{"_id":"893a015a2356b281ab1fd5a8861eda71","slug":"yoke-fellow-looked-typical-college-student","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठेठ सांगी नजर आए कॉलेज के छात्र ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठेठ सांगी नजर आए कॉलेज के छात्र
कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 09 Feb 2014 12:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र के भगवान परशुराम कॉलेज की ओर से चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव में दूसरे दिन आरकेएसडी कॉलेज कैथल के विद्यार्थियों ने ‘ध्रुव भक्त’ सांग का मंचन किया।
इस मौके पर मुख्यातिथि के रूप में केयू युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक डॉ. अनूप लाठर रहे। उनका सभा में पहुंचने पर कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष नारायण दत्त, प्राचार्य डॉ. योगेश्वर जोशी व कॉलेज के स्टाफ ने उनका भव्य स्वागत किया।
डॉ. जोशी ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए डॉ. लाठर ने सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि केयू की ओर से रत्नावली युवा सांग महोत्सव इन्हीं के प्रयासों से कॉलेज स्तर पर आरंभ किया गया। मुख्यातिथि लाठर ने कहा कि सांग उत्तर भारत के सभी क्षेत्रों में लोकप्रिय रहा है।
विज्ञापन
इस विधा को आरंभ करने का श्रेय सूर्यकवि पंडित लख्मीचंद को जाता है, जिन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाया, परंतु अब इससे युवा वर्ग विमुख होता जा रहा है। केयू का प्रयास है कि सांग यूनिवर्सिटी से निकल कर कॉलेज स्तर पर चले। इस मौके पर आयोजकों ने मुख्यातिथि को स्मृति चिह्न प्रदान किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर शीशपाल, डॉ. हीरालाल, डॉ. सुभाष, डॉ. मनोहरलाल, प्रोफेसर कैलाश, डॉ. नंदकिशोर, प्रोफेसर कर्मजीत संधू, डॉ. नीरज वशिष्ठ, प्रोफेसर संजय शर्मा और अनिल कौशिक मौजूद रहे।
विज्ञापन
इस मौके पर मुख्यातिथि के रूप में केयू युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक डॉ. अनूप लाठर रहे। उनका सभा में पहुंचने पर कॉलेज प्रबंधक समिति के अध्यक्ष नारायण दत्त, प्राचार्य डॉ. योगेश्वर जोशी व कॉलेज के स्टाफ ने उनका भव्य स्वागत किया।
विज्ञापन
डॉ. जोशी ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए डॉ. लाठर ने सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि केयू की ओर से रत्नावली युवा सांग महोत्सव इन्हीं के प्रयासों से कॉलेज स्तर पर आरंभ किया गया। मुख्यातिथि लाठर ने कहा कि सांग उत्तर भारत के सभी क्षेत्रों में लोकप्रिय रहा है।
विज्ञापन
इस विधा को आरंभ करने का श्रेय सूर्यकवि पंडित लख्मीचंद को जाता है, जिन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाया, परंतु अब इससे युवा वर्ग विमुख होता जा रहा है। केयू का प्रयास है कि सांग यूनिवर्सिटी से निकल कर कॉलेज स्तर पर चले। इस मौके पर आयोजकों ने मुख्यातिथि को स्मृति चिह्न प्रदान किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर शीशपाल, डॉ. हीरालाल, डॉ. सुभाष, डॉ. मनोहरलाल, प्रोफेसर कैलाश, डॉ. नंदकिशोर, प्रोफेसर कर्मजीत संधू, डॉ. नीरज वशिष्ठ, प्रोफेसर संजय शर्मा और अनिल कौशिक मौजूद रहे।