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तीन वर्ष में छह करोड़ के घाटे में पहुंचा हरियाणा बीज विकास निगम
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:28 AM IST
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निगम के कर्मचारी संघ का खुलासा, एसीएस तक पहुंचा मामला तो जांच शुरू
- तीन वर्ष में छह करोड़ के घाटे में पहुंचा हरियाणा बीज विकास निगम
- निगम के कर्मचारी संघ का खुलासा, मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला तो जांच शुरू
- योजना के अभाव में गोदाम में रखा रह गया 14 करोड़ गेहूं व चार करोड़ का मूंग का बीज
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। हरियाणा बीज विकास निगम में 24 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों की जांच प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव तक मामला पहुंचने के बाद शुरू हो गई है। मामले की जांच मुख्य सचिव ने हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी आईएएस आरसी बिढान को सौंपी है। जांच अधिकारी ने निगम के अतिरिक्त निदेशक और कर्मचारी संघ को पूछताछ के लिए 8 अगस्त को बुलाया है।
हरियाणा बीज विकास निगम कर्मचारी संघ ने 14 दिसंबर 2017 को प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निगम में घोटाले के आरोप लगाए थे। संघ के प्रदेशाध्यक्ष भरत सिंह ढाका व महासचिव रवि प्रकाश ने पत्र में आरोप लगाए हैं कि पिछले 2015, 16 और 17 के दौरान ही निगम अव्यवस्था के चलते करीब 6 करोड़ रुपये के घाटे में जा चुका है। इसके पीछे सही योजना, प्रशासन व मार्केटिंग का न होना है। पिछले रबी सीजन के दौरान 14 करोड़ रुपये का 45 हजार किंवटल गेहूं का बीज, व इसी सीजन में करीब चार करोड़ का 3500 क्विंटल मूंग का बीज भी बिक नहीं सका। इसके साथ ही वर्ष 2015-16 में बरसीम का बीज भी योजनागत रूप से नहीं बिका।
कम क्षमता का लगाया गया है उमरी का प्लांट
ढाका और रविप्रकाश ने आरोप लगाए हैं कि टोहाना व उमरी स्थित निगम के केंद्रों में सीड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए गए, उनमें भी बड़े स्तर पर गड़बड़झाला किया गया है। यह प्लांट कम क्षमता के स्थापित कर दिए गए जबकि इनका भुगतान अधिक क्षमता के प्लांट के अनुसार किया गया। इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
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एक वर्ष पहले सीएम विंडों पर दी शिकायत, आज तक कार्रवाई नहीं : रवि प्रकाश
कर्मचारी संघ के महासचिव रवि प्रकाश ने बताया कि निगम में अव्यवस्था व सीड प्रोसेसिंग प्लांट के अलावा अन्य प्रकार की गड़बड़ियों को लेकर अनेकों बार सरकार को अवगत कराया गया। करीब एक वर्ष पहले सीएम विंडो पर भी शिकायत दी। लेकिन आज तक भी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। जब कहीं से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को सीधे तौर पर पत्र भेजा गया है और उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया। इसके आधार पर मुख्य सचिव ने हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी आईएएस आरसी बिढान को जांच का जिम्मा सौंप दिया है। 8 अगस्त को दोनों पक्षों से पूछताछ होगी।
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- तीन वर्ष में छह करोड़ के घाटे में पहुंचा हरियाणा बीज विकास निगम
- निगम के कर्मचारी संघ का खुलासा, मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला तो जांच शुरू
- योजना के अभाव में गोदाम में रखा रह गया 14 करोड़ गेहूं व चार करोड़ का मूंग का बीज
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। हरियाणा बीज विकास निगम में 24 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों की जांच प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव तक मामला पहुंचने के बाद शुरू हो गई है। मामले की जांच मुख्य सचिव ने हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी आईएएस आरसी बिढान को सौंपी है। जांच अधिकारी ने निगम के अतिरिक्त निदेशक और कर्मचारी संघ को पूछताछ के लिए 8 अगस्त को बुलाया है।
हरियाणा बीज विकास निगम कर्मचारी संघ ने 14 दिसंबर 2017 को प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निगम में घोटाले के आरोप लगाए थे। संघ के प्रदेशाध्यक्ष भरत सिंह ढाका व महासचिव रवि प्रकाश ने पत्र में आरोप लगाए हैं कि पिछले 2015, 16 और 17 के दौरान ही निगम अव्यवस्था के चलते करीब 6 करोड़ रुपये के घाटे में जा चुका है। इसके पीछे सही योजना, प्रशासन व मार्केटिंग का न होना है। पिछले रबी सीजन के दौरान 14 करोड़ रुपये का 45 हजार किंवटल गेहूं का बीज, व इसी सीजन में करीब चार करोड़ का 3500 क्विंटल मूंग का बीज भी बिक नहीं सका। इसके साथ ही वर्ष 2015-16 में बरसीम का बीज भी योजनागत रूप से नहीं बिका।
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कम क्षमता का लगाया गया है उमरी का प्लांट
ढाका और रविप्रकाश ने आरोप लगाए हैं कि टोहाना व उमरी स्थित निगम के केंद्रों में सीड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए गए, उनमें भी बड़े स्तर पर गड़बड़झाला किया गया है। यह प्लांट कम क्षमता के स्थापित कर दिए गए जबकि इनका भुगतान अधिक क्षमता के प्लांट के अनुसार किया गया। इसकी भी जांच की जानी चाहिए।
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एक वर्ष पहले सीएम विंडों पर दी शिकायत, आज तक कार्रवाई नहीं : रवि प्रकाश
कर्मचारी संघ के महासचिव रवि प्रकाश ने बताया कि निगम में अव्यवस्था व सीड प्रोसेसिंग प्लांट के अलावा अन्य प्रकार की गड़बड़ियों को लेकर अनेकों बार सरकार को अवगत कराया गया। करीब एक वर्ष पहले सीएम विंडो पर भी शिकायत दी। लेकिन आज तक भी कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। जब कहीं से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को सीधे तौर पर पत्र भेजा गया है और उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया गया। इसके आधार पर मुख्य सचिव ने हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एमडी आईएएस आरसी बिढान को जांच का जिम्मा सौंप दिया है। 8 अगस्त को दोनों पक्षों से पूछताछ होगी।