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अब पूरी तरह से खाली करवाकर देना होगा जमीन पर कब्जा

Thu, 01 Mar 2018 12:49 AM IST
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:49 AM IST
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अब पूरी तरह से खाली करवाकर देना होगा जमीन पर कब्जा
अब पूरी तरह से खाली करवाकर देना होगा जमीन पर कब्जा
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
नाभिकमल ठाकुरद्वारा मंदिर की धन्ना भगत पब्लिक स्कूल परिसर के साथ तीन एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन में एक बार फिर पशोपेश में आ गया है। न्यायाधीश नीतू नागर की अदालत ने प्रशासन को आदेश दिए हैं कि इस जमीन पर बने निर्माण को हटवाकर पूरी तरह खाली करवा कब्जा दिलाया जाए। अदालत ने यह आदेश मंगलवार को सुनवाई के दौरान दिए। पहले कब्जा दिलाने के दौरान ड्यूटी मजिस्ट्रेट रहे नायब तहसीलदार ने अधिकारिक रूप से आदेश मिलने से इंकार किया है
मंदिर के महंत ने दावा किया है कि नए आदेशों के अनुसार अब प्रशासन को इस जमीन पर बने सभी निर्माण हटवाने के बाद मंदिर ट्रस्ट को कब्जा दिलाना होगा। उन्होंने इन आदेशों से प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। बता दें कि 21 फरवरी को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह, संबंधित विभाग के अधिकारी और भारी पुलिस बल जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंचा था, लेकिन उस दिन यह अमला पैमाइश करवा कर लौट गया था। कब्जा लेने वाला पक्ष जेसीबी आदि लेकर पहुंचा था, लेकिन प्रशासनिक अमले ने जेसीबी चलाने से इंकार कर दिया था। इस पर कब्जा लेने वाले पक्ष ने कड़ा एतराज जताया था। प्रशासन ने यहां जेसीबी चलाने की जरूरत न होने की दलील दी थी, लेकिन संबंधित पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि प्रशासन ने महज औपचारिकता निभाते हुए अवैध निर्माण नहीं हटाया। अब अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए आदेश दिए है कि यह जमीन पूरी तरह से खाली करवा कब्जा दिलाया जाए। बता दें कि मंदिर ट्रस्ट व जाट सभा के बीच इस जमीन को लेकर विवाद है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट के हक में फैसला दिया है। इसके चलते स्थानीय अदालत भी कब्जा दिलाने के आदेश दे चुकी है। अब प्रशासन को पुलिस सहायता लेने को भी कहा गया है।
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डीसी ने कहा था कानूनी प्रक्रिया अनुसार दिलाया कब्जा
बता दें कि 21 फरवरी को हुई पैमाइश को डीसी सुमेधा कटारिया ने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई बताया था। मंदिर के महंत और अन्य संबंधित लोगों ने प्रशासन पर दबाव के चलते पूरी तरह कब्जा न दिलाने के आरोप लगाए थे। अब अदालत के नए आदेशों के चलते नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह का कहना है कि अभी आदेश उन तक अधिकारिक रूप से नहीं पहुंचे हैं। ऐसे आदेश आए तो प्रशासनिक तौर पर इसके लिए योजना तय की जाएगी।
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