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जलवायु परिवर्तन पर होगा काम, प्रदेश में नजीर बनेगा तखाना गांव
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कर्मबीर लाठर
करनाल। विकसित और विकासशील देशों के साझा प्रयासों से ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक उष्णता) और जलवायु परिवर्तन की समस्या को लेकर महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है। इसके तहत देश में दस गांव चिह्नित किए गए हैं, इनमें करनाल जिले का गांव तखाना भी शामिल है। भारत सरकार के अलावा जर्मनी से भी इस परियोजना के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।
जर्मन टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट संस्था की ओर से इस कार्य के लिए दुनिया भर से 190 फार्मर्स प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) का चयन किया गया है। ये एफपीओ इन गांवों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तखाना गांव की जिम्मेदारी के लिए नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर समूह (निफको) को चुना गया है।
एफपीओ के अध्यक्ष डॉ. सरदार सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह की समस्याएं उत्पन्न हुईं हैं। इन समस्याओं को लेकर विशेषज्ञों व एफपीओ प्रबंधकों से प्रतिक्रियाएं ली गई हैं, जिनका निष्कर्ष निकाला जाएगा। ये सभी चयनित एफपीओ समस्याओं को नियंत्रित करने पर काम करेंगे। जनवरी में जर्मनी से संस्था के प्रतिनिधि भारत आएंगे और परियोजना पर आगामी कदम बढ़ाया जाएगा। इसके तहत करनाल के तखाना गांव में भी खेती और पर्यावरण संबंधी तमाम समस्याओं पर काम कर इसे हरियाणा में नजीर के रूप में पेश किया जाएगा।
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ये कार्य किए जाएंगे
- पराली जलाने और अन्य कारणों से उपजाऊ जमीन की ऊपरी सतह सख्त हो चुकी है, जिससे मृदा में जल संचयन की क्षमता कम हुई है। वायु का संचार नहीं हो पाता। इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- गांव के जोहड़ व तालाब खत्म हो चुके हैं। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी या नाबार्ड की सहायता से इन्हें पुनर्जीवित किया जाएगा।
- जमीन में सूक्ष्म तत्वों व जैविक कार्बन की कमी हुई है। खेतों में हरी खाद, गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद के इस्तेमाल को बढ़ाया जाएगा।
- रासायनिक खाद और दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा।
- जमीन की संरचना न बिगड़े और कृषि से पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इस पर मिलकर काम करेंगे।
- फसल विविधीकरण के अंतर्गत सब्जियां, मक्का व कम पानी की लागत वाली फसलोें का चयन किया जाएगा ताकि भूजल बचाया जा सके।
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करनाल। विकसित और विकासशील देशों के साझा प्रयासों से ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक उष्णता) और जलवायु परिवर्तन की समस्या को लेकर महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू होने जा रहा है। इसके तहत देश में दस गांव चिह्नित किए गए हैं, इनमें करनाल जिले का गांव तखाना भी शामिल है। भारत सरकार के अलावा जर्मनी से भी इस परियोजना के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।
जर्मन टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट संस्था की ओर से इस कार्य के लिए दुनिया भर से 190 फार्मर्स प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) का चयन किया गया है। ये एफपीओ इन गांवों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तखाना गांव की जिम्मेदारी के लिए नीलोखेड़ी फार्मर्स प्रोड्यूसर समूह (निफको) को चुना गया है।
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एफपीओ के अध्यक्ष डॉ. सरदार सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह की समस्याएं उत्पन्न हुईं हैं। इन समस्याओं को लेकर विशेषज्ञों व एफपीओ प्रबंधकों से प्रतिक्रियाएं ली गई हैं, जिनका निष्कर्ष निकाला जाएगा। ये सभी चयनित एफपीओ समस्याओं को नियंत्रित करने पर काम करेंगे। जनवरी में जर्मनी से संस्था के प्रतिनिधि भारत आएंगे और परियोजना पर आगामी कदम बढ़ाया जाएगा। इसके तहत करनाल के तखाना गांव में भी खेती और पर्यावरण संबंधी तमाम समस्याओं पर काम कर इसे हरियाणा में नजीर के रूप में पेश किया जाएगा।
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ये कार्य किए जाएंगे
- पराली जलाने और अन्य कारणों से उपजाऊ जमीन की ऊपरी सतह सख्त हो चुकी है, जिससे मृदा में जल संचयन की क्षमता कम हुई है। वायु का संचार नहीं हो पाता। इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- गांव के जोहड़ व तालाब खत्म हो चुके हैं। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी या नाबार्ड की सहायता से इन्हें पुनर्जीवित किया जाएगा।
- जमीन में सूक्ष्म तत्वों व जैविक कार्बन की कमी हुई है। खेतों में हरी खाद, गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद के इस्तेमाल को बढ़ाया जाएगा।
- रासायनिक खाद और दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा।
- जमीन की संरचना न बिगड़े और कृषि से पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इस पर मिलकर काम करेंगे।
- फसल विविधीकरण के अंतर्गत सब्जियां, मक्का व कम पानी की लागत वाली फसलोें का चयन किया जाएगा ताकि भूजल बचाया जा सके।