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ताऊदेवी लाल पार्क में खुले पड़े रहते हैं बिजली के तार, फव्वारों का बुरा हाल
Updated Sun, 11 Mar 2018 12:24 AM IST
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ताऊदेवी लाल पार्क में खुले पड़े रहते हैं बिजली के तार, फव्वारों का बुरा हाल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। विश्व मानचित्र पर कुुरुक्षेत्र को लाने के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन नगर परिषद और हुडा अधिकारियों की बेरुखी की वजह से यह केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। कभी शहर की शान माने जाने वाले सबसे बड़े ताऊ देवीलाल पार्क की हालत भी इस वजह से बद से बदतर होती जा रही है। जीटी रोड के किनारे सेक्टर-2 में करीब 18 एकड़ बेशकीमती जमीन पर स्थित यह पार्क अपनी स्थापना के बाद से ही प्रशासनिक अनदेखी का शिकार रहा है। न नगर परिषद ने इसकी सुध ली है और न ही हुडा ही इस पार्क को लेकर गंभीर दिख रहा है। इसके चलते यह पार्क अब शहर के सबसे बदहाल पार्क के तौर पर जाना जाने लगा है। यहां के हालात इतने खराब हैं कि यहां की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। अनेक पोल और ट्यूब लाइट तक गायब हैं। कभी पार्क की खूबसूरती बढ़ाने वाले दोनों ओर लगे फव्वारे भी वर्षों से बदहाल हैं। पार्क के बीच में स्थित चबूतरा भी जर्जर हो चुका है। इसके साथ ही जिस चबूतरे पर ताऊ देवीलाल की प्रतिमा स्थापित है, वह भी खस्ता हो चुका है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले की आज तक सर्विस तक नहीं कराई गई है। इस वजह से अधिकतर झूले कंडम हो चुके हैं। बच्चे कई बार इनसे गिरकर हादसे का शिकार हो चुके हैं। यहीं नहीं पार्क में जगह-जगह बिजली के पोलों के साथ खुले पड़े नंगे तार कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। पार्क में स्थित एकमात्र वाटर कूलर भी जर्जर हालत में है। अधिकतर पगडंडी भी खस्ताहाल हो चुकी हैं। यहां सैर करने आने वाले लोगों का दावा है कि यह पार्क मनचलों का अड्डा बन चुका है। इसके साथ ही यहां वाहन चोर भी घूमते रहते हैं। यही कारण है कि पिछले दो माह में यहां से पांच दोपहिया वाहन चोरी हो चुके हैं।
नोटिस बोर्ड लगाकर निभाई औपचारिकता
बागवानी और हुडा ने पार्क में कई जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर ली है। इन बोर्ड पर पार्क को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाने, इसमें साइकिल न चलाने, फुटबाल आदि न खेलने, गंदगी न फैलाने और फूल, पौधे आदि को न तोड़ने की हिदायत दी गई है। ऐसा करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी लिखी है। इसके बाद दोनों ही विभागों के साथ नगर परिषद भी अपनी जिम्मेदारी भूल गए।
पार्क जाने से कतराने लगे क्षेत्रीय निवासी
इस पार्क में कभी हर रोज सैकड़ों लोग सुबह और शाम सैर करने पहुंचते थे। दिन भर भी यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पार्क के बदहाल होने के बाद अब लोग यहां आने से कतराने लगे हैं। वाहन चोरी की घटनाओं से भी लोगों डरे रहते हैं।
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केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने वर्ष 2002 में किया था उद्घाटन
वर्ष 2002 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन और प्रदेश के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इस पार्क का उद्घाटन किया था। इसके बाद कुछ समय तक यह पार्क शहर ही नहीं आसपास के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा।
यहां आते जरूर हैं, लेकिन होते हैं निराश : नरेंद्र
पार्क में सैर करने आए सेक्टर-5 निवासी नरेंद्र कुमार अरोड़ा का कहना था कि वे यहां आते जरूर है, लेकिन निराशा ही मिलती है। इतने बड़े पार्क की दुर्दशा को देखकर दुख होता है। यहां न बच्चों के लिए सही और व्यवस्थित झूले हैं। न ही देर शाम बिजली आदि का उचित प्रबंध है।
देखभाल की जाती तो नहीं होते पार्क के ऐसे हालात : बलवंत
सेक्टर-3 निवासी बुजुर्ग बलवंत सिंह का कहना है कि कभी यह पार्क शहर की शान था, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी की वजह से यह बदहाल होता गया। पार्क में लगाए फव्वारे कई वर्षों से बंद हैं। तार भी जगह-जगह से कटे पड़े हैं।
गंदगी के ढेर में बदल गए फव्वारे : बलवान
पार्क में हर रोज सुबह सैर करने आने वाले बलवान सिंह हुड्डा का कहना है कि इतने बड़े पार्क के रखरखाव के लिए बजट में से शायद एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा। यहां लगाए गए फव्वारे कूढ़े के ढेर में तब्दील होने लगे हैं। इनका लाखों रुपये का सामान भी कबाड़ हो चुका है।
जल्द की जाएगी पार्क की कायाकल्प : भारती
हुडा अधिकारी योगेश रंगा का कहना है कि पार्क में बिजली, साफ सफाई , झूले आदि की व्यवस्था बनाए रखना नगर परिषद परिषद की जिम्मेदारी है। इस बारे में नप ईओ बीएन भारती का कहना है कि पार्क का जल्द कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से प्रपोजल बनाया जाएगा। शहर के दूसरे पार्कों को भी जल्द ही बेहतर बनाया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। विश्व मानचित्र पर कुुरुक्षेत्र को लाने के लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन नगर परिषद और हुडा अधिकारियों की बेरुखी की वजह से यह केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। कभी शहर की शान माने जाने वाले सबसे बड़े ताऊ देवीलाल पार्क की हालत भी इस वजह से बद से बदतर होती जा रही है। जीटी रोड के किनारे सेक्टर-2 में करीब 18 एकड़ बेशकीमती जमीन पर स्थित यह पार्क अपनी स्थापना के बाद से ही प्रशासनिक अनदेखी का शिकार रहा है। न नगर परिषद ने इसकी सुध ली है और न ही हुडा ही इस पार्क को लेकर गंभीर दिख रहा है। इसके चलते यह पार्क अब शहर के सबसे बदहाल पार्क के तौर पर जाना जाने लगा है। यहां के हालात इतने खराब हैं कि यहां की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। अनेक पोल और ट्यूब लाइट तक गायब हैं। कभी पार्क की खूबसूरती बढ़ाने वाले दोनों ओर लगे फव्वारे भी वर्षों से बदहाल हैं। पार्क के बीच में स्थित चबूतरा भी जर्जर हो चुका है। इसके साथ ही जिस चबूतरे पर ताऊ देवीलाल की प्रतिमा स्थापित है, वह भी खस्ता हो चुका है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले की आज तक सर्विस तक नहीं कराई गई है। इस वजह से अधिकतर झूले कंडम हो चुके हैं। बच्चे कई बार इनसे गिरकर हादसे का शिकार हो चुके हैं। यहीं नहीं पार्क में जगह-जगह बिजली के पोलों के साथ खुले पड़े नंगे तार कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। पार्क में स्थित एकमात्र वाटर कूलर भी जर्जर हालत में है। अधिकतर पगडंडी भी खस्ताहाल हो चुकी हैं। यहां सैर करने आने वाले लोगों का दावा है कि यह पार्क मनचलों का अड्डा बन चुका है। इसके साथ ही यहां वाहन चोर भी घूमते रहते हैं। यही कारण है कि पिछले दो माह में यहां से पांच दोपहिया वाहन चोरी हो चुके हैं।
नोटिस बोर्ड लगाकर निभाई औपचारिकता
बागवानी और हुडा ने पार्क में कई जगहों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर ली है। इन बोर्ड पर पार्क को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाने, इसमें साइकिल न चलाने, फुटबाल आदि न खेलने, गंदगी न फैलाने और फूल, पौधे आदि को न तोड़ने की हिदायत दी गई है। ऐसा करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी लिखी है। इसके बाद दोनों ही विभागों के साथ नगर परिषद भी अपनी जिम्मेदारी भूल गए।
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पार्क जाने से कतराने लगे क्षेत्रीय निवासी
इस पार्क में कभी हर रोज सैकड़ों लोग सुबह और शाम सैर करने पहुंचते थे। दिन भर भी यहां लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पार्क के बदहाल होने के बाद अब लोग यहां आने से कतराने लगे हैं। वाहन चोरी की घटनाओं से भी लोगों डरे रहते हैं।
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केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने वर्ष 2002 में किया था उद्घाटन
वर्ष 2002 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन और प्रदेश के मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने इस पार्क का उद्घाटन किया था। इसके बाद कुछ समय तक यह पार्क शहर ही नहीं आसपास के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा।
यहां आते जरूर हैं, लेकिन होते हैं निराश : नरेंद्र
पार्क में सैर करने आए सेक्टर-5 निवासी नरेंद्र कुमार अरोड़ा का कहना था कि वे यहां आते जरूर है, लेकिन निराशा ही मिलती है। इतने बड़े पार्क की दुर्दशा को देखकर दुख होता है। यहां न बच्चों के लिए सही और व्यवस्थित झूले हैं। न ही देर शाम बिजली आदि का उचित प्रबंध है।
देखभाल की जाती तो नहीं होते पार्क के ऐसे हालात : बलवंत
सेक्टर-3 निवासी बुजुर्ग बलवंत सिंह का कहना है कि कभी यह पार्क शहर की शान था, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी की वजह से यह बदहाल होता गया। पार्क में लगाए फव्वारे कई वर्षों से बंद हैं। तार भी जगह-जगह से कटे पड़े हैं।
गंदगी के ढेर में बदल गए फव्वारे : बलवान
पार्क में हर रोज सुबह सैर करने आने वाले बलवान सिंह हुड्डा का कहना है कि इतने बड़े पार्क के रखरखाव के लिए बजट में से शायद एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा। यहां लगाए गए फव्वारे कूढ़े के ढेर में तब्दील होने लगे हैं। इनका लाखों रुपये का सामान भी कबाड़ हो चुका है।
जल्द की जाएगी पार्क की कायाकल्प : भारती
हुडा अधिकारी योगेश रंगा का कहना है कि पार्क में बिजली, साफ सफाई , झूले आदि की व्यवस्था बनाए रखना नगर परिषद परिषद की जिम्मेदारी है। इस बारे में नप ईओ बीएन भारती का कहना है कि पार्क का जल्द कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से प्रपोजल बनाया जाएगा। शहर के दूसरे पार्कों को भी जल्द ही बेहतर बनाया जाएगा।