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कलायत का पिछड़ापन नहीं हुआ दूर

Mon, 10 Feb 2014 11:57 PM IST
कलायत
कलायत Updated Mon, 10 Feb 2014 11:57 PM IST
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चार साले पहले राजनीतिक लोगों ने वोट लेने के लिए जनता से जो वादे किए थे, वे अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं जिस कारण कलायत हलका अभी भी पिछड़े इलाकों में गिना जाता है। यहां शिक्षा से लेकर सड़क, सीवरेज सहित अनेकों मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। चार साल बनाम एक साल के तहत लोगों की आवाज बनने के लिए अमर उजाला ने लोगों की उम्मीदों को लेकर छानबीन की। जिसमें लोगों ने खुल कर अपनी बात रखी।
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कलायत के श्री कपिल मुनि महिला कॉलेज के प्रिंसिपल डा. सुरेश आत्रेय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कलायत क्षेत्र पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है। कलायत में नेताओं ने वोट लेने के लिए खूब राजनीति की है। पंजाब की सीमा से शुरू होकर करनाल जिले तक फैले कलायत हलके में 65 गांव हैं जिनमें करीब 1,70,000 हजार मतदाता हैं। इस क्षेत्र में एक भी सरकारी कॉलेज नहीं है।
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नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र पाल सिंगला का कहना है कि कलायत में सीवरेज को लेकर नेताओं ने चार साल पहले घोषणा तो की तथा उस पर कार्य भी शुरू हो गया पर मॉनीटरिंग के अभाव में यह योजना लोगों को बुरी तरह से परेशान कर रही है।
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शिक्षाविद् एवं समाज सेविका प्रोमिला सहारण ने कहा कि चुनावोें के दौरान नेताओं ने महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय बनाने का वादा कर वोट हासिल किए थे। आज भी गांव देहात ही नहीं बल्कि कलायत के कुछ वार्डों में भी महिलाओं को खुले में शौच जाना पड़ रहा है। हालात तो यहां तक भी खराब हो गए हैं कि खुले में शौच जाने के लिए भी स्थान नहीं बचे हैं।

मंडी प्रधान जयदीप राणा का कहना है कि कलायत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए नेताओं ने वादे किए थे पर चार साल बीत जाने के बाद स्थिति और विकट हो गई है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से लचर हैं। यहां महिला चिकित्सक की ड्यूटी लगाई जाए।

सतीश राणा का कहना है कि कलायत की एकमात्र रेलवे रोड को लेकर नेताओं ने जो वादे किए थे उन्हें पिछले करीब 3 साल से क्षेत्र की जनता भुगत रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर अनाज मंडी तक की केवल दो किलोमीटर की सड़क तीन साल में भी नहीं बन सकी।

युवा उद्यमी भारत कपूर का कहना है कि पीने के पानी को लेकर लोगों से वादे किए गए थे कि 110 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन मिलेगा पर स्थिति इतनी विकट है कि लोगों को कई कई दिन पीने का पानी मिलता ही नहीं मिलता।

गांव चौशाला के बलदेव सिंह का कहना है कि गांवों के विकास को लेकर नेताओं ने बहुत वादे किए थे पर केवल एक बार ही ग्रांट आई है। विकास को तरस रहे गांवों की गलियां व नालियां आज भी टूटी हुई हैं तथा लोग नेताओं द्वारा दिखाएं गए सब्जबाग से आहत हैं।


पवन कैलरम का कहना है कि जो सड़कें क्षेत्र में बनाई गई हैं वे केवल नाममात्र की हैं। उनका कहना है कि नेताओं ने क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने की जो बात कही थी उन पर अमल तो हुआ पर नाममात्र।

धनराज गर्ग का कहना है कि मंडी के विस्तारीकरण, कपिल मुनि मंदिर के सौंदर्यीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने खुद घोषणा की थी जो आज तक भी पूरी नही हो पाई।

गांव बात्ता के श्यामलाल शर्मा का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली आदी मामलों पर नेताओं ने केवल यहां राजनीति की है उसको मूर्तरूप नहीं दिया।
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