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न मेक इन इंडिया पर भरोसा, न ही जीएफआर, कैसे हुई चीन के माल पर बौछार

Wed, 15 Nov 2017 12:39 AM IST
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:39 AM IST
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न मेक इन इंडिया पर भरोसा, न ही जीएफआर, कैसे हुई चीन के माल पर बौछार
न मेक इन इंडिया पर भरोसा, न ही जीएफआर, कैसे हुई चीन के माल पर बौछार
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मोदी के मेक इन इंडिया को झटका देते हुए अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजकों ने शी जिनपिंग के चीनी माल पर भरोसा जताया है। दरअसल, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने इस बिग ईवेंट की हर हरकत पर निगाह रखने के लिए 15 से 20 लाख रुपये का बजट रखा है। इस बजट से क्लोज सर्किट कैमरे और वेब बेस काउंटर लगाए जाएंगे। करीब चार किलोमीटर के दायरे में फैले इस अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में आने जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जाएगी। इसके लिए करीब 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाने का जिम्मा निजी एजेंसी को दिया गया है। इसके लिए ई टेंडर कॉल किए गए थे। बता दें कि गीता महोत्सव में हर टेंडर में स्वदेशी समान लगाने और चीन का माल उपयोग न करने का ठोस नियम लागू किया गया है। इसमें सजावट के सामान से लेकर लाइटिंग और अन्य सामग्री शामिल है।
बावजूद इसके मेला क्षेत्र में लगाए जा रहे 200 से अधिक कैमरों की कंपनी चीन की है। अमर उजाला ने इस सच्चाई को परखा तो यह सही मिली। ब्रह्मसरोवर की करीब चार किलोमीटर की परिधि में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे चीन की कंपनी नेक्सस के हैं। केडीबी के एक अधिकारी के मुताबिक यह कैमरे भारत सरकार ने कृष्णा सर्किट प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा टूरिज्म के माध्यम से लगवाये हैं। केडीबी के ही एक अन्य पदाधिकारी इन कैमरों को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा लगवाने की बात कर रहे हैं। इन्हें लगवाया किसी ने भी हो, लेकिन अहम पहलू यह है कि टेंडर प्रक्रिया में नियम को नजरंदाज किसके इशारे पर किया गया। किसके कहने पर मेड इन चाइना माल का उपयोग किया गया। टेंडर की शर्तों पर यदि अमल नहीं किया गया तो न केवल यह टेंडर रद हो सकता है, बल्कि लगाए गए सीटीवीवी कैमरे भी हटाए जा सकते हैं।
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बता दें कि 24 मई 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने सरकारी खरीद में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता देने की नीति को हरी झंडी देते हए कार्यान्वयन सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) को सुनिश्चित किया था। इस नीति से स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जानी है। वर्ष 2022 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी में 26-25 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया। यदि मोदी के मेक इन इंडिया में बने माल की जगह चीन का माल सरकारी स्थानों पर लगता रहा, तो 2022 तक घरेलू उत्पादों की विनिर्माण में हिस्सेदारी कहां तक पहुंच सकेगी,यह तो गीता के माध्यम से कर्म का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण ही बता सकेंगे।
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मेक इन इंडिया में शामिल कंपनियां को क्यों किया नजरंदाज
पिछले वर्षों में भारत की ऐसी कई कंपनियां उभर कर सामने आई हैं, जिन्होंने अपने देश के बाहर बार सीसीटीवी कैमरे बनाने में दक्षता हासिल की है। इनमें कुछ कंपनियां मेक इन इंडिया में शामिल हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि गीता महोत्सव की टेंडर प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता बरती जा रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की एक लॉबी ने भी इस पूरे मामले की रपट तैयार कर इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय दिखी रही है।

मानद सचिव ने माना कि हुई है गलती
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन राज्यपाल और उपाध्यक्ष मुख्यमंत्री के बाद तीसरे मुख्य पदाधिकारी मानद सचिव हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव अशोक सुखीजा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने माना कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में विदेेशी और विशेष रूप से चीन के सामान का इस्तेमाल नहीं करने के लिए गाइड लाइन जारी की गई है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो वह इसकी जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि इस पर संज्ञान लिया जाएगा। केडीबी के अधिकारियों और टेंडर कमेटी ने इतनी बड़ी गलती कैसे की। इसकी भी जांच होगी, क्योंकि लाखों रुपये ऐसे विषय पर बर्बाद करना घोर लापरवाही है।

मेक इन इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 25 सितंबर 2014 को मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। देशी और विदेशी कंपनियों ने भारत में ही वस्तुओं के निर्माण को मजबूती दी जा सके। लेकिन, मेक इन इंडिया का मूलमंत्र देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना भी है। इसका दृष्टिकोण निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना, आधुनिक और कुशल बुनियादी संरचना, विदेशी निवेश के लिए नए क्षेत्रों को खोलना और सरकार एवं उद्योग के मध्य एक साझेदारी का निर्माण करना है।


ब्रह्मसरोवर के कंट्रोल रूम में 16 में से 10 कैमरे बंद
ब्रह्मसरोवर की परिक्रमा में 16 कैमरे लगे हैं। इनमें से अधिकांश कैमरे खराब हैं। जो कैमरे चालू हालत में है, उनकी हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है। बता दें कि गीता महोत्सव से पहले टेंडर प्रक्रिया के तहत जो कैमरे लगवाए गए हैं। उनका कंट्रोल रूम में केयू थाने में स्थापित किया जा रहा है। पहले से लगे 16 कैमरों का कंट्रोल रूम में ब्रह्मसरोवर तट पर ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यालय के समीप बना है। इस कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर 16 में से महज 10 सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में मिले।
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