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महंगी पीएनजी से बढ़ी उत्पादन लागत, 40 फीसदी उद्योगों पर बंदी का खतरा
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Woman slips while boarding train, both legs amputated
देव शर्मा
करनाल। एनजीटी के कमीशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट के कोयला, लकड़ी और डीजल आदि प्रदूषण फैलाने वाले अनधिकृत ईंधन का प्रयोग बंद करने संबंधी आदेशों और पीएनजी गैस ढाई से तीन गुना महंगी होने के कारण करनाल की करीब 1500 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कृषि यंत्र इंडस्ट्री थर्राने लगी है। क्योंकि अधिकृत फ्यूल महंगा होने के कारण उत्पादन लागत तीन गुना तक बढ़ गई है। इतनी महंगाई तैयार प्रोडक्ट पर भी आ सकती है। जिसका परिणाम ये होगा कि एनसीआर क्षेत्र में आने वाले उद्योगों का तैयार माल, एनसीआर से बाहर वाले उद्योगों से महंगा हो जाएगा। जिससे एनसीआर क्षेत्रों के उद्योग बाजारी स्पर्धा में पिछड़ सकते हैं। जिसका सीधा नुकसान करनाल की कृषि यंत्र इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा। साथ ही 40 फीसदी उद्योगों पर बंदी का खतरा भी मंडराने लगा है।
जिलेभर में कृषि यंत्र से जुड़ी करीब 120 इकाइयां हैं लेकिन अन्य उद्योगों को मिलाकर 400 छोटे बड़े उद्योग हैं। इनमें से कई के पास बड़े बड़े जेनरेटर भी है। एनआरसी क्षेत्र में प्रदूषण संबंधी पाबंदियों से उद्योग दो हिस्सों में बट गया है। एक तो वो जो एनसीआर की सीमा के अंदर है और दूसरा इससे बाहर। एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में जो पाबंदियां लगाई गई हैं, वह एनसीआर के अंदर है। इनमें अनाधिकृत फ्यूल से इंडस्ट्री संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसमें कोयला, डीजल, लकड़ी के टुकड़े आदि शामिल हैं। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) एक मात्र विकल्प है, दूसरे राइस मिल आदि छिलका आधारित फ्यूल के राइस मिलों का संचालन करते हैं। करनाल की स्थिति को देखें तो सेक्टर-तीन इंडस्ट्रियल एरिया तक तो पाइप लाइन पहुंच गई है लेकिन मुगल माजरा में कई इंडस्ट्री लगी हुई हैं, वहां अभी तक पाइप लाइन पहुंची ही नहीं है, ऐसे में आखिर, यहां उद्यमी अपने उद्यमों का संचालन कैसे करें। एनजीटी के आदेशों का अनुपालन करना अनिवार्य है, ऐसें कई उद्योगों पर बंद होने का खतदरा मंडराने लगा है। जिससे इनकी चिंता बढ़ गई है।
जहां तक करनाल को एनसीआर से बाहर करने की बात है तो पिछले एक साल से सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित है। मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार को करनाल को एनसीआर से बाहर करने के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक करनाल को एनसीआर से बाहर करने संबंधी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
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लो सल्फर डीजल भी विकल्प
अधिकृत ईंधन में लो सल्फर डीजल (एलएसडी) भी एक विकल्प दिया गया है, लेकिन ये तेल सामान्य डीजल से महंगा तो होता ही है, साथ ही इसका खर्च भी सामान्य डीजल से अधिक होता है। इससे उद्यम संचालित करने पर काफी महंगा पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। वहीं, जब पीएनजी शुरू की गई थी, करीब तीन साल पहले 32 रुपये प्रति एससीएम था, जो अब 72.44 रुपये तक पहुंच गया है। पीएनजी के बिल दो तरह के होते हैं, एक लार्ज इंडस्ट्री का, दूसरा स्मॉल इंडस्ट्री का। लार्ज इंडस्ट्री का रेट कर सहित 71.06 रुपये था। 60 पैसे एक अक्तूबर से कम किए थे, इसलिए इसका भाव 70.43 रुपये है, जबकि स्मॉल का 68.34 रुपये और छह प्रतिशत टैक्स यानी करीब 72.44 रुपये प्रति एससीएम, जो 60 पैसे कम होने के बाद 71.84 रुपये हो गया है। जो डीजल से काफी महंगा पड़ता है।
जेनसेट संचालन की छूट तो होनी ही चाहिए, क्योंकि जेनरेटर तभी चलाया जाता है, जब बिजली कट लगता है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता हो, पीएनजी जो लगातार महंगी हो रही है, उस पर सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए। एनसीआर क्षेत्र के उद्यमों के उत्पादों की लागत अधिक होने से उनका विक्रय मूल्य भी अधिक होगा, इसलिए इनके प्रोडक्ट एनसीआर क्षेत्र से बाहर की अपेक्षाकृत सस्ते प्रोडक्ट के सामने बाजार में कैसे टिक पाएंगे।
-भावुक मेहता, महासचिव, करनाल एंग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
ये पाबंदियां तभी लगाना उचित होता, जब पाइप लाइन सभी जगह उपलब्ध होती। सरकार पीएनजी के रेट पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। दो वर्षों में ढाई से तीन गुना रेट हो गए हैं। करनाल को एनसीआर से बाहर करना चाहिए या पाइप लाइन डाले जाने तक पुरानी व्यवस्था पर ही उद्योगों को संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अन्यथा करीब 40 फीसदी उद्योग बंद हो जाएंगे।
- रविंद्र ढल, प्रधान, करनाल एंग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
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करनाल। एनजीटी के कमीशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट के कोयला, लकड़ी और डीजल आदि प्रदूषण फैलाने वाले अनधिकृत ईंधन का प्रयोग बंद करने संबंधी आदेशों और पीएनजी गैस ढाई से तीन गुना महंगी होने के कारण करनाल की करीब 1500 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कृषि यंत्र इंडस्ट्री थर्राने लगी है। क्योंकि अधिकृत फ्यूल महंगा होने के कारण उत्पादन लागत तीन गुना तक बढ़ गई है। इतनी महंगाई तैयार प्रोडक्ट पर भी आ सकती है। जिसका परिणाम ये होगा कि एनसीआर क्षेत्र में आने वाले उद्योगों का तैयार माल, एनसीआर से बाहर वाले उद्योगों से महंगा हो जाएगा। जिससे एनसीआर क्षेत्रों के उद्योग बाजारी स्पर्धा में पिछड़ सकते हैं। जिसका सीधा नुकसान करनाल की कृषि यंत्र इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा। साथ ही 40 फीसदी उद्योगों पर बंदी का खतरा भी मंडराने लगा है।
जिलेभर में कृषि यंत्र से जुड़ी करीब 120 इकाइयां हैं लेकिन अन्य उद्योगों को मिलाकर 400 छोटे बड़े उद्योग हैं। इनमें से कई के पास बड़े बड़े जेनरेटर भी है। एनआरसी क्षेत्र में प्रदूषण संबंधी पाबंदियों से उद्योग दो हिस्सों में बट गया है। एक तो वो जो एनसीआर की सीमा के अंदर है और दूसरा इससे बाहर। एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में जो पाबंदियां लगाई गई हैं, वह एनसीआर के अंदर है। इनमें अनाधिकृत फ्यूल से इंडस्ट्री संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसमें कोयला, डीजल, लकड़ी के टुकड़े आदि शामिल हैं। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) एक मात्र विकल्प है, दूसरे राइस मिल आदि छिलका आधारित फ्यूल के राइस मिलों का संचालन करते हैं। करनाल की स्थिति को देखें तो सेक्टर-तीन इंडस्ट्रियल एरिया तक तो पाइप लाइन पहुंच गई है लेकिन मुगल माजरा में कई इंडस्ट्री लगी हुई हैं, वहां अभी तक पाइप लाइन पहुंची ही नहीं है, ऐसे में आखिर, यहां उद्यमी अपने उद्यमों का संचालन कैसे करें। एनजीटी के आदेशों का अनुपालन करना अनिवार्य है, ऐसें कई उद्योगों पर बंद होने का खतदरा मंडराने लगा है। जिससे इनकी चिंता बढ़ गई है।
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जहां तक करनाल को एनसीआर से बाहर करने की बात है तो पिछले एक साल से सिर्फ आश्वासनों तक ही सीमित है। मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार को करनाल को एनसीआर से बाहर करने के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक करनाल को एनसीआर से बाहर करने संबंधी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
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लो सल्फर डीजल भी विकल्प
अधिकृत ईंधन में लो सल्फर डीजल (एलएसडी) भी एक विकल्प दिया गया है, लेकिन ये तेल सामान्य डीजल से महंगा तो होता ही है, साथ ही इसका खर्च भी सामान्य डीजल से अधिक होता है। इससे उद्यम संचालित करने पर काफी महंगा पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। वहीं, जब पीएनजी शुरू की गई थी, करीब तीन साल पहले 32 रुपये प्रति एससीएम था, जो अब 72.44 रुपये तक पहुंच गया है। पीएनजी के बिल दो तरह के होते हैं, एक लार्ज इंडस्ट्री का, दूसरा स्मॉल इंडस्ट्री का। लार्ज इंडस्ट्री का रेट कर सहित 71.06 रुपये था। 60 पैसे एक अक्तूबर से कम किए थे, इसलिए इसका भाव 70.43 रुपये है, जबकि स्मॉल का 68.34 रुपये और छह प्रतिशत टैक्स यानी करीब 72.44 रुपये प्रति एससीएम, जो 60 पैसे कम होने के बाद 71.84 रुपये हो गया है। जो डीजल से काफी महंगा पड़ता है।
जेनसेट संचालन की छूट तो होनी ही चाहिए, क्योंकि जेनरेटर तभी चलाया जाता है, जब बिजली कट लगता है। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता हो, पीएनजी जो लगातार महंगी हो रही है, उस पर सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए। एनसीआर क्षेत्र के उद्यमों के उत्पादों की लागत अधिक होने से उनका विक्रय मूल्य भी अधिक होगा, इसलिए इनके प्रोडक्ट एनसीआर क्षेत्र से बाहर की अपेक्षाकृत सस्ते प्रोडक्ट के सामने बाजार में कैसे टिक पाएंगे।
-भावुक मेहता, महासचिव, करनाल एंग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
ये पाबंदियां तभी लगाना उचित होता, जब पाइप लाइन सभी जगह उपलब्ध होती। सरकार पीएनजी के रेट पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। दो वर्षों में ढाई से तीन गुना रेट हो गए हैं। करनाल को एनसीआर से बाहर करना चाहिए या पाइप लाइन डाले जाने तक पुरानी व्यवस्था पर ही उद्योगों को संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अन्यथा करीब 40 फीसदी उद्योग बंद हो जाएंगे।
- रविंद्र ढल, प्रधान, करनाल एंग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन

Woman slips while boarding train, both legs amputated