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कल्याण विभाग कार्यालय में हंगामा
करनाल
Updated Tue, 24 Dec 2013 12:53 AM IST
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सचिवालय परिसर के जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में एक कर्मचारी और जिला
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पार्षद के बीच हुई कहासुनी मारपीट में बदल गई।
जिला पार्षद का आरोप है कि कर्मचारी अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर रिश्वत मांग रहा था, जबकि कर्मचारी ने इन आरोपों को खारिज कर किया है।
कर्मचारी ने उपायुक्त को दी शिकायत में जिला पार्षद की ओर से उससे मारपीट करने और बदतमीजी करने का आरोप लगाया है, तो कांग्रेस नेता एवं जिला पार्षद डॉ. सुनील पवार ने कहा कि कर्मचारी के पास कई महीने से अनुसूचित जाति और पिछ़डा वर्ग के बच्चों के स्कॉलरशिप के आवेदन लंबित पड़े हैं। बच्चों को स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर जहां पांच सौ रुपये प्रति फार्म मांगने पर अड़ा है, वहीं अपनी मर्जी से काम करने की जिद्द कर रहा है। मामला उपायुक्त के पास गया है।
उन्हें भी विस्तार से बता दिया गया है। मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। कुछ भी हो भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। सोमवार को भोजनावकाश के पूर्व जिला पार्षद डॉ. सुनील पंवार जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में पहुंचे। उन्होंने कार्यालय के सहायक प्रेमचंद चौहान से गुरू सेन भक्त स्कूल ऑफ नर्सिंग के अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को सरकार की ओर से दी जाने वाली स्कॉलरशिप की सुविधा नहीं दिया जाने के मामले में पूछा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षोें के बीच तनातनी हो गई। मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस मामले की शिकायत उपायुक्त को भी की गई।
सहायक अपने कर्मी साथियों के साथ उपायुक्त के पास शिकायत करने पहुंचा। उन्होंने कांग्रेस नेता पर मारपीट करने और ज्यादती करने का आरोप लगाया। लेकिन वहीं दूसरी ओर डॉ. सुनील पंवार ने कहा कि आरोप निराधार हैं। वह लोग दबाव में आने वाले नहीं हैं। सरकार गरीबों के लिए मदद की सुविधा रिश्वत देकर हासिल करने के लिए नहीं चलाती है। ऐसे लोगों का इलाज जनता को करना चाहिए।
रिश्वत मांगने वाले कर्मियों के खिलाफ मुख्यमंत्री का पूरा कड़ा रवैया रहता है। वह इस मामले को अब दबने नहीं देंगे। पूरे मामले की जांच करवा कर ही दम लेंगे। उन्होंने भी उपायुक्त को अपनी पूरी बात से अवगत करवा दिया है।
एसडीएम को सौंपी मामले की जांच
इस मामले में दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। मामले की जांच के लिए एसडीएम मुकुल कुमार को आदेश दिए गए हैं। जांच के बाद पूरा मामला सामने आ जाएगा। रिश्वत मांगने वाले और बेवजह लोगों की फाइलों को लंबित करने वालों से भी निपटा जाएगा।
विकास यादव, उपायुक्त, करनाल
जिला पार्षद का आरोप है कि कर्मचारी अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर रिश्वत मांग रहा था, जबकि कर्मचारी ने इन आरोपों को खारिज कर किया है।
कर्मचारी ने उपायुक्त को दी शिकायत में जिला पार्षद की ओर से उससे मारपीट करने और बदतमीजी करने का आरोप लगाया है, तो कांग्रेस नेता एवं जिला पार्षद डॉ. सुनील पवार ने कहा कि कर्मचारी के पास कई महीने से अनुसूचित जाति और पिछ़डा वर्ग के बच्चों के स्कॉलरशिप के आवेदन लंबित पड़े हैं। बच्चों को स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर जहां पांच सौ रुपये प्रति फार्म मांगने पर अड़ा है, वहीं अपनी मर्जी से काम करने की जिद्द कर रहा है। मामला उपायुक्त के पास गया है।
उन्हें भी विस्तार से बता दिया गया है। मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। कुछ भी हो भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। सोमवार को भोजनावकाश के पूर्व जिला पार्षद डॉ. सुनील पंवार जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय में पहुंचे। उन्होंने कार्यालय के सहायक प्रेमचंद चौहान से गुरू सेन भक्त स्कूल ऑफ नर्सिंग के अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को सरकार की ओर से दी जाने वाली स्कॉलरशिप की सुविधा नहीं दिया जाने के मामले में पूछा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षोें के बीच तनातनी हो गई। मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस मामले की शिकायत उपायुक्त को भी की गई।
सहायक अपने कर्मी साथियों के साथ उपायुक्त के पास शिकायत करने पहुंचा। उन्होंने कांग्रेस नेता पर मारपीट करने और ज्यादती करने का आरोप लगाया। लेकिन वहीं दूसरी ओर डॉ. सुनील पंवार ने कहा कि आरोप निराधार हैं। वह लोग दबाव में आने वाले नहीं हैं। सरकार गरीबों के लिए मदद की सुविधा रिश्वत देकर हासिल करने के लिए नहीं चलाती है। ऐसे लोगों का इलाज जनता को करना चाहिए।
रिश्वत मांगने वाले कर्मियों के खिलाफ मुख्यमंत्री का पूरा कड़ा रवैया रहता है। वह इस मामले को अब दबने नहीं देंगे। पूरे मामले की जांच करवा कर ही दम लेंगे। उन्होंने भी उपायुक्त को अपनी पूरी बात से अवगत करवा दिया है।
एसडीएम को सौंपी मामले की जांच
इस मामले में दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। मामले की जांच के लिए एसडीएम मुकुल कुमार को आदेश दिए गए हैं। जांच के बाद पूरा मामला सामने आ जाएगा। रिश्वत मांगने वाले और बेवजह लोगों की फाइलों को लंबित करने वालों से भी निपटा जाएगा।
विकास यादव, उपायुक्त, करनाल