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अकबर के दरबारी ने लिखा था लघु समुंद्र, वो ब्रह्मसरोवर देश के 25 वें आइकॉनिक प्लेस में शुमार
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:29 AM IST
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राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
ब्रह्मसरोवर का इतिहास भले हजारों साल पुराना हो, मगर पिछले 500 साल के इतिहास में इस देश के दो रत्नों की दूरदर्शी नजर ने इस पवित्र सरोवर को खास बना दिया। अब भारत सरकार के एक मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वे में ब्रह्मसरोवर देश का 25वां आइकॉनिक प्लेस में शुमार हो चुका है।
कुरुक्षेत्र में मुगल शहंशाह अकबर के दो बार आने का वर्णन मिलता है। इस दौरान उनके साथ अकबर के शासनकाल में तमाम घटनाक्रमों को कवर करने वाले पहले नवरत्न अबुल फजल भी कुरुक्षेत्र आए थे। अकबर के इस चहेते नवरत्न ने जब पहली बार ब्रह्मसरोवर का विशाल रूप देखा तो उन्होंने अपनी पुस्तक में इसे लघु समुंद्र की संज्ञा देकर महिमा मंडन किया था। मुगलकाल के पुराने दस्तावेजों में कुरुक्षेत्र का यह घटनाक्रम आज भी दर्ज है। वहीं, भारत सरकार द्वारा ब्रह्मसरोवर को मिली रैंकिंग की यह अच्छी खबर दो खास मौकों पर आई है। इनमें पहला खास मौका यह है कि एक दिन बाद ही भारत रत्न गुलजारी लाल नंदा का जन्मदिवस 4 जुलाई को ही है, जबकि दूसरा अहम मौका यह है कि एक माह बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड 50 साल पूरा करते हुए गोल्डन जुबली मनाने जा रहा है।
केडीबी की स्थापना में भारत रत्न नंदाजी का सबसे बड़ा योगदान रहा। ब्रह्मसरोवर और कुरुक्षेत्र के कायाकल्प में नंदाजी के योगदान की सराहना विपक्षी दलों के नेता पार्टी लाइन से ऊपर उठकर हमेशा करते हैं। यही कारण है कि 4 जुलाई 1999 को ब्रह्मसरोवर के तट पर ही नंदाजी की समाधि सदाचार स्थल का उद्घाटन करने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पहुंचे थे। बहरहाल ताजा अच्छी सूचना का कारण है भारत सरकार का पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय। यह मंत्रालय जल्द देश के 100 आइकॉनिक प्लेस को चिह्नित करेगा। इसके पहले चरण में देश के 30 प्रसिद्ध स्थलों को चयन हो चुका है। इनमें कुरुक्षेत्र को 25वां रैंक मिला है। इस सूची में ताजमहल, स्वर्ण मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्रप्रदेश, सोमनाथ मंदिर जैसे 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों के नाम शुमार है।
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गौरतलब है कि आजादी से पहले और बाद के करीब 25 साल तक ब्रह्मसरोवर उपेक्षित रहा। यह सरोवर स्वच्छ जल की जगह दलदल और कमल कुंड से सराबोर हो चुका था। इसके जीर्णोद्धार की पहल लोकसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने की थी। तीन बार भारत योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे नंदाजी की योजना से ही 1975 में ब्रह्मसरोवर को सुंदर स्वरूप मिला था। पिछले करीब चार दशक में ब्रह्मसरोवर ने अपनी खास पहचान बनाई है। मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार भी ब्रह्मसरोवर की सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करनी योजना बना रही है। इसमें से काफी पैसा इसी सुंदरता पर पिछले दो वर्षों में खर्च भी हो चुका है।
भगवान श्रीकृष्ण, गुरुनानक देव, मुगल शासक अकबर का मिलता है वर्णन
इन पौराणिक सरोवर के साथ साथ ब्रह्मसरोवर का अपना एक इतिहास है, जहां सूर्यग्रहण के अवसर पर परिवार सहित भगवान श्रीकृष्ण के अलावा समय-समय पर कई संत, महात्मा, गुरुओं और राजाओं के आने का उल्लेख मिलता है। मुगल शासक अकबर का 1556 और 1581 में दो बार कुरुक्षेत्र में आने का उल्लेख मिलता है। वहीं सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी, गुरु अमरदास, गुरु रामदास, गुरु हरगोबिंद सिंह, गुरु हरराय, गुरु हरकिशन, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह की कुरुक्षेत्र यात्राओं का वर्णन है। इनमें से दो गुरु साहिबान के ऐतिहासिक गुरुद्वारे आज भी ब्रह्मसरोवर के तट से चंद कदम की दूरी पर है।
ब्रिटिश शिलालेख भी बताते हैं ब्रह्मसरोवर का महत्व
मुगलकाल में लंबे समय तक उपेक्षित रहे इस सरोवर को ब्रिटिशकाल में भी थोड़ा संरक्षण मिला था। इसकी जानकारी ब्रह्मसरोवर लगे ब्रिटिशकाल के शिलालेखों से मिलती है। इन प्राचीन शिलालेखों पर ब्रह्मसरोवर के महत्व और तत्कालीन उच्चाधिकारियों के नाम और उनके द्वारा जारी किए गए आदेशों को आज भी यहां देखा जा सकता है।
हैदराबाद कांफ्रेंस में दी गई जानकारी
बताया गया है कि हैदराबाद में 25 और 26 जून 2018 को भारत सरकार की तरफ से दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। इस कांफ्रेंस में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा और केडीबी सदस्य उपेंद्र सिंघल ने भी शिरकत की। इन्होंने कुरुक्षेत्र के पर्यटन, धार्मिक स्थलों के इतिहास ओर महता के बारे में विस्तार से सबके समक्ष रखा था।
राज्यपाल, सीएम, सुधा, डीसी और सीईओ के प्रयास : छाबड़ा
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया और केडीबी की सीईओ पूजा चांवरिया के साथ-साथ तमाम स्टाफ के सदस्यों के प्रयासों से कुरुक्षेत्र को यह उपलब्धि मिल पाई है।
ब्रह्मसरोवर को स्वच्छ बनाने की बनाई बेहतर योजना:फुलिया
उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर का देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है। भारत सरकार के आदेशानुसार ब्रह्मसरोवर के घाटों, शौचालयों, साफ-सफाई, डस्टबीन, डंपर आदि सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं को जहन में रखकर एक योजना तैयार की जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुरुक्षेत्र को मिलेगी एक नई पहचान : सुधा
थानेसर विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से ही ब्रह्मसरोवर को देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल किया गया है। सरकार की तरफ से स्वर्ण मंदिर, ताजमहल की तर्ज पर ब्रह्मसरोवर को स्वच्छ बनाने का काम किया जाएगा।
प्लास्टिक फ्री होंगे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल
उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि भारत सरकार ने जिन 30 धार्मिक स्थलों को प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों की सूचि में शामिल किया है, उन सभी धार्मिक स्थलों को प्लास्टिक फ्री बनाया जाएगा। इसी कड़ी में ब्रह्मसरोवर को भी प्लास्टिक फ्री बनाया जाएगा। इसके लिए सभी के सहयोग की जरूरत होगी।
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कुरुक्षेत्र।
ब्रह्मसरोवर का इतिहास भले हजारों साल पुराना हो, मगर पिछले 500 साल के इतिहास में इस देश के दो रत्नों की दूरदर्शी नजर ने इस पवित्र सरोवर को खास बना दिया। अब भारत सरकार के एक मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वे में ब्रह्मसरोवर देश का 25वां आइकॉनिक प्लेस में शुमार हो चुका है।
कुरुक्षेत्र में मुगल शहंशाह अकबर के दो बार आने का वर्णन मिलता है। इस दौरान उनके साथ अकबर के शासनकाल में तमाम घटनाक्रमों को कवर करने वाले पहले नवरत्न अबुल फजल भी कुरुक्षेत्र आए थे। अकबर के इस चहेते नवरत्न ने जब पहली बार ब्रह्मसरोवर का विशाल रूप देखा तो उन्होंने अपनी पुस्तक में इसे लघु समुंद्र की संज्ञा देकर महिमा मंडन किया था। मुगलकाल के पुराने दस्तावेजों में कुरुक्षेत्र का यह घटनाक्रम आज भी दर्ज है। वहीं, भारत सरकार द्वारा ब्रह्मसरोवर को मिली रैंकिंग की यह अच्छी खबर दो खास मौकों पर आई है। इनमें पहला खास मौका यह है कि एक दिन बाद ही भारत रत्न गुलजारी लाल नंदा का जन्मदिवस 4 जुलाई को ही है, जबकि दूसरा अहम मौका यह है कि एक माह बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड 50 साल पूरा करते हुए गोल्डन जुबली मनाने जा रहा है।
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केडीबी की स्थापना में भारत रत्न नंदाजी का सबसे बड़ा योगदान रहा। ब्रह्मसरोवर और कुरुक्षेत्र के कायाकल्प में नंदाजी के योगदान की सराहना विपक्षी दलों के नेता पार्टी लाइन से ऊपर उठकर हमेशा करते हैं। यही कारण है कि 4 जुलाई 1999 को ब्रह्मसरोवर के तट पर ही नंदाजी की समाधि सदाचार स्थल का उद्घाटन करने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी पहुंचे थे। बहरहाल ताजा अच्छी सूचना का कारण है भारत सरकार का पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय। यह मंत्रालय जल्द देश के 100 आइकॉनिक प्लेस को चिह्नित करेगा। इसके पहले चरण में देश के 30 प्रसिद्ध स्थलों को चयन हो चुका है। इनमें कुरुक्षेत्र को 25वां रैंक मिला है। इस सूची में ताजमहल, स्वर्ण मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्रप्रदेश, सोमनाथ मंदिर जैसे 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों के नाम शुमार है।
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गौरतलब है कि आजादी से पहले और बाद के करीब 25 साल तक ब्रह्मसरोवर उपेक्षित रहा। यह सरोवर स्वच्छ जल की जगह दलदल और कमल कुंड से सराबोर हो चुका था। इसके जीर्णोद्धार की पहल लोकसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा ने की थी। तीन बार भारत योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे नंदाजी की योजना से ही 1975 में ब्रह्मसरोवर को सुंदर स्वरूप मिला था। पिछले करीब चार दशक में ब्रह्मसरोवर ने अपनी खास पहचान बनाई है। मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार भी ब्रह्मसरोवर की सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करनी योजना बना रही है। इसमें से काफी पैसा इसी सुंदरता पर पिछले दो वर्षों में खर्च भी हो चुका है।
भगवान श्रीकृष्ण, गुरुनानक देव, मुगल शासक अकबर का मिलता है वर्णन
इन पौराणिक सरोवर के साथ साथ ब्रह्मसरोवर का अपना एक इतिहास है, जहां सूर्यग्रहण के अवसर पर परिवार सहित भगवान श्रीकृष्ण के अलावा समय-समय पर कई संत, महात्मा, गुरुओं और राजाओं के आने का उल्लेख मिलता है। मुगल शासक अकबर का 1556 और 1581 में दो बार कुरुक्षेत्र में आने का उल्लेख मिलता है। वहीं सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी, गुरु अमरदास, गुरु रामदास, गुरु हरगोबिंद सिंह, गुरु हरराय, गुरु हरकिशन, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह की कुरुक्षेत्र यात्राओं का वर्णन है। इनमें से दो गुरु साहिबान के ऐतिहासिक गुरुद्वारे आज भी ब्रह्मसरोवर के तट से चंद कदम की दूरी पर है।
ब्रिटिश शिलालेख भी बताते हैं ब्रह्मसरोवर का महत्व
मुगलकाल में लंबे समय तक उपेक्षित रहे इस सरोवर को ब्रिटिशकाल में भी थोड़ा संरक्षण मिला था। इसकी जानकारी ब्रह्मसरोवर लगे ब्रिटिशकाल के शिलालेखों से मिलती है। इन प्राचीन शिलालेखों पर ब्रह्मसरोवर के महत्व और तत्कालीन उच्चाधिकारियों के नाम और उनके द्वारा जारी किए गए आदेशों को आज भी यहां देखा जा सकता है।
हैदराबाद कांफ्रेंस में दी गई जानकारी
बताया गया है कि हैदराबाद में 25 और 26 जून 2018 को भारत सरकार की तरफ से दो दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। इस कांफ्रेंस में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा और केडीबी सदस्य उपेंद्र सिंघल ने भी शिरकत की। इन्होंने कुरुक्षेत्र के पर्यटन, धार्मिक स्थलों के इतिहास ओर महता के बारे में विस्तार से सबके समक्ष रखा था।
राज्यपाल, सीएम, सुधा, डीसी और सीईओ के प्रयास : छाबड़ा
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया और केडीबी की सीईओ पूजा चांवरिया के साथ-साथ तमाम स्टाफ के सदस्यों के प्रयासों से कुरुक्षेत्र को यह उपलब्धि मिल पाई है।
ब्रह्मसरोवर को स्वच्छ बनाने की बनाई बेहतर योजना:फुलिया
उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर का देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि है। भारत सरकार के आदेशानुसार ब्रह्मसरोवर के घाटों, शौचालयों, साफ-सफाई, डस्टबीन, डंपर आदि सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं को जहन में रखकर एक योजना तैयार की जाएगी।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुरुक्षेत्र को मिलेगी एक नई पहचान : सुधा
थानेसर विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से ही ब्रह्मसरोवर को देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल किया गया है। सरकार की तरफ से स्वर्ण मंदिर, ताजमहल की तर्ज पर ब्रह्मसरोवर को स्वच्छ बनाने का काम किया जाएगा।
प्लास्टिक फ्री होंगे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल
उपायुक्त डॉ. एसएस फुलिया ने कहा कि भारत सरकार ने जिन 30 धार्मिक स्थलों को प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों की सूचि में शामिल किया है, उन सभी धार्मिक स्थलों को प्लास्टिक फ्री बनाया जाएगा। इसी कड़ी में ब्रह्मसरोवर को भी प्लास्टिक फ्री बनाया जाएगा। इसके लिए सभी के सहयोग की जरूरत होगी।