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राज्यमंत्री और विधायक से सरपंच बोले, विकास कार्यों का उद्घाटन कार्यक्रम करें रद्द
Updated Sun, 01 Apr 2018 12:32 AM IST
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राज्यमंत्री और विधायक से सरपंच बोले, विकास कार्यों का उद्घाटन कार्यक्रम करें रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। सरपंचों और ग्राम सचिवों के आंदोलन का असर विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। सरपंच विकास कार्यों से किनारा करने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्र के विधायक और मंत्रियों से ऐसे कार्यक्रम टालने की मांग करने लगे हैं। ऐसी ही स्थिति शनिवार को तब बनी, जब सरपंच एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों सरपंच विधायक सुभाष सुधा के आवास पर पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात विधायक से नहीं हुई, लेकिन प्रतिनिधि से रविवार को गांव बारना और अन्य गांवों में विकास कार्यों का उद्घाटन कार्यक्रम रद्द करने की मांग की।
विधायक को गांव में करोड़ों रुपये के कई विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करना था। शाहाबाद क्षेत्र के भी एक गांव में राज्यमंत्री को विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करना था। इसे टालने के लिए वहां के दर्जनों सरपंच राज्यमंत्री के पास पहुंचे। एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह ने बताया कि दोनों ही जगहों से उन्हें सकारात्मक जवाब मिला है। गांव बारना के सरपंच का कहना है कि सरपंचों के सामूहिक आंदोलन के चलते ही कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं। आंदोलन समाप्त होने पर यह कार्यक्रम दोबारा होंगे। शमशेर सिंह के नेतृत्व में शनिवार को भी थानेसर क्षेत्र के सरपंचों ने बीडीपीओ कार्यालय पर धरना दिया और नारेबाजी की। कहा कि जब तक ई-सिस्टम को सरकार वापस नहीं लेती और बर्खास्त ग्राम सचिवों को बहाल नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान सरपंच गुरदीप, कर्मवीर, अमरजीत सिंह, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
दूसरे दिन भूख हड़ताल पर बैठे सरपंच और ग्राम सचिव
इस्माईलाबाद। प्रदेश के सभी सरपंचों और ग्राम सचिवों के साथ मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री ने किए दुर्व्यवहार के विरोध में खंड के सभी सरपंचों और ग्राम सचिवों ने बीडीपीओ कार्यालय में दूसरे दिन भी ताला जड़ दिया। इसके साथ ही कार्यालय के बाहर धरना दिया और भूख हड़ताल शुरू कर दी। ग्राम सचिव कर्मवीर सिंह, सरपंच इस्माईलाबाद संजीव अरोड़ा, नैसी की सरपंच प्रिया शर्मा के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर झांसा के सरपंच पुनीत मल्ल, सरपंच संजीव अरोड़ा इस्माईलाबाद, धडौली के सरपंच सुमित, सलपानी के सरपंच हरमन सिंह, ग्राम सचिव कर्मवीर बैठे। उन्होंने संयुक्त बयान में कहा कि धरना प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल मांगें न मानने तक जारी रहेगी। उन्होंने सरकार द्वारा सस्पेंड किए गए नौ ग्राम सचिवों को भी बहाल करने की मांग रखी। बीडीपीओ राजवीर सिंह ने कहा कि खंड के सरपंचों ने बीडीपीओ कार्यालय में ताला लगाकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया और भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
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शाहाबाद सरपंच एसोसिएशन सख्त कदम उठाने को तैयार
शाहाबाद। सरपंचों और ग्राम सचिवों का धरना शनिवार को भी जारी रहा। सरपंचों ने सरकार के खिलाफ और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरे दिन सरपंच और सचिवों ने कार्यालय के बाहर ताला जड़ा और सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाया। प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि सरकार ने बिना सोचे समझे नोटबंदी लागू की थी। उसी तरह सरपंचों पर यह निर्णय थोपा गया है। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान मलकीत सिह ने कहा कि जब तक सरकार सस्पेंड किए गए ग्राम सचिवों को बहाल नहीं करती और ई-प्रणाली वापस नहीं लेती, तब तक उनका विरोध और धरना जारी रहेगा। सरपंच रिंकू झरौली, अमरेंद्र सिंह, सरपंच विक्रम जीत ने कहा कि सरकार की इन नीतियों के कारण पंचायतों का विश्वास सरकार से उठ रहा है। ग्राम सचिव रामपाल, जितेंद्र कुमार ने कहा है कि ई-पंचायत प्रणाली का विरोध ग्राम सचिवों और सरपंचों के साथ साझा मांग पत्र है। इस अवसर पर बख्शीश नलवी, रिंकू झरौली, नेत्रपाल तंगौर, ओम प्रकाश बडाम, अमरेंद्र कठवा, विक्रमजीत रत्नगढ़, दलजीत बकाना, केसर सिंह त्यौडा आदि सरपंच मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। सरपंचों और ग्राम सचिवों के आंदोलन का असर विकास कार्यों पर पड़ने लगा है। सरपंच विकास कार्यों से किनारा करने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्र के विधायक और मंत्रियों से ऐसे कार्यक्रम टालने की मांग करने लगे हैं। ऐसी ही स्थिति शनिवार को तब बनी, जब सरपंच एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह के नेतृत्व में दर्जनों सरपंच विधायक सुभाष सुधा के आवास पर पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात विधायक से नहीं हुई, लेकिन प्रतिनिधि से रविवार को गांव बारना और अन्य गांवों में विकास कार्यों का उद्घाटन कार्यक्रम रद्द करने की मांग की।
विधायक को गांव में करोड़ों रुपये के कई विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करना था। शाहाबाद क्षेत्र के भी एक गांव में राज्यमंत्री को विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करना था। इसे टालने के लिए वहां के दर्जनों सरपंच राज्यमंत्री के पास पहुंचे। एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह ने बताया कि दोनों ही जगहों से उन्हें सकारात्मक जवाब मिला है। गांव बारना के सरपंच का कहना है कि सरपंचों के सामूहिक आंदोलन के चलते ही कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं। आंदोलन समाप्त होने पर यह कार्यक्रम दोबारा होंगे। शमशेर सिंह के नेतृत्व में शनिवार को भी थानेसर क्षेत्र के सरपंचों ने बीडीपीओ कार्यालय पर धरना दिया और नारेबाजी की। कहा कि जब तक ई-सिस्टम को सरकार वापस नहीं लेती और बर्खास्त ग्राम सचिवों को बहाल नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान सरपंच गुरदीप, कर्मवीर, अमरजीत सिंह, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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दूसरे दिन भूख हड़ताल पर बैठे सरपंच और ग्राम सचिव
इस्माईलाबाद। प्रदेश के सभी सरपंचों और ग्राम सचिवों के साथ मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री ने किए दुर्व्यवहार के विरोध में खंड के सभी सरपंचों और ग्राम सचिवों ने बीडीपीओ कार्यालय में दूसरे दिन भी ताला जड़ दिया। इसके साथ ही कार्यालय के बाहर धरना दिया और भूख हड़ताल शुरू कर दी। ग्राम सचिव कर्मवीर सिंह, सरपंच इस्माईलाबाद संजीव अरोड़ा, नैसी की सरपंच प्रिया शर्मा के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर झांसा के सरपंच पुनीत मल्ल, सरपंच संजीव अरोड़ा इस्माईलाबाद, धडौली के सरपंच सुमित, सलपानी के सरपंच हरमन सिंह, ग्राम सचिव कर्मवीर बैठे। उन्होंने संयुक्त बयान में कहा कि धरना प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल मांगें न मानने तक जारी रहेगी। उन्होंने सरकार द्वारा सस्पेंड किए गए नौ ग्राम सचिवों को भी बहाल करने की मांग रखी। बीडीपीओ राजवीर सिंह ने कहा कि खंड के सरपंचों ने बीडीपीओ कार्यालय में ताला लगाकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया और भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
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शाहाबाद सरपंच एसोसिएशन सख्त कदम उठाने को तैयार
शाहाबाद। सरपंचों और ग्राम सचिवों का धरना शनिवार को भी जारी रहा। सरपंचों ने सरकार के खिलाफ और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरे दिन सरपंच और सचिवों ने कार्यालय के बाहर ताला जड़ा और सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाया। प्रधान मलकीत सिंह ने कहा कि सरकार ने बिना सोचे समझे नोटबंदी लागू की थी। उसी तरह सरपंचों पर यह निर्णय थोपा गया है। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान मलकीत सिह ने कहा कि जब तक सरकार सस्पेंड किए गए ग्राम सचिवों को बहाल नहीं करती और ई-प्रणाली वापस नहीं लेती, तब तक उनका विरोध और धरना जारी रहेगा। सरपंच रिंकू झरौली, अमरेंद्र सिंह, सरपंच विक्रम जीत ने कहा कि सरकार की इन नीतियों के कारण पंचायतों का विश्वास सरकार से उठ रहा है। ग्राम सचिव रामपाल, जितेंद्र कुमार ने कहा है कि ई-पंचायत प्रणाली का विरोध ग्राम सचिवों और सरपंचों के साथ साझा मांग पत्र है। इस अवसर पर बख्शीश नलवी, रिंकू झरौली, नेत्रपाल तंगौर, ओम प्रकाश बडाम, अमरेंद्र कठवा, विक्रमजीत रत्नगढ़, दलजीत बकाना, केसर सिंह त्यौडा आदि सरपंच मौजूद रहे।