb691","slug":"after-punchkula-kurukshetra-will-second-destrict-in-toiletfree","type":"story","status":"publish","title_hn":"- पंचकूला के बाद कुरुक्षेत्र होगा प्रदेश का दूसरा खुले में शौच मुक्त जिला ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
- पंचकूला के बाद कुरुक्षेत्र होगा प्रदेश का दूसरा खुले में शौच मुक्त जिला
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 03 Sep 2016 12:09 AM IST
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खुले में शौचमुक्त की जानाकरी देती उपायुक्त सुमेधा कटारिया
- फोटो : amar ujala
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पंचकूला के बाद कुरुक्षेत्र प्रदेश का खुले में शौचमुक्त दूसरा जिला होगा, जिसके लिए 1 नवंबर तक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जब जिले को खुले में शौच मुक्त बना लिया जाएगा तो इसकी गांव से लेकर केंद्र तक पांच चरणों में वेरिफिकेशन होगी। उसके बाद ही सही रुप से खुले में शौच मुक्त जिले का नाम दिया जाएगा। यह सफलता के लिए केवल सरकारी मशीनरी, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयास ही काफी नहीं हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा। यह जानकारी उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने दी। वे शुक्रवार को अपने कार्यालय में पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन पर मीडिया कर्मियों से बातचीत कर रही थी।
उन्होंने कहा कि डीआरडीए और प्रशासन के सहयोग से खुले से शौचमुक्त मामले को एक जनआंदोलन का रुप देने के लिए सबसे पहले 104 मोटिवेटर, आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, एनजीओ, सरपंच, जिला व पंचायत समिति के सदस्य, लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों, अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ-साथ शिक्षिकों को प्रशिक्षण देने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को एक सामाजिक आंदोलन का रुप देना होगा। उन्होंने कहा कि जब मीडिया कर्मी सही तस्वीर सामने लाएंगे, तभी सभी के सांझे प्रयासों से इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। हालांकि लक्ष्य 1 नवंबर तय किया है। लेकिन सभी के प्रयासों से इस लक्ष्य को 20 अक्टूबर तक पूरा करने का अथक प्रयास किया जाएगा।
हिमाचल हुआ पूर्णत: खुले से शौचमुक्त
इस अभियान में लगी फीडबैक फाउंडेशन के सीईओ अजय सिन्हा ने कहा कि हिमाचल पूर्णत: खुले से शौचमुक्त हो चुका है। केरल लगभग खुले से शौचमुक्त होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 तक देश को खुले से शौचमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि खुले से शौचमुक्त देश होने के बाद ही भारत प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। इस मौके पर लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी, एडीसी धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ेंगे 104 मोटिवेटर व 200 अधिकारी
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र को खुले से शौचमुक्त करने के दृढ़ निश्चिय को जहन में रखते हुए उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने कहा कि प्रथम चरण में ग्रामीण क्षेत्र को खुले से शौचमुक्त किया जाना है। इसके लिए 104 मोटिवेटर और 200 अधिकारियों की टीम गठित की गई है। इन टीमों में आपसी तालमेल बनाने, रिपोर्ट एकत्रित करने और पल-पल की सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए एक विशेष वाटस ग्रुप भी तैयार किया जा रहा है।
क्या है खुले से शौचमुक्त का मुद्दा
फीडबैक फाउंडेशन के सीईओ एवं राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर अजय सिन्हा ने कहा कि खुले से शौचमुक्त के मायने केवल मात्र शौचालयों का निर्माण, उपयोग, सबसीडी ही नहीं हैं, इसके मायने शौच का सुरक्षित निपटारा करना है। जिन-जिन देशों में सबसीडी दी गई हैं वे देश खुले से शौचमुक्त नहीं हो पाए हैं। बांग्ला देश ने 2001 और नेपाल ने 2010 में सबसीडी बंद की और तब जाकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़े। वर्ष 2011 में देश में 70 प्रतिशत सबसीडी दी गई लेकिन 80 प्रतिशत का आंकड़ा खुले में शौच करने का पाया गया। लोगों के जहन से गरीबी और सबसीडी को लेकर मानसिकता में बदलाव करना होगा और खुले में शौच करने पर आबरू, इज्जत और कुकर्म से जोडक़र देखना होगा।
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उन्होंने कहा कि डीआरडीए और प्रशासन के सहयोग से खुले से शौचमुक्त मामले को एक जनआंदोलन का रुप देने के लिए सबसे पहले 104 मोटिवेटर, आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, एनजीओ, सरपंच, जिला व पंचायत समिति के सदस्य, लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों, अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ-साथ शिक्षिकों को प्रशिक्षण देने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को एक सामाजिक आंदोलन का रुप देना होगा। उन्होंने कहा कि जब मीडिया कर्मी सही तस्वीर सामने लाएंगे, तभी सभी के सांझे प्रयासों से इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। हालांकि लक्ष्य 1 नवंबर तय किया है। लेकिन सभी के प्रयासों से इस लक्ष्य को 20 अक्टूबर तक पूरा करने का अथक प्रयास किया जाएगा।
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हिमाचल हुआ पूर्णत: खुले से शौचमुक्त
इस अभियान में लगी फीडबैक फाउंडेशन के सीईओ अजय सिन्हा ने कहा कि हिमाचल पूर्णत: खुले से शौचमुक्त हो चुका है। केरल लगभग खुले से शौचमुक्त होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 तक देश को खुले से शौचमुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि खुले से शौचमुक्त देश होने के बाद ही भारत प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। इस मौके पर लाडवा के विधायक डॉ. पवन सैनी, एडीसी धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ेंगे 104 मोटिवेटर व 200 अधिकारी
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र को खुले से शौचमुक्त करने के दृढ़ निश्चिय को जहन में रखते हुए उपायुक्त सुमेधा कटारिया ने कहा कि प्रथम चरण में ग्रामीण क्षेत्र को खुले से शौचमुक्त किया जाना है। इसके लिए 104 मोटिवेटर और 200 अधिकारियों की टीम गठित की गई है। इन टीमों में आपसी तालमेल बनाने, रिपोर्ट एकत्रित करने और पल-पल की सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए एक विशेष वाटस ग्रुप भी तैयार किया जा रहा है।
क्या है खुले से शौचमुक्त का मुद्दा
फीडबैक फाउंडेशन के सीईओ एवं राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर अजय सिन्हा ने कहा कि खुले से शौचमुक्त के मायने केवल मात्र शौचालयों का निर्माण, उपयोग, सबसीडी ही नहीं हैं, इसके मायने शौच का सुरक्षित निपटारा करना है। जिन-जिन देशों में सबसीडी दी गई हैं वे देश खुले से शौचमुक्त नहीं हो पाए हैं। बांग्ला देश ने 2001 और नेपाल ने 2010 में सबसीडी बंद की और तब जाकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़े। वर्ष 2011 में देश में 70 प्रतिशत सबसीडी दी गई लेकिन 80 प्रतिशत का आंकड़ा खुले में शौच करने का पाया गया। लोगों के जहन से गरीबी और सबसीडी को लेकर मानसिकता में बदलाव करना होगा और खुले में शौच करने पर आबरू, इज्जत और कुकर्म से जोडक़र देखना होगा।