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गीता भारत का सनातन ग्रंथ है-डॉ मलिक
Updated Sat, 25 Nov 2017 12:30 AM IST
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गीता भारत का सनातन ग्रंथ है : डॉ मलिक
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा गीता जयंती समारोह पर आयोजित 18 दिवसीय कार्यक्रम के बारहवें दिन एक संगोष्ठी डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता और भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्प अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री, प्रदेश के सलाहकार डॉ. योगेंद्र मलिक ने कहा कि गीता का दर्शन आदर्श जीवन और आदर्श समाज की संकल्पना प्रस्तुत करता है। गीता भारत का सनातन ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि आदर्श समाज का निर्माण तभी संभव है, जब समाज में आदर्श नागरिक होंगे। आदर्श जीवन निर्माण पद्धति ही भारतीय सनातन वैदिक धर्म का मूल मंत्र है। तमाम विदेशी विद्वानों ने गीता का सुव्यवस्थित अध्ययन कर गीता को आत्मसात किया। मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत के सभी प्रमुख चिंतकों ने गीता के संदेश को किसी न किसी रूप में अपना समर्थन दिया है। बहुत से दार्शनिक और विद्वानों ने गीता पर भाष्य लिखे हैं। ऐसा कोई भी भारतीय दार्शनिक, विचारक या धर्माधिकारी नहीं है, जिस पर गीता का प्रभाव न पड़ हो। पिछली एक शताब्दी में ही बालगंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, अरविंद और डॉ. सर्वपल्लीराधा कृष्णनन जैसे विचारकों और सामाजिक नेताओं ने भी गीता के संदेश को सराहा है। साथ ही उसकी अपनी-अपनी दृष्टि से व्याख्या भी की है। गीता भारतीय चिंतन के सार तत्व को समझने का सबसे अच्छा स्रोत है। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा रानी ने कहा कि गीता एक वैश्विक ग्रंथ है। स्कूल की प्रधानाचार्य गीतिका जसूजा ने कहा कि गीता वास्तविक रूप से आदर्श जीवन निर्माण का ग्रंथ है। कार्यक्रम का संचालन मिशन के वरिष्ठ सदस्य लखविंद्र पाल सिंह ग्रेवाल ने किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा गीता जयंती समारोह पर आयोजित 18 दिवसीय कार्यक्रम के बारहवें दिन एक संगोष्ठी डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता और भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्प अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से किया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री, प्रदेश के सलाहकार डॉ. योगेंद्र मलिक ने कहा कि गीता का दर्शन आदर्श जीवन और आदर्श समाज की संकल्पना प्रस्तुत करता है। गीता भारत का सनातन ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि आदर्श समाज का निर्माण तभी संभव है, जब समाज में आदर्श नागरिक होंगे। आदर्श जीवन निर्माण पद्धति ही भारतीय सनातन वैदिक धर्म का मूल मंत्र है। तमाम विदेशी विद्वानों ने गीता का सुव्यवस्थित अध्ययन कर गीता को आत्मसात किया। मातृभूमि सेवा मिशन के संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत के सभी प्रमुख चिंतकों ने गीता के संदेश को किसी न किसी रूप में अपना समर्थन दिया है। बहुत से दार्शनिक और विद्वानों ने गीता पर भाष्य लिखे हैं। ऐसा कोई भी भारतीय दार्शनिक, विचारक या धर्माधिकारी नहीं है, जिस पर गीता का प्रभाव न पड़ हो। पिछली एक शताब्दी में ही बालगंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, अरविंद और डॉ. सर्वपल्लीराधा कृष्णनन जैसे विचारकों और सामाजिक नेताओं ने भी गीता के संदेश को सराहा है। साथ ही उसकी अपनी-अपनी दृष्टि से व्याख्या भी की है। गीता भारतीय चिंतन के सार तत्व को समझने का सबसे अच्छा स्रोत है। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पुष्पा रानी ने कहा कि गीता एक वैश्विक ग्रंथ है। स्कूल की प्रधानाचार्य गीतिका जसूजा ने कहा कि गीता वास्तविक रूप से आदर्श जीवन निर्माण का ग्रंथ है। कार्यक्रम का संचालन मिशन के वरिष्ठ सदस्य लखविंद्र पाल सिंह ग्रेवाल ने किया।
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