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निशुल्क पढ़ाई में नहीं गरीब बच्चों की रुचि
कैथल
Updated Tue, 11 Mar 2014 11:40 PM IST
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कैथल जिले में आर्थिक रूप से कमजोर लोग अपने बच्चों को शिक्षित करने में कम ही रुचि दिखा रहे हैं। जिले में निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत धारा 134ए फायदा लोग नहीं उठा रहे हैं और इस नियम के तहत 5300 सीटों के लिए मात्र 780 बच्चों के आवेदन आए हैं।
क्या है 134-ए नियम
इस नियम के तहत निजी स्कूल संचालकों को अपने स्कूल की कुल सीटों में 10 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला देना होता है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों से स्कूल फीस नहीं लेगा तथा अन्य बच्चों के साथ इन्हें पढ़ाना होगा।
जिले भर में दस केंद्र खोले गए
फरवरी में इस नियम के तहत आवेदन करने के लिए विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना था। इतना ही नहीं जिले भर में 10 केंद्र भी खोले गए थे। जहां अभिभावक एवं विद्यार्थी जाकर अपने दाखिले के लिए आवेदन कर सकते थे। एक सप्ताह के बाद दाखिले की अवधि बढ़ाई भी गई। इसे 25 फरवरी से सात मार्च किया गया था। इसके बावजूद अधिकतर सीटें खाली रह गईं।
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‘सीटों के हिसाब से संख्या कम’
उपजिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि सात मार्च तक जिले भर से कुल 780 आवेदन फार्म जमा हुए हैं। इन बच्चों को संबंधित स्कूलों में दाखिला दिलवा दिया जाएगा। इनमें कक्षा एक से कक्षा आठवीं तक 518 बच्चों ने आवेदन किया है। जबकि कक्षा नौवीं से बारहवीं तक 272 बच्चों के आवेदन फार्म आए हैं। इन सभी आवेदनों की जांच कर संबंधित स्कूलों में भेज दिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में उपलब्ध सीटों के हिसाब से यह संख्या काफी कम है। बच्चे आवेदन करते तो उन्हें 134 ए का फायदा मिल सकता था।
‘शिक्षा विभाग अधिकारी नहीं कर रहे सहयोग’
इस संदर्भ में जन आंदोलन के जिला प्रधान रामदिया चावरियां ने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी गरीबों को दाखिला दिलवाने में किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहे है। उन्होंने जिले भर से करीब 1500 फार्म शिक्षा विभाग के खोले गए सुविधा केंद्रों पर भेजे हैं।
अगर गरीब विद्यार्थियों को आवेदन नहीं हुआ तो इसके लिए शिक्षा विभाग जिम्मेवार है। उन्होंने बताया अब भी गरीब बच्चों के अभिभावक उनके पास आवेदन के लिए आ रहे है। करीब 1000 आवेदन अब भी रखे हुए है। जिसको शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
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क्या है 134-ए नियम
इस नियम के तहत निजी स्कूल संचालकों को अपने स्कूल की कुल सीटों में 10 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला देना होता है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों से स्कूल फीस नहीं लेगा तथा अन्य बच्चों के साथ इन्हें पढ़ाना होगा।
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जिले भर में दस केंद्र खोले गए
फरवरी में इस नियम के तहत आवेदन करने के लिए विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना था। इतना ही नहीं जिले भर में 10 केंद्र भी खोले गए थे। जहां अभिभावक एवं विद्यार्थी जाकर अपने दाखिले के लिए आवेदन कर सकते थे। एक सप्ताह के बाद दाखिले की अवधि बढ़ाई भी गई। इसे 25 फरवरी से सात मार्च किया गया था। इसके बावजूद अधिकतर सीटें खाली रह गईं।
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‘सीटों के हिसाब से संख्या कम’
उपजिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि सात मार्च तक जिले भर से कुल 780 आवेदन फार्म जमा हुए हैं। इन बच्चों को संबंधित स्कूलों में दाखिला दिलवा दिया जाएगा। इनमें कक्षा एक से कक्षा आठवीं तक 518 बच्चों ने आवेदन किया है। जबकि कक्षा नौवीं से बारहवीं तक 272 बच्चों के आवेदन फार्म आए हैं। इन सभी आवेदनों की जांच कर संबंधित स्कूलों में भेज दिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में उपलब्ध सीटों के हिसाब से यह संख्या काफी कम है। बच्चे आवेदन करते तो उन्हें 134 ए का फायदा मिल सकता था।
‘शिक्षा विभाग अधिकारी नहीं कर रहे सहयोग’
इस संदर्भ में जन आंदोलन के जिला प्रधान रामदिया चावरियां ने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी गरीबों को दाखिला दिलवाने में किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहे है। उन्होंने जिले भर से करीब 1500 फार्म शिक्षा विभाग के खोले गए सुविधा केंद्रों पर भेजे हैं।
अगर गरीब विद्यार्थियों को आवेदन नहीं हुआ तो इसके लिए शिक्षा विभाग जिम्मेवार है। उन्होंने बताया अब भी गरीब बच्चों के अभिभावक उनके पास आवेदन के लिए आ रहे है। करीब 1000 आवेदन अब भी रखे हुए है। जिसको शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा जाएगा।