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100 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल, फिर भी रक्तदान शिविर के लिए विद्यार्थियों को लाने पड़े अपने बेड
Updated Sun, 30 Sep 2018 12:10 AM IST
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100 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल, फिर भी रक्तदान शिविर के लिए विद्यार्थियों को लाने पड़े अपने बेड
- कॉलेज प्रशासन ने पहले शिविर लगाने और बाद में बेड देने से किया इंकार
- मांगों को लेकर 11 दिन से अस्पताल के बाहर धरना दे रहे विद्यार्थियों ने शिविर में किया 42 यूनिट रक्तदान अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। समय पर परीक्षाएं व परिणाम जारी किए जाने सहित 12 मांगों को लेकर 11 दिन से धरना दे रहे प्रदेश के एकमात्र श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थियों ने शनिवार को विरोध जताने का अनोखा तरीका अपनाते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया। विद्यार्थियों को इसके लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पहले तो कॉलेज प्रशासन ने शिविर लगाने से ही इंकार कर दिया। बाद में कड़ी मशक्कत के बाद मंजूूरी तो दे दी, लेकिन 100 बेड के अस्पताल में उन्हें निजी तौर पर बेड का प्रबंध करना पड़ा।
शिविर में 42 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। इसके बाद भी विद्यार्थियों में रक्तदान के लिए उत्साह बना रहा, लेकिन चिकित्सकों की टीम सीमित व्यवस्था के चलते रक्त नहीं ले पाई। कॉलेज प्रशासन के इस रवैये से विद्यार्थियों में भारी रोष बना हुआ है और उन्होंने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। विद्यार्थियों ने शनिवार को भी भूख हड़ताल जारी रखी और नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कॉलेज प्रशासन को यह शिविर लगाने के संबंध में अवगत कराया था, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद शनिवार को सुबह उन्होंने धरनास्थल पर ही टेंट लगाकर शिविर की तैयारी की तो प्रशासन ने इसकी इजाजत देने से इंकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि लिखित में अनुमति लेनी होगी। आनन-फानन में लिखित में पत्र दिया तो काफी इंतजार के बाद अनुमति दी गई। इसमें भी सीएमओ ने संदेश भिजवा दिया गया कि खुले में रक्तदान शिविर नियमों के मुताबिक नहीं लगाया जा सकता जबकि उन्होंने टेंट लगाकर पूरी तरह से कवर किया हुआ था। इसके बावजूद शिविर व धरना के हटवाने के लिए पुलिस बल बुलाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। वे शिविर लगाने पर अड़े रहे तो कॉलेज प्रशासन ने बेड देने से ही इंकार कर दिया। जिसके बाद विद्यार्थी निजी स्तर पर पांच बेड लेकर आए। इसके बाद कड़ी मशक्कत करने पर प्रशासन ने अस्पताल के अंदर मुख्य गेट के पास हॉल में ही शिविर लगाने की अनुमति दी। विद्यार्थियों ने कॉलेज व पीजीआईएमएस विश्वविद्यालय रोहतक प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
चिकित्सकों की टीम भी करती रही इंतजार
शिविर लगाने को लेकर विद्यार्थियों व कॉलेज प्रशासन के बीच तकरार के चलते एलएनजेपी सिविल अस्पताल से रक्त एकत्रित करने पहुंची चिकित्सकों की टीम भी इंतजार करती रही। अस्पताल परिसर में शिविर की अनुमति न मिलने पर विद्यार्थियों ने बॉयज हॉस्टल में यह शिविर लगाने का प्रस्ताव रखा। इस पर भी टीम ने इंकार कर दिया। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन के दबाव के चलते इस टीम ने भी पहले शिविर शुरू करने में आनाकानी की, लेकिन जब वे रक्तदान पर अड़े रहे तो टीम ने रक्त एकत्रित करना शुरू किया।
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विद्यार्थी बोले, नहीं हुई मांग पूरी
रोष जता रहे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि वे 11 दिनों से धरना दे रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने आज तक कोई मांग पूरी नहीं की है। महज मौखिक प्रस्ताव से बहाने उन्हें गुमराह कर धरना समाप्त कराने के लिए आयुष विश्विविद्यालय के रजिस्ट्रार व कॉलेज प्राचार्य ने प्रयास किए, लेकन जब तक आधिकारिक तौर पर लिखित में प्रस्ताव नहीं रखा जाता तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
ये छात्राएं रहीं भूख हड़ताल पर, सोमवार से आमरण अनशन
शनिवार को मंजू, गीतिका, कंचन व ज्योति मेहरा भूख हड़ताल पर बैठीं। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि रविवार तक उनकी मांगें पूरी नहीं की र्गईं तो सोमवार से वे आमरण अनशन शुरू करेंगी।
विद्यार्थियों ने जिद कर लगाए अपने बेड, प्रशासन ने नहीं किया इंकार : रजिस्ट्रार
विद्यार्थियों को शिविर लगाने व बेड देने से इंकार नहीं किया। विद्यार्थियों ने ही जिद कर अपने बेड लगाए। चिकित्सकों की टीम ने भी बताया कि विद्यार्थी जिद कर अपने निजी बेड लाए। खुले में रक्तदान शिविर नियमानुसार नहीं लगाया जा सकता जबकि प्रशासन ने अस्पताल के अंदर शिविर लगाने की भी अनुमति दी। विद्यार्थियों की लगभग सभी मांगे पूरी कर दी है और अब वे बेवजह धरने पर हैं।
- डॉ. कृष्ण कुमार जाटियान, रजिस्ट्रार, आयुष विश्वविद्यालय
आयुष महानिदेशक के निरीक्षण को लेकर कॉलेज प्रशासन में मचा रहा हड़कंप
आयुष महानिदेशक डॉ. साकेत कुमार के निरीक्षण को लेकर शनिवार को कॉलेज व आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप सा मचा रहा। प्रशासन ने उस समय राहत की सांस ली जब शाम करीब साढ़े चार बजे संदेश मिला की किन्हीं कारणों के चलते महानिदेशक नहीं आएंगे। महानिदेशक ने 23 सितंबर को यहां निरीक्षण के दौरान प्रशासन को चेतावनी दी थी कि व्यवस्था दुरुस्त की जाए और वे 29 सितंबर को फिर से निरीक्षण करने पहुंचेंगे। इसी अल्टीमेटम के चलते प्रशासन में आज तक हड़बड़ी सी मची रही।
मांगों पर विद्यार्थियों का तर्क
- छात्राओं की सुरक्षा नहीं और आज भी शरारती तत्व फब्तियां कसते हैं।
- परीक्षा अधर में लटकी, इंटर्न भत्ता हर महीने मिलने की मांग पर महज प्रस्ताव बनाने का ही आश्वासन।
- एग्जाम कैलेंडर बनाने की मांग पर केवल टेंटेटिव डेटशीट बना कर झाड़ा पल्ल ।
- स्टूडेंट फंड के लिए विद्यार्थियों की कोई कमेटी नहीं बनाई गई।
- कॉलेज परिसर के बीच में से गुजरने वाली सड़क पर न बैरिकेड्स लगे न ब्रेकर बने, न ही सीसीटीवी कैमरे का कोई प्रस्ताव।
- न पगडंडी बनाने की शुरुआत हुई और न ही खेल मैदान व पार्क में सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो सका।
- फ्री वाईफाई के लिए भी कुछ नहीं हुआ।
- हॉस्टल में पानी की लीकेज ठीक करने के लिए भी 11वें दिन शुुरू हो पाया काम।
- पीने के साफ पानी, वाटर प्यूरिफायर लगवाने, पहचान पत्र बनाने, वाटर कूलर, दीवारों एवं अलमारियों के रख रखाव की दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाए गए।
प्रायार्चा डॉ. देवेंद्र खुराना का मांगों को लेकर तर्क
- सभी रिजल्ट किए जा चुके हैं जारी, परीक्षाओं के लिए टेंटेटिव कैलेंडर भी जारी।
- इंर्टनशिप के लिए अतिरिक्त बजट की विभाग से मांग की गई है।
- स्टूडेंट फंड को लेकर विद्यार्थियों से कमेटी के लिए नाम मांगे गए, जो नहीं मिले।
- बीसी व एससी स्कॉलरशिप को लेकर समाज कल्याण विभाग को आवेदन किया, कॉलेज स्तर पर कोई आवेदन लंबित नहीं।
- कॉलेज परिसर से गुजरती सड़क पर बैरिकेड्स को लेकर डीसी को अवगत कराया गया है।
- जेनरेटर का प्रापोजल विभाग से स्वीकृत, आगामी कार्रवाई शुरू की।
- कॉलेज में फ्री वाईफाई के लिए टेलिकॉम कंपनी की ओर से फिटिंग का काम पूरा, जल्द मिलेगी सुविधा। छात्रावास के लिए दूसरी कंपनी से किया जा रहा संपर्क।
- खेल सामान के लिए विभाग से मिली अनुमति, कोच को लेकर खेल विभाग से किया गया अनुरोध।
- छात्रावास की छत की मरम्मत शुरू, परिसर से कटाई गई घास, मिटटी डलवाने का काम किया पूरा।
- छात्रावास के फर्नीचर को दुरुस्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को भेजा पत्र।
- सभी वाटर प्योरिफायर की कराई सर्विस, नए के लिए विभाग से मिली स्वीकृति।
- सभी विद्यार्थियों को लाइब्रेरी कम पहचान पत्र किए जा चुके जारी, नए पहचान पत्रों के लिए कार्यवाही की जा चुकी है शुरू।
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100 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल, फिर भी रक्तदान शिविर के लिए विद्यार्थियों को लाने पड़े अपने बेड
- कॉलेज प्रशासन ने पहले शिविर लगाने और बाद में बेड देने से किया इंकार
- मांगों को लेकर 11 दिन से अस्पताल के बाहर धरना दे रहे विद्यार्थियों ने शिविर में किया 42 यूनिट रक्तदान अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। समय पर परीक्षाएं व परिणाम जारी किए जाने सहित 12 मांगों को लेकर 11 दिन से धरना दे रहे प्रदेश के एकमात्र श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थियों ने शनिवार को विरोध जताने का अनोखा तरीका अपनाते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया। विद्यार्थियों को इसके लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पहले तो कॉलेज प्रशासन ने शिविर लगाने से ही इंकार कर दिया। बाद में कड़ी मशक्कत के बाद मंजूूरी तो दे दी, लेकिन 100 बेड के अस्पताल में उन्हें निजी तौर पर बेड का प्रबंध करना पड़ा।
शिविर में 42 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। इसके बाद भी विद्यार्थियों में रक्तदान के लिए उत्साह बना रहा, लेकिन चिकित्सकों की टीम सीमित व्यवस्था के चलते रक्त नहीं ले पाई। कॉलेज प्रशासन के इस रवैये से विद्यार्थियों में भारी रोष बना हुआ है और उन्होंने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। विद्यार्थियों ने शनिवार को भी भूख हड़ताल जारी रखी और नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कॉलेज प्रशासन को यह शिविर लगाने के संबंध में अवगत कराया था, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद शनिवार को सुबह उन्होंने धरनास्थल पर ही टेंट लगाकर शिविर की तैयारी की तो प्रशासन ने इसकी इजाजत देने से इंकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि लिखित में अनुमति लेनी होगी। आनन-फानन में लिखित में पत्र दिया तो काफी इंतजार के बाद अनुमति दी गई। इसमें भी सीएमओ ने संदेश भिजवा दिया गया कि खुले में रक्तदान शिविर नियमों के मुताबिक नहीं लगाया जा सकता जबकि उन्होंने टेंट लगाकर पूरी तरह से कवर किया हुआ था। इसके बावजूद शिविर व धरना के हटवाने के लिए पुलिस बल बुलाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। वे शिविर लगाने पर अड़े रहे तो कॉलेज प्रशासन ने बेड देने से ही इंकार कर दिया। जिसके बाद विद्यार्थी निजी स्तर पर पांच बेड लेकर आए। इसके बाद कड़ी मशक्कत करने पर प्रशासन ने अस्पताल के अंदर मुख्य गेट के पास हॉल में ही शिविर लगाने की अनुमति दी। विद्यार्थियों ने कॉलेज व पीजीआईएमएस विश्वविद्यालय रोहतक प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
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शिविर लगाने को लेकर विद्यार्थियों व कॉलेज प्रशासन के बीच तकरार के चलते एलएनजेपी सिविल अस्पताल से रक्त एकत्रित करने पहुंची चिकित्सकों की टीम भी इंतजार करती रही। अस्पताल परिसर में शिविर की अनुमति न मिलने पर विद्यार्थियों ने बॉयज हॉस्टल में यह शिविर लगाने का प्रस्ताव रखा। इस पर भी टीम ने इंकार कर दिया। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन के दबाव के चलते इस टीम ने भी पहले शिविर शुरू करने में आनाकानी की, लेकिन जब वे रक्तदान पर अड़े रहे तो टीम ने रक्त एकत्रित करना शुरू किया।
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रोष जता रहे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि वे 11 दिनों से धरना दे रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने आज तक कोई मांग पूरी नहीं की है। महज मौखिक प्रस्ताव से बहाने उन्हें गुमराह कर धरना समाप्त कराने के लिए आयुष विश्विविद्यालय के रजिस्ट्रार व कॉलेज प्राचार्य ने प्रयास किए, लेकन जब तक आधिकारिक तौर पर लिखित में प्रस्ताव नहीं रखा जाता तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
ये छात्राएं रहीं भूख हड़ताल पर, सोमवार से आमरण अनशन
शनिवार को मंजू, गीतिका, कंचन व ज्योति मेहरा भूख हड़ताल पर बैठीं। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि रविवार तक उनकी मांगें पूरी नहीं की र्गईं तो सोमवार से वे आमरण अनशन शुरू करेंगी।
विद्यार्थियों ने जिद कर लगाए अपने बेड, प्रशासन ने नहीं किया इंकार : रजिस्ट्रार
विद्यार्थियों को शिविर लगाने व बेड देने से इंकार नहीं किया। विद्यार्थियों ने ही जिद कर अपने बेड लगाए। चिकित्सकों की टीम ने भी बताया कि विद्यार्थी जिद कर अपने निजी बेड लाए। खुले में रक्तदान शिविर नियमानुसार नहीं लगाया जा सकता जबकि प्रशासन ने अस्पताल के अंदर शिविर लगाने की भी अनुमति दी। विद्यार्थियों की लगभग सभी मांगे पूरी कर दी है और अब वे बेवजह धरने पर हैं।
- डॉ. कृष्ण कुमार जाटियान, रजिस्ट्रार, आयुष विश्वविद्यालय
आयुष महानिदेशक के निरीक्षण को लेकर कॉलेज प्रशासन में मचा रहा हड़कंप
आयुष महानिदेशक डॉ. साकेत कुमार के निरीक्षण को लेकर शनिवार को कॉलेज व आयुष विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप सा मचा रहा। प्रशासन ने उस समय राहत की सांस ली जब शाम करीब साढ़े चार बजे संदेश मिला की किन्हीं कारणों के चलते महानिदेशक नहीं आएंगे। महानिदेशक ने 23 सितंबर को यहां निरीक्षण के दौरान प्रशासन को चेतावनी दी थी कि व्यवस्था दुरुस्त की जाए और वे 29 सितंबर को फिर से निरीक्षण करने पहुंचेंगे। इसी अल्टीमेटम के चलते प्रशासन में आज तक हड़बड़ी सी मची रही।
मांगों पर विद्यार्थियों का तर्क
- छात्राओं की सुरक्षा नहीं और आज भी शरारती तत्व फब्तियां कसते हैं।
- परीक्षा अधर में लटकी, इंटर्न भत्ता हर महीने मिलने की मांग पर महज प्रस्ताव बनाने का ही आश्वासन।
- एग्जाम कैलेंडर बनाने की मांग पर केवल टेंटेटिव डेटशीट बना कर झाड़ा पल्ल ।
- स्टूडेंट फंड के लिए विद्यार्थियों की कोई कमेटी नहीं बनाई गई।
- कॉलेज परिसर के बीच में से गुजरने वाली सड़क पर न बैरिकेड्स लगे न ब्रेकर बने, न ही सीसीटीवी कैमरे का कोई प्रस्ताव।
- न पगडंडी बनाने की शुरुआत हुई और न ही खेल मैदान व पार्क में सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो सका।
- फ्री वाईफाई के लिए भी कुछ नहीं हुआ।
- हॉस्टल में पानी की लीकेज ठीक करने के लिए भी 11वें दिन शुुरू हो पाया काम।
- पीने के साफ पानी, वाटर प्यूरिफायर लगवाने, पहचान पत्र बनाने, वाटर कूलर, दीवारों एवं अलमारियों के रख रखाव की दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाए गए।
प्रायार्चा डॉ. देवेंद्र खुराना का मांगों को लेकर तर्क
- सभी रिजल्ट किए जा चुके हैं जारी, परीक्षाओं के लिए टेंटेटिव कैलेंडर भी जारी।
- इंर्टनशिप के लिए अतिरिक्त बजट की विभाग से मांग की गई है।
- स्टूडेंट फंड को लेकर विद्यार्थियों से कमेटी के लिए नाम मांगे गए, जो नहीं मिले।
- बीसी व एससी स्कॉलरशिप को लेकर समाज कल्याण विभाग को आवेदन किया, कॉलेज स्तर पर कोई आवेदन लंबित नहीं।
- कॉलेज परिसर से गुजरती सड़क पर बैरिकेड्स को लेकर डीसी को अवगत कराया गया है।
- जेनरेटर का प्रापोजल विभाग से स्वीकृत, आगामी कार्रवाई शुरू की।
- कॉलेज में फ्री वाईफाई के लिए टेलिकॉम कंपनी की ओर से फिटिंग का काम पूरा, जल्द मिलेगी सुविधा। छात्रावास के लिए दूसरी कंपनी से किया जा रहा संपर्क।
- खेल सामान के लिए विभाग से मिली अनुमति, कोच को लेकर खेल विभाग से किया गया अनुरोध।
- छात्रावास की छत की मरम्मत शुरू, परिसर से कटाई गई घास, मिटटी डलवाने का काम किया पूरा।
- छात्रावास के फर्नीचर को दुरुस्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को भेजा पत्र।
- सभी वाटर प्योरिफायर की कराई सर्विस, नए के लिए विभाग से मिली स्वीकृति।
- सभी विद्यार्थियों को लाइब्रेरी कम पहचान पत्र किए जा चुके जारी, नए पहचान पत्रों के लिए कार्यवाही की जा चुकी है शुरू।