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आजादी के 77 वर्ष बाद असमानताएं घटने के बजाय बढ़ीं : भट्टाचार्य
Sun, 03 Aug 2025 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 03 Aug 2025 02:27 AM IST
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कुरुक्षेत्र। आल इंडिया लॉयर्स यूनियन अध्यक्ष एवं पूर्व एडवोकेट जनरल बिकाश रंजन भट्टाचार्य सबोध
कुरुक्षेत्र। बिना न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही के लोकतंत्र व संविधान सुरक्षित नहीं हो सकता। यह कहना है आल इंडिया लॉयर्स यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व एडवोकेट जनरल बिकाश रंजन भट्टाचार्य का।
वे न्याय पालिका की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतंत्र बचाओ विषय पर कुरुक्षेत्र बार रूम में लेडी लॉयर्स, नए वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स की राज्य स्तरीय कनवेंशन में बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। विशेष तौर पर क्रांतिकारी समतामूल्क समाज की कल्पना करते थे, लेकिन आजादी के 77 वर्ष बाद आज भी असमानता घटने की बजाए बढ़ी है। इस दौरान सात-सात सदस्यीय महिला व छात्र सब कमेटी चुनी गई।
सेमिनार की अध्यक्षता एआईएलयू के राज्य अध्यक्ष गुरमेज सिंह व ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र अत्री ने संयुक्त रूप में की। मंच का संचालन कुरुक्षेत्र यूनिट के अध्यक्ष प्राशीश ने किया। भट्टाचार्य ने कहा कि हमारे देश को ब्रिटिशर्स से आजाद कराने के लिए अनेक देशभक्ताें ने कुर्बानी दी। उन्होंने सपने संजोए थे कि एक ऐसा देश बने, जिसमें सभी को शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधाएं मिले, कोई भी भूखा व बिना छत के न सोए। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान मौलिक अधिकारों की बात करता है, जिसको सिर्फ़ स्वतंत्र और जवाबदेह न्यायपालिका ही सुरक्षित कर सकती है। न्यायपालिका को अंदर व बाहर से खतरा बना हुआ है, न्यायपालिका को संविधान ने शक्तियां दी है कि वह सरकार, कार्यपालिका, पुलिस अन्य संस्थाओं को तानाशाह बनने से रोकती है। आल इंडिया लॉयर्स यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनिल चौहान ने कहा कि महिला वकीलों को दोहरी चुनौतियों का सामना करनाल पड़ता है। एक तो कानून व्यवसाय की सामान्य चुनौतियां दूसरी तरफ महिला होने के नाते सामना करना पड़ता है। महिलाओं को एसोसिएशन व कौंसिलों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, जिसके लिए उन्हें आरक्षण देना होगा। महिला वकीलों की रिपोर्ट मुकेश मान व छात्र रिपोर्ट अंकिता ने रखी। इस मौके पर राज्य सचिव कुलदीप सिंह राणा, राजविंदर सिंह चंदी, चंद्रभान, कमलेश, चांदी राम पातड़, मुकेश मान, कमलेश, सोमदत, रणधीर साथी सचिव मंडल के सदस्य मौजूद रहे। संवाद
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वे न्याय पालिका की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतंत्र बचाओ विषय पर कुरुक्षेत्र बार रूम में लेडी लॉयर्स, नए वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स की राज्य स्तरीय कनवेंशन में बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। विशेष तौर पर क्रांतिकारी समतामूल्क समाज की कल्पना करते थे, लेकिन आजादी के 77 वर्ष बाद आज भी असमानता घटने की बजाए बढ़ी है। इस दौरान सात-सात सदस्यीय महिला व छात्र सब कमेटी चुनी गई।
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सेमिनार की अध्यक्षता एआईएलयू के राज्य अध्यक्ष गुरमेज सिंह व ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र अत्री ने संयुक्त रूप में की। मंच का संचालन कुरुक्षेत्र यूनिट के अध्यक्ष प्राशीश ने किया। भट्टाचार्य ने कहा कि हमारे देश को ब्रिटिशर्स से आजाद कराने के लिए अनेक देशभक्ताें ने कुर्बानी दी। उन्होंने सपने संजोए थे कि एक ऐसा देश बने, जिसमें सभी को शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधाएं मिले, कोई भी भूखा व बिना छत के न सोए। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान मौलिक अधिकारों की बात करता है, जिसको सिर्फ़ स्वतंत्र और जवाबदेह न्यायपालिका ही सुरक्षित कर सकती है। न्यायपालिका को अंदर व बाहर से खतरा बना हुआ है, न्यायपालिका को संविधान ने शक्तियां दी है कि वह सरकार, कार्यपालिका, पुलिस अन्य संस्थाओं को तानाशाह बनने से रोकती है। आल इंडिया लॉयर्स यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनिल चौहान ने कहा कि महिला वकीलों को दोहरी चुनौतियों का सामना करनाल पड़ता है। एक तो कानून व्यवसाय की सामान्य चुनौतियां दूसरी तरफ महिला होने के नाते सामना करना पड़ता है। महिलाओं को एसोसिएशन व कौंसिलों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, जिसके लिए उन्हें आरक्षण देना होगा। महिला वकीलों की रिपोर्ट मुकेश मान व छात्र रिपोर्ट अंकिता ने रखी। इस मौके पर राज्य सचिव कुलदीप सिंह राणा, राजविंदर सिंह चंदी, चंद्रभान, कमलेश, चांदी राम पातड़, मुकेश मान, कमलेश, सोमदत, रणधीर साथी सचिव मंडल के सदस्य मौजूद रहे। संवाद
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