{"_id":"76346d43c7839b2f04631d857e3da4d9","slug":"workers-stage-protest-to-increase-wages","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजदूरी बढ़ाने की मांग पर गरजे मनरेगा मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूरी बढ़ाने की मांग पर गरजे मनरेगा मजदूर
कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 06 Dec 2013 04:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा मनरेगा मजदूर यूनियन के बैनर तले जिले के मनरेगा मजदूरों ने वीरवार को लघु सचिवालय परिसर में एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मनरेगा यूनियन के प्रदेश सचिव नरेश कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को मांग पत्र साैंपा। इससे पहले मजदूर थानेसर स्थित थीम पार्क में एकत्रित हुए और वहां से रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान यूनियन प्रदेश सचिव नरेश कुमार ने सरकार पर मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मनरेगा स्कीम के तहत काम करने वाले मजदूरों को काम के बदले उचित मानदेय न मिलने से मजदूरों को घर का खर्च चलाने में दिक्कत हो रही है।
मजदूरों को मजदूरी के पैसों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उनके मुताबिक महंगाई के इस दौर में साल में 100 दिन के रोजगार से गुजर-बसर करना मुश्किल है। इसलिए मजदूरों के लिए 200 दिन के रोजगार की गारंटी सरकार दे।
उन्होंने बताया कि जब से मनरेगा स्कीम लागू हुई है, तब से लेकर आज तक मनरेगा मजदूरों का पंजीकरण नहीं हुआ। मजदूरों को काम की तलाश में सरपंच और पंचायत मेंबर्स के चक्कर लगाने पर भी 15 दिन के भीतर कार्य नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
नरेश कुमार ने कार्य स्थल पर किसी मजदूर के साथ हादसा होने पर सरकार से उचित मुआवजे की मांग भी की। उन्होंने लोहार माजरा, ज्योतिसर, बारवा, घराड़सी गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि इन गांव में पिछले दो महीने से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ये हैं मांगें
-मनरेगा मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन की जाए।
-रोजगार गारंटी 100 दिन के बजाये 200 दिन हो।
-हाजरी कार्य स्थल पर मस्टर रोल पर लगाई जाए।
-मजदूरी का भुगतान प्रति सप्ताह या 15 दिन के भीतर हो।
-कार्य स्थल पर मजदूर की मृत्यु या अपंग हो जाने पर 10 लाख रुपये मुआवजा।
-सभी मनरेगा मजूदर परिवारों को बीपीएल श्रेणी में रखा जाए।
-जिन मनरेगा मजदूरों के पास रिहायशी मकान नहीं है, उन्हें 100-100 गज के प्लाट और मकान बनाने का प्रंबध हो।
-मनरेगा मजदूरों की लड़कियों की शादी में एक लाख रुपये कन्यादान दिया जाए।
-दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य के लिए मजदूरों को निशुल्क वाहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।
विज्ञापन
मनरेगा यूनियन के प्रदेश सचिव नरेश कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को मांग पत्र साैंपा। इससे पहले मजदूर थानेसर स्थित थीम पार्क में एकत्रित हुए और वहां से रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान यूनियन प्रदेश सचिव नरेश कुमार ने सरकार पर मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मनरेगा स्कीम के तहत काम करने वाले मजदूरों को काम के बदले उचित मानदेय न मिलने से मजदूरों को घर का खर्च चलाने में दिक्कत हो रही है।
मजदूरों को मजदूरी के पैसों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उनके मुताबिक महंगाई के इस दौर में साल में 100 दिन के रोजगार से गुजर-बसर करना मुश्किल है। इसलिए मजदूरों के लिए 200 दिन के रोजगार की गारंटी सरकार दे।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि जब से मनरेगा स्कीम लागू हुई है, तब से लेकर आज तक मनरेगा मजदूरों का पंजीकरण नहीं हुआ। मजदूरों को काम की तलाश में सरपंच और पंचायत मेंबर्स के चक्कर लगाने पर भी 15 दिन के भीतर कार्य नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
नरेश कुमार ने कार्य स्थल पर किसी मजदूर के साथ हादसा होने पर सरकार से उचित मुआवजे की मांग भी की। उन्होंने लोहार माजरा, ज्योतिसर, बारवा, घराड़सी गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि इन गांव में पिछले दो महीने से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ये हैं मांगें
-मनरेगा मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन की जाए।
-रोजगार गारंटी 100 दिन के बजाये 200 दिन हो।
-हाजरी कार्य स्थल पर मस्टर रोल पर लगाई जाए।
-मजदूरी का भुगतान प्रति सप्ताह या 15 दिन के भीतर हो।
-कार्य स्थल पर मजदूर की मृत्यु या अपंग हो जाने पर 10 लाख रुपये मुआवजा।
-सभी मनरेगा मजूदर परिवारों को बीपीएल श्रेणी में रखा जाए।
-जिन मनरेगा मजदूरों के पास रिहायशी मकान नहीं है, उन्हें 100-100 गज के प्लाट और मकान बनाने का प्रंबध हो।
-मनरेगा मजदूरों की लड़कियों की शादी में एक लाख रुपये कन्यादान दिया जाए।
-दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य के लिए मजदूरों को निशुल्क वाहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।