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फरियादी करते रह गए इंतजार, सीएम चले गए

Tue, 18 Oct 2016 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोमदत्त शर्मा
ब्यूरो/अमर उजाला, सोमदत्त शर्मा Updated Tue, 18 Oct 2016 12:55 AM IST
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While the complainant remained waiting, went to CM, Karnal
फरियादी करते रह गए इंतजार, सीएम चले गए - फोटो : Amar Ujala
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंचे मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे फरियादी को मायूसी हाथ लगी।  वे बाहर इंतजार करते रहे और अंदर सीएम सरपंचों और पार्षदों के साथ बैठक करते रहे। पुलिस ने उनके साथ बदतमीजी की और उन्हें वहां से खदेड़ दिया। इस पर अपना दुखड़ा सुनाने आए लोगों ने जमकर भड़ास निकाली।
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फरियादी नंबर-1 : खट्टर साहब मेरा धान काट लिया
रादौर के गांव बापौली से पहुंचे ओमपाल ने बताया कि गांव में उसने दो एकड़ पंचायती जमीन ठेके पर ली थी। दस दिन पहले गांव सूरा के एक व्यक्ति ने धान कटवा लिया, जब उसने विरोध किया तो उसको धमकी दी गई। उसी दिन उसने मामले की सूचना रादौर थाना प्रभारी को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामले की शिकायत एसपी को दी। बावजूद इसके आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। सीएम के नाम लिखी शिकायत में ओमपाल ने बताया कि वह न्याय के लिए दर दर भटक रहा है। सीएम विंडो पर भी शिकायत दी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। ओमपाल ने सीएम मांग की कि उसे उसकी धान दिलाई जाए, ताकि वह अपना परिवार पाल सके। ओमपाल का कहना है कि पुलिस ने उसे गेट बाहर ही साइड में कर दिया गया और सीएम से नहीं मिलने दिया गया।
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फरियादी नंबर-2 बेटे की हो गई मौत, चाहिए आर्थिक मदद
बेटे की मौत के बाद आर्थिक मदद के लिए अपने बेटे की तस्वीर लेकर गांव हैबतपुर निवासी देसराज व बाला देवी सुबह 10 बजे से वे रेस्ट हाउस में डेरा जमाए हुए थे, जैसे ही सीएम आए तो उन्हें दूर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने मिलने की कोशिश की तो उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। उन्होंने बार बार गुहार लगाई कि उन्हें सीएम से मिलना है, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें बाहर बैठा दिया गया। आखिरकार किसी प्रकार वे रेस्ट हाउस के अंदर पहुंचे तो वहां पर बैठ गए, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार कहीं पर सुनवाई नहीं होने पर बुजुर्ग दंपति रो पड़ा। जैसे ही सीएम बाहर निकले तो पुलिस ने दंपति को घेर लिया और सीएम गाड़ी में बैठकर निकल गए। दंपति ने कहा कि वे तीन घंटे तक यहां बैठे इंतजार करते रहे, लेकिन किसी ने भी उनकी फरियाद नहीं सुनी। दंपति ने बताया कि उनका बेटा ही घर चला रहा था, वही नहीं रहा, अब हम क्या करें?
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फरियादी नंबर-3 असलहे को नहीं कराया पाया अपने नाम
गुरदीप सिंह निवासी नबीपुर ने बताया कि उसके पिता बनार सिंह भारतीय सेना में तैनात थे। उनके पास बंदूक का लाइसेंस था। पिता का वर्ष 1997 में देहांत हो गया। तभी से वह लाइसेंस को अपने नाम कराने को लेकर चक्कर कार रहा है, लेकिन अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। गुरदीप का कहना है कि वह फिलहाल मजदूरी कर रहा है। अगर लाइसेंस बन जाता तो वह कहीं पर गार्ड की नौकरी कर सकता था। यहां बड़ी उम्मीद के साथ आया था, लेकिन यहां के हालात तो और भी बुरे हैं। अब वह दोबारा सीएम के पास कभी नहीं आएंगे, जब मिलना ही नहीं है तो फिर इतने घंटे इंतजार कराने का क्या फायदा?
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