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Karnal News: ग्रांट की कमी से अटके कार्य... सरपंचों ने गिनाए काम, बाधाएं भी बताईं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:15 AM IST
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Works stalled due to lack of grants... Sarpanchs list projects and highlight obstacles.
गांव चिड़ाव के बीडीपीओ कार्यालय में अमर उजाला की ओर से आयोजित सरपंच संवाद में उप​स्थित सरपंच और
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल/जुंडला। गांवों की तस्वीर बदलने के लिए केवल गली और नालियां बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि स्थानीय जरूरतों को पहचानकर दूरगामी सोच के साथ विकास कार्य तय करने होंगे। मंगलवार को अमर उजाला के सरपंच संवाद में चिड़ाव खंड की 22 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने इस अहम पहलू को इंगित किया।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कराए गए कार्यों और गांवों की लंबित जरूरतों को सामने रखा। किसी पंचायत ने सामुदायिक भवन और बैंक्वेट हॉल की मांग उठाई तो किसी ने बदहाल जल निकासी, अधूरी गलियों, खेतों के रास्तों और खेल सुविधाओं का मुद्दा रखा। संवाद में यह बात भी उभरकर आई कि कई समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर पहल और प्रशासनिक सहयोग से संभव है।
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खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में आयोजित संवाद में बीडीपीओ मोनिका मुख्य अतिथि और ब्लॉक समिति चेयरमैन सतीश कुमार विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने गांवों में कराए गए विकास कार्यों के साथ उन योजनाओं का भी जिक्र किया, जो बजट या विभागीय स्तर पर काम अटकने के कारण पूरी नहीं हो पा रही हैं।
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01. शाहपुर में सामुदायिक भवन की मांग

शाहपुर ग्राम पंचायत चिड़ाव खंड की समृद्ध पंचायत है। यहां विकास के विभिन्न कार्य हुए हैं, लेकिन ग्रामीण लंबे समय से बड़े सामुदायिक भवन की मांग कर रहे हैं। भवन बनने से ग्रामीणों को गांव में ही सुविधा मिलेगी और शादी समारोहों के लिए अलग से बैंक्वेट हॉल नहीं लेना पड़ेगा। - चंद्रभान, सरपंच, शाहपुर


02. बैंक्वेट हॉल का निर्माण जरूरी

ग्राम पंचायत की ओर से बैंक्वेट हॉल के निर्माण के लिए जगह तय की गई है, लेकिन ग्रांट नहीं मिलने से यह जनहित का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग और ग्रांट उपलब्ध कराई जाए तो बैंक्वेट हॉल का निर्माण कराया जा सकता है। - यशवीर, सरपंच प्रतिनिधि, दादुपुर


03. जुंडला में नए बस स्टैंड की दरकार

जुंडला चिड़ाव खंड की ग्राम पंचायत होने के साथ बड़ा कस्बा भी है। यहां से जींद और हिसार जाने वाला राजकीय मार्ग निकलता है। रोजाना सैकड़ों यात्री बसों से सफर करते हैं। यहां नया बस स्टैंड बनाया जाना चाहिए। इसके लिए विधायक और स्थानीय सरपंचों का सहयोग जरूरी है। - सतीश नरवाल, सरपंच प्रतिनिधि, जुंडला


04. लिंक सड़कों का निर्माण जरूरी

बजीदा रोडान में ब्रह्मानंद महाराज का आश्रम धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां हिंदू धर्म के सभी जातियों के लोग दूर-दराज के गांवों से आते हैं। ऐसे में गांव से जुड़ने वाली सभी लिंक सड़कों का निर्माण और समय-समय पर मरम्मत जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं और अन्य लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। - कुलदीप, सरपंच, बजीदा रोडान


05. कतलाहेड़ी में बैंक्वेट हॉल का निर्माण जरूरी

कतलाहेड़ी में धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर काम हुए हैं, लेकिन बैंक्वेट हॉल के निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित है। गांव की व्यायामशाला में अभ्यास कर बुजुर्ग स्वस्थ रह रहे हैं। अधिक लोगों को योग की सुविधा देने के लिए गांव में एक अतिरिक्त व्यायामशाला भी खोली जानी चाहिए। - सुनील राणा, सरपंच प्रतिनिधि, कतलाहेड़ी


06. डेयरियों के गंदे पानी की निकासी दुरुस्त हो

पिंगली में निगम ने डेयरी संचालकों को जगह आवंटित कर स्थायी डेयरियां बनवाई हैं। इनसे निकलने वाला गंदा पानी स्टेडियम की जगह में छोड़ा जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों को परेशानी होती है। गंदे पानी के उचित निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाए, ताकि स्टेडियम में विकास कार्य कराए जा सकें। -नरेश शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि, पिंगली


07. खेतों और डेरों के रास्ते पक्के किए जाएं

बालू में खेतों और डेरों तक जाने वाले सभी रास्ते पक्के किए जाने चाहिए। किसानों को सुबह और रात के समय खेतों में आने-जाने में परेशानी होती है। खेतों में घर बनाकर डेरों पर रहने वाले लोगों की समस्या बारिश में और बढ़ जाती है। प्रशासन को इन रास्तों के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। -सुशील कुमार, सरपंच, बालू


08. साढ़े छह एकड़ में खेल परिसर बने
हथलाना में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साढ़े छह एकड़ में खेल परिसर और खेल भवन बनाने की घोषणा की थी। खेल भवन का निर्माण पिछले छह साल से अधूरा है, जिससे भवन जर्जर हो चुका है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए खेल परिसर और भवन का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाना चाहिए। -ईश्वर सिंह, सरपंच, हथलाना


251. गंदे पानी की निकासी दुरुस्त कराई जाए



गांव में पेयजल की भारी समस्या है। आबादी के हिसाब से जनस्वास्थ्य विभाग ने ट्यूबवेल तो लगाया है, लेकिन पानी की आपूर्ति के लिए पूरे गांव में पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। निकासी व्यवस्था भी ठप है। बारिश में नालियां ओवरफ्लो होने से गलियों में गंदा पानी बहने लगता है। -सुरेश कुमार, सरपंच, डबरी

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पाइपलाइन नहीं बिछने से गलियों का निर्माण अधूरा

घोघड़ीपुर में जनस्वास्थ्य विभाग ने टेंडर के माध्यम से पाइपलाइन बिछाने का काम आवंटित किया था। करीब एक साल बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ और गांव की गलियां उखड़ी पड़ी हैं। बारिश में इन गलियों में फिसलकर लोग चोटिल हो रहे हैं। जिला प्रशासन को समस्या का समाधान कराना चाहिए। -अशोक, सरपंच प्रतिनिधि, घोघड़ीपुर
बेगू वाले तालाब का सुंदरीकरण हो

गांव में स्थित बेगू वाले तालाब का सुंदरीकरण जरूरी है। इसे बेहतर तरीके से विकसित करने से गांव की जल निकासी व्यवस्था भी सुदृढ़ की जा सकती है। इसके अलावा, घर-घर से कचरा उठाने के लिए गांव में ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध नहीं है। इस कारण लोग खुले में कचरा डाल रहे हैं। यह सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाए। -विकास कुमार, सरपंच, नरूखेड़ी
जल निकासी सुधरे, सोलर लाइटें लगें
अलीपुर ग्राम पंचायत में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दौरान गलियां कीचड़ से भर जाती हैं। गांव की गलियों में सोलर लाइटें भी नहीं लगी हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। - केवल सिंह, अलीपुर वीरान
जोहड़ों की सफाई जरूरी

औंगद गांव के तीनों बड़े जोहड़ गंदगी से भरकर ओवरफ्लो हो चुके हैं। जिला प्रशासन को इनके सफाई कार्य के लिए टेंडर जारी कर काम शुरू कराना चाहिए या ग्राम पंचायत को अलग से फंड उपलब्ध कराना चाहिए। जोहड़ों की सफाई होने से गांव की जल निकासी व्यवस्था भी दुरुस्त हो सकेगी। - सियाराम, सरपंच प्रतिनिधि, औंगद
ग्राम सचिवालय और व्यायामशाला बने

ग्राम पंचायत बीड़ माजरा में ग्राम सचिवालय और व्यायामशाला का निर्माण जरूरी है। ग्राम सचिवालय में लोगों की सुविधा के लिए अटल सेवा केंद्र या आधार केंद्र खोला जा सकता है। व्यायामशाला बनने से ग्रामीण सामूहिक रूप से योग कर सकेंगे। पंचायत की ओर से इन दोनों कार्यों के लिए प्रस्ताव भी दिया जा चुका है। -राहुल, सरपंच प्रतिनिधि, बीड़ माजरा


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कम आमदनी में भी बेहतर काम कर सकती हैं पंचायतें

बीडीपीओ मोनिका ने कहा कि ग्राम पंचायतें कम आमदनी के बावजूद बेहतर कार्य कर सकती हैं। राजस्थान के एक गांव में बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाने की परंपरा से घना वन क्षेत्र और नर्सरी विकसित हुई, जो आय का साधन है। देहरादून की एक पंचायत आधा एकड़ जमीन से सालाना 38 से 40 लाख रुपये कमाती है।


| विजन तय करके कराएं विकास कार्य

ब्लॉक समिति के अध्यक्ष सतीश कुमार ने कहा कि गांवों का विकास सोच और योजना पर निर्भर करता है। कई बार ग्रांट के अभाव में भी जरूरत के अनुसार कार्य तय कर पूरे किए जाते हैं। गली, नाली और सड़क निर्माण के अलावा किसी स्पष्ट विजन के साथ काम करने से बड़े परिणाम मिलते हैं और लंबे समय तक बड़ी आबादी को लाभ पहुंचता है।
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