{"_id":"597e21c34f1c1b4b238b48cb","slug":"161501438403-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काम्यकेश्वर तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काम्यकेश्वर तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गांव कमोदा के श्री काम्यकेश्वर महादेव मंदिर एवं तीर्थ पर सावन माह की रविवारीय शुक्ला सप्तमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने श्री काम्यकेश्वर महादेव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तीर्थ पर सुबह ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। देर सायं तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रीजयराम संस्था और गांव वासियों के सहयोग से मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मोक्ष के लिए स्नान किया और दान-दक्षिणा दी। मंदिर को लड़ियों से सजाया गया थी और तीर्थ को स्वच्छ जल के साथ भरा गया था।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवारीय शुक्ल सप्तमी के दिन तीर्थ में स्नान करने से मोक्ष व पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। वामन पुराण के अध्याय 2 के 34 वें श्लोक के काम्यकवन तीर्थ प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि रविवार को सूर्य भगवान पूषा नाम से साक्षात रूप से विद्यमान रहते हैं। ग्रामीण सुमिंद्र शास्त्री ने बताया कि इसी पावन धरा पर पांडवों को सांत्वना एवं धर्मोपदेश देने हेतु महर्षि वेदव्यास जी, महर्षि लोमहर्षण जी, नीतिवेता विदुर जी, देवर्षि नारद जी, वृहदश्र्व जी, संजय एवं महर्षि मार्कंडेय जी पधारे थे। इस अवसर पर ग्रामीण सुखदेव कमोदा, संजीव, धर्मपाल, महावीर कमोदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भंडारे में सहयोग किया।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र।
गांव कमोदा के श्री काम्यकेश्वर महादेव मंदिर एवं तीर्थ पर सावन माह की रविवारीय शुक्ला सप्तमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने श्री काम्यकेश्वर महादेव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तीर्थ पर सुबह ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। देर सायं तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रीजयराम संस्था और गांव वासियों के सहयोग से मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मोक्ष के लिए स्नान किया और दान-दक्षिणा दी। मंदिर को लड़ियों से सजाया गया थी और तीर्थ को स्वच्छ जल के साथ भरा गया था।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवारीय शुक्ल सप्तमी के दिन तीर्थ में स्नान करने से मोक्ष व पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। वामन पुराण के अध्याय 2 के 34 वें श्लोक के काम्यकवन तीर्थ प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि रविवार को सूर्य भगवान पूषा नाम से साक्षात रूप से विद्यमान रहते हैं। ग्रामीण सुमिंद्र शास्त्री ने बताया कि इसी पावन धरा पर पांडवों को सांत्वना एवं धर्मोपदेश देने हेतु महर्षि वेदव्यास जी, महर्षि लोमहर्षण जी, नीतिवेता विदुर जी, देवर्षि नारद जी, वृहदश्र्व जी, संजय एवं महर्षि मार्कंडेय जी पधारे थे। इस अवसर पर ग्रामीण सुखदेव कमोदा, संजीव, धर्मपाल, महावीर कमोदा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भंडारे में सहयोग किया।
विज्ञापन