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Kurukshetra News: जिला नागरिक अस्पतालों में ई-उपचार सुविधा पर ग्रहण
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कुरुक्षेत्र। प्रदेश में चल रही एनएचएम कर्मियों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं को एक और झटका लग सकता है। छह अगस्त से प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों से ई-उपचार सुविधा बंद हो सकती है। इस सुविधा के बंद होते ही चिकित्सकों के साथ-साथ मरीजों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
दरअसल, एक निजी कंपनी से अनुबंध के तहत प्रदेश के जिला नागरिक अस्पतालों में ई-उपचार की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, मगर छह अगस्त को कंपनी का सरकार के साथ अनुबंध पूरा होने जा रहा है। कंपनी के अधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार उनके साथ दोबारा अनुबंध करने से कतरा रही है। दोबारा अनुबंध के लिए कंपनी ने 24 जुलाई को एलएनजेपी अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) समेत विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा था। इस मांग पत्र पर उचित कदम उठाने की बजाए सरकार उन्हें दरकिनार कर अन्य विकल्प खोजना चाहती है, जबकि मौजूदा समय में अस्पतालों में करीब 19 तरह के मॉड्यूल कंपनी उपलब्ध करा रही है। कंपनी की ओर से छह अगस्त को दोबारा से अस्पताल के पीएमओ और सीएमओ को ज्ञापन दिया जाएगा। उसके बाद भी सरकार अगर मांग को ठुकरा देती है तो उसी दिन या अगले दिन से सुविधा बंद कर देंगे।
चिकित्सक ओपीडी में ही आनलॉइन देख रहे रिपोर्ट
एलएनजेपी अस्पताल में ई-उपचार की सेवा साल 2015 में शुरू हुई थी। इस सुविधा के आरंभ होने से मरीजों की लैब, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एक्स-रे समेत अन्य रिपोर्ट संबंधित चिकित्सक के कंप्यूटर पर उस स्थान से सीधे पहुंच जाती है। साथ ही चिकित्सकों को मरीजों का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करनी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा मरीजों को भी अपनी रिपोर्ट अस्पताल में बार-बार नहीं लानी पड़ती, बल्कि उनके नाम और यूनिक आईडी से उनका पूरा रिकॉर्ड व रिपोर्ट सामने आ जाता है। मरीज अपने मोबाइल नंबर पर भी अपनी रिपोर्ट मंगवा सकते हैं।
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अस्पताल के बच रहे हर माह तीन लाख
ई-उपचार की सुविधा से अस्पतालों को भी फायदा पहुंच रहा है। एक ओर जहां अस्पताल के पास मरीजों का रिकॉर्ड सुरक्षित है, वहीं एक्स-रे, लैब रिपोर्ट व अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल को फिल्म और कागज खराब नहीं करने पड़ते हैं, जिससे अकेले एलएनजेपी अस्पताल का प्रतिमाह दो से तीन लाख रुपये बच रहा है। दूसरा, अगर सरकार का उस कंपनी से अनुबंध नहीं हुआ तो केंद्र स्थापित करने के लिए लगाए गए करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाएंगे।
कंपनी के साथ चल रही वार्ता : डॉ. मनीष बंसल
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक एवं ई-उपचार कार्यक्रम के राज्य प्रभारी डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि अभी उनकी कंपनी के साथ वार्ता चल रही है। इसके बाद, मरीजों के हित में जो भी निर्णय होगा उसे लागू किया जाएगा। उधर, एलएनजेपी कार्यकारी पीएमओ डॉ. साराह अग्रवाल ने बताया कि मांग पत्र के विषय में उन्हें जानकारी नहीं है। यह मामला उच्च अधिकारियों से संबंधित है।
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दरअसल, एक निजी कंपनी से अनुबंध के तहत प्रदेश के जिला नागरिक अस्पतालों में ई-उपचार की सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, मगर छह अगस्त को कंपनी का सरकार के साथ अनुबंध पूरा होने जा रहा है। कंपनी के अधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार उनके साथ दोबारा अनुबंध करने से कतरा रही है। दोबारा अनुबंध के लिए कंपनी ने 24 जुलाई को एलएनजेपी अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) समेत विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा था। इस मांग पत्र पर उचित कदम उठाने की बजाए सरकार उन्हें दरकिनार कर अन्य विकल्प खोजना चाहती है, जबकि मौजूदा समय में अस्पतालों में करीब 19 तरह के मॉड्यूल कंपनी उपलब्ध करा रही है। कंपनी की ओर से छह अगस्त को दोबारा से अस्पताल के पीएमओ और सीएमओ को ज्ञापन दिया जाएगा। उसके बाद भी सरकार अगर मांग को ठुकरा देती है तो उसी दिन या अगले दिन से सुविधा बंद कर देंगे।
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चिकित्सक ओपीडी में ही आनलॉइन देख रहे रिपोर्ट
एलएनजेपी अस्पताल में ई-उपचार की सेवा साल 2015 में शुरू हुई थी। इस सुविधा के आरंभ होने से मरीजों की लैब, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एक्स-रे समेत अन्य रिपोर्ट संबंधित चिकित्सक के कंप्यूटर पर उस स्थान से सीधे पहुंच जाती है। साथ ही चिकित्सकों को मरीजों का रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करनी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा मरीजों को भी अपनी रिपोर्ट अस्पताल में बार-बार नहीं लानी पड़ती, बल्कि उनके नाम और यूनिक आईडी से उनका पूरा रिकॉर्ड व रिपोर्ट सामने आ जाता है। मरीज अपने मोबाइल नंबर पर भी अपनी रिपोर्ट मंगवा सकते हैं।
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अस्पताल के बच रहे हर माह तीन लाख
ई-उपचार की सुविधा से अस्पतालों को भी फायदा पहुंच रहा है। एक ओर जहां अस्पताल के पास मरीजों का रिकॉर्ड सुरक्षित है, वहीं एक्स-रे, लैब रिपोर्ट व अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल को फिल्म और कागज खराब नहीं करने पड़ते हैं, जिससे अकेले एलएनजेपी अस्पताल का प्रतिमाह दो से तीन लाख रुपये बच रहा है। दूसरा, अगर सरकार का उस कंपनी से अनुबंध नहीं हुआ तो केंद्र स्थापित करने के लिए लगाए गए करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाएंगे।
कंपनी के साथ चल रही वार्ता : डॉ. मनीष बंसल
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक एवं ई-उपचार कार्यक्रम के राज्य प्रभारी डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि अभी उनकी कंपनी के साथ वार्ता चल रही है। इसके बाद, मरीजों के हित में जो भी निर्णय होगा उसे लागू किया जाएगा। उधर, एलएनजेपी कार्यकारी पीएमओ डॉ. साराह अग्रवाल ने बताया कि मांग पत्र के विषय में उन्हें जानकारी नहीं है। यह मामला उच्च अधिकारियों से संबंधित है।