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पवित्र मार्गशीर्ष मास में बनेगा रविवारीय शुक्ला सप्तमी का महायोग

Sat, 25 Nov 2017 12:30 AM IST
Updated Sat, 25 Nov 2017 12:30 AM IST
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पवित्र मार्गशीर्ष मास में बनेगा रविवारीय शुक्ला सप्तमी का महायोग
पवित्र मार्गशीर्ष मास में बनेगा रविवारीय शुक्ला सप्तमी का महायोग
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
यहां के गांव कमौदा में बने काम्यकेश्वर तीर्थ पर 26 नवंबर रविवार को शुक्ला सप्तमी का मेला लगेगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेले में हजारों की संख्या में लोग पवित्र सरोवर में स्नान करेंगे। साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक होगा। जलाभिषेक के बाद मंदिर परिसर में भंडारा आयोजित किया जाएगा।

मंदिर के इतिहास के बारे में शिक्षाविद सुमिंद्र शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवारीय शुक्ल सप्तमी के दिन इस तीर्थ में स्नान करने से मोक्ष और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। महर्षि पुलस्त्य और महर्षि लोमहर्षण ने वामन पुराण में काम्यकवन तीर्थ की उत्पत्ति का वर्णन किया है। उन्होंने बताया है कि इस तीर्थ की उत्पत्ति महाभारत काल से पूर्व की है। एक वार नैमिषारण्य के निवासी बहुत ज्यादा संख्या में कुरुक्षेत्र की भूमि के अंतर्गत सरस्वती नदी में स्नान करने के लिए काम्यवक वन आए थे। वे सरस्वती में स्नान न कर सके। उन्होंने यज्ञोपवितिक नामक तीर्थ की कल्पना की और स्नान किया। फिर भी शेष लोग उसमें प्रवेश न पा सके। तब से मां सरस्वती ने उनकी इच्छा पूर्ण करने के लिए साक्षात कुंज रूप में प्रकट होकर दर्शन दिए और पश्चिम-वाहनी होकर बहने लगीं। इससे स्पष्ट होता है कि काम्यकेश्वर तीर्थ और मंदिर की उत्पत्ति महाभारत काल से पूर्व की है। वामन पुराण के अध्याय 2 के 34 वें श्लोक में काम्यकवन तीर्थ प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि रविवार को सूर्य भगवान पूषा नाम से साक्षात रूप में विद्यमान रहते हैं। इसी पावन धरा पर पांडवों को सांत्वना और धर्मोपदेश देने के लिए महर्षि वेदव्यास, महर्षि लोमहर्षण, नीतिवेता विदुर, देवर्षि नारद, वृहदव, संजय और महर्षि मरकंडेय पधारे थे। द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण अपनी धर्मपत्नी सत्यभामा के साथ पांडवों को सांत्वना देने पहुंचे थे। पांडवों को दुर्वासा ऋषि के श्राप से बचाने के लिए और सांत्वना देने के लिए भी भगवान श्रीकृष्ण काम्यकेश्वर तीर्थ पर पधारे थे। उन्होंने बताया कि पांडवों के वंशज सोमवती अमावस्या, फल्गू तीर्थ के समान शुक्ला सप्तमी का इंतजार करते रहते थे।
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