{"_id":"5bb7bd63867a5534ef184d27","slug":"111538768227-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमार होने के भय से करीब 300 मजदूरों ने किया कुरुक्षेत्र अनाज मंडी से पलायन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमार होने के भय से करीब 300 मजदूरों ने किया कुरुक्षेत्र अनाज मंडी से पलायन
Updated Sat, 06 Oct 2018 01:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो 36 से 38
बीमार होने के भय से करीब 300 मजदूरों ने किया कुरुक्षेत्र अनाज मंडी से पलायन
- आढ़तियों से लेकर लेबर ठेकेदारों की भी फूलीं सांसें, और भी मजदूर कर सकते हैं पलायन
- करीब 12 हजार मजदूर कर रहे अनाज मंडी में आढ़तियों के पास कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पांच दिन पहले अनाज मंडी में फैली बीमारी के डर से मजदूर पलायन करने लगे हैं। दूषित पेयजल और अन्य सुविधाओं के अभाव में मजदूरों में भय बना हुआ है। लेबर ठेकेदारों की मानें तो इसी भय के चलते मंडी से अब तक करीब 300 मजदूर पलायन कर चुके हैं। ऐसे में धान का सीजन तेज होने के चलते आढ़तियों और लेबर ठेकेदार भी चिंतित हैं।
बता दें कि अनाज मंडी में करीब 12 हजार मजदूर पहुंचे हुए हैं, जो धान की सफाई से लेकर तुलाई, उठान सहित अन्य सभी कार्य निपटाते हैं। अनाज मंडी में धान का पूरा सीजन इन मजदूरों पर ही निर्भर करता है। लेकिन अक्तूबर शुरू होते ही अचानक ही मजदूर बीमार होने लगे। करीब दर्जन भर मजदूर अस्पताल पहुंचे तो अनाज मंडी प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग भी जागा और चार जगहों से लीक पेयजल पाइपलाइन को दुरुस्त कराया गया तो वहीं दूसरे प्रबंध किए जाने के भी दावे किए गए। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी अधिकतर दावों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
अभी भी दर्जनों मजदूर जाने को तैयार : रामफल
मजदूर यूनियन प्रधान एवं ठेकेदार रामफल का कहना है कि मंडी में पेयजल से लेकर अन्य समस्याओं के चलते अब तक करीब 300 मजदूर मंडी से अपने घर लौट चुके हैं। दर्जनों मजदूर यहां से जाने को तैयार हैं, जिन्हें समझाकर यहां रहने के लिए सहमत किया गया है। अभी मंडी में पेयजल आपूर्ति के हालात कुछ बेहतर हुए हैं, लेकिन कई बार समय पर न पीने का पानी मिलता और न ही बिजली होती है। मंडी में ऐसी ही व्यवस्था रही तो भविष्य में यहां आने से मजदूर किनारा करने लगेंगे।
विज्ञापन
12 हजार मजदूर, महज चार शौचालय : बिट्टू
लेबर ठेकेदार बिट्टू का कहना है कि अनाज मंडी में करीब 12 हजार मजदूर हैं जबकि महज चार शौचालय हैं। हर सीजन में यहां पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की गंभीर समस्या रहती है। इससे मजदूर बीमार होते हैं। अभी तक उनके पास से भी 40 मजदूर अपने घर लौट चुके हैं। कई अन्य ठेकेदारों से भी ऐसी ही सूचना मिल रही है।
मजदूरों की समस्या को हर सीजन में किया जाता रहा दरकिनार : दौलत
आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान दौलत राम बंसल का कहना है कि प्रशासन समय रहते पूरे प्रबंध नहीं करता। उनकी समस्याओं को अधिकारी दरकिनार करते रहे हैं। अभी भी मजदूर दूषित पेयजल व अन्य समस्याओं के चलते बीमारी के भय से यहां काम छोड़ घरों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में सीजन के दौरान मजदूरों का अकाल पड़ जाएगा, जिससे अनाज खरीद व उठान कार्य प्रभावित होगा।
हर व्यवस्था पर रखी जा रही पूरी निगरानी : सचिव
मार्केट कमेटी सचिव राहुल मियों का कहना है कि अनाज मंडी में अब मजदूरों की हर समस्या व व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है। पेयजल क्लोरीन मिलाकर ही सप्लाई किया जा रहा है जबकि शौचालयों की भी निरंतर सफाई कराई जा रही है। दोनों ट्यूबवेल पर डोजर लगाया हुआ है। मार्केटिंग बोर्ड के कंस्ट्रक्शन विंग के एसडीओ व वह खुद मौके पर जाकर जांच कर रहे हैं।
विज्ञापन
बीमार होने के भय से करीब 300 मजदूरों ने किया कुरुक्षेत्र अनाज मंडी से पलायन
- आढ़तियों से लेकर लेबर ठेकेदारों की भी फूलीं सांसें, और भी मजदूर कर सकते हैं पलायन
- करीब 12 हजार मजदूर कर रहे अनाज मंडी में आढ़तियों के पास कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पांच दिन पहले अनाज मंडी में फैली बीमारी के डर से मजदूर पलायन करने लगे हैं। दूषित पेयजल और अन्य सुविधाओं के अभाव में मजदूरों में भय बना हुआ है। लेबर ठेकेदारों की मानें तो इसी भय के चलते मंडी से अब तक करीब 300 मजदूर पलायन कर चुके हैं। ऐसे में धान का सीजन तेज होने के चलते आढ़तियों और लेबर ठेकेदार भी चिंतित हैं।
बता दें कि अनाज मंडी में करीब 12 हजार मजदूर पहुंचे हुए हैं, जो धान की सफाई से लेकर तुलाई, उठान सहित अन्य सभी कार्य निपटाते हैं। अनाज मंडी में धान का पूरा सीजन इन मजदूरों पर ही निर्भर करता है। लेकिन अक्तूबर शुरू होते ही अचानक ही मजदूर बीमार होने लगे। करीब दर्जन भर मजदूर अस्पताल पहुंचे तो अनाज मंडी प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग भी जागा और चार जगहों से लीक पेयजल पाइपलाइन को दुरुस्त कराया गया तो वहीं दूसरे प्रबंध किए जाने के भी दावे किए गए। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी अधिकतर दावों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
विज्ञापन
अभी भी दर्जनों मजदूर जाने को तैयार : रामफल
मजदूर यूनियन प्रधान एवं ठेकेदार रामफल का कहना है कि मंडी में पेयजल से लेकर अन्य समस्याओं के चलते अब तक करीब 300 मजदूर मंडी से अपने घर लौट चुके हैं। दर्जनों मजदूर यहां से जाने को तैयार हैं, जिन्हें समझाकर यहां रहने के लिए सहमत किया गया है। अभी मंडी में पेयजल आपूर्ति के हालात कुछ बेहतर हुए हैं, लेकिन कई बार समय पर न पीने का पानी मिलता और न ही बिजली होती है। मंडी में ऐसी ही व्यवस्था रही तो भविष्य में यहां आने से मजदूर किनारा करने लगेंगे।
विज्ञापन
12 हजार मजदूर, महज चार शौचालय : बिट्टू
लेबर ठेकेदार बिट्टू का कहना है कि अनाज मंडी में करीब 12 हजार मजदूर हैं जबकि महज चार शौचालय हैं। हर सीजन में यहां पीने के पानी से लेकर शौचालय तक की गंभीर समस्या रहती है। इससे मजदूर बीमार होते हैं। अभी तक उनके पास से भी 40 मजदूर अपने घर लौट चुके हैं। कई अन्य ठेकेदारों से भी ऐसी ही सूचना मिल रही है।
मजदूरों की समस्या को हर सीजन में किया जाता रहा दरकिनार : दौलत
आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान दौलत राम बंसल का कहना है कि प्रशासन समय रहते पूरे प्रबंध नहीं करता। उनकी समस्याओं को अधिकारी दरकिनार करते रहे हैं। अभी भी मजदूर दूषित पेयजल व अन्य समस्याओं के चलते बीमारी के भय से यहां काम छोड़ घरों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में सीजन के दौरान मजदूरों का अकाल पड़ जाएगा, जिससे अनाज खरीद व उठान कार्य प्रभावित होगा।
हर व्यवस्था पर रखी जा रही पूरी निगरानी : सचिव
मार्केट कमेटी सचिव राहुल मियों का कहना है कि अनाज मंडी में अब मजदूरों की हर समस्या व व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है। पेयजल क्लोरीन मिलाकर ही सप्लाई किया जा रहा है जबकि शौचालयों की भी निरंतर सफाई कराई जा रही है। दोनों ट्यूबवेल पर डोजर लगाया हुआ है। मार्केटिंग बोर्ड के कंस्ट्रक्शन विंग के एसडीओ व वह खुद मौके पर जाकर जांच कर रहे हैं।