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प्रशासन को अल्टीमेटम, नहीं तो सामाजिक संस्थाएं हटवाएंगी अतिक्रमण 

Tue, 17 Jan 2017 12:05 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल
अमर उजाला/ब्यूरो/करनाल Updated Tue, 17 Jan 2017 12:05 AM IST
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Ultimatum to the administration, or social institutions encroachment Htwaangi, karnal
अतिक्रमण - फोटो : amar ujala

 बस बहुत हुआ। अब शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना ही होगा। यह कार्य प्रशासन का है, इसलिए पहली पहल प्रशासन को ही करनी होगी। अगर प्रशासन शहर को अतिक्रमण मुक्त नहीं बनाता तो हम पहल करेंगे। उक्त बातें शहर के सामाजिक संगठनों ने अमर उजाला के अतिक्रमण मुक्त अभियान से जुड़ते हुए कही। सामाजिक संस्थाओं ने कहा कि अगर करनाल को स्मार्ट सिटी बनाना है तो पहले अतिक्रमण मुक्त करना होगा। इसके लिए प्रशासन सख्त कदम उठाए। वहीं अपने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए सभी सामजिक व व्यापारिक संगठनों को भी एकजुट होकर कार्य करना होगा। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए अमर उजाला द्वारा शुरू किए गए अभियान में अब शहर की प्रमुख सामाजिक संस्थाएं भी जुड़ने लगी हैैै। सभी संस्थाओं ने एक तरफ जहां अमर उजाला के अभियान की सराहना करते हुए शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का संकल्प लिया, वहीं प्रशासन को भी खुली चेतावनी दी कि, प्रशासन जल्द से जल्द शहर के लोगों को इस समस्या से निजात दिलाए। अगर प्रशासनिक अधिकारी ऐसा नहीं कर सकते तो वे त्याग पत्र दे दें, हम खुद इस समस्या को सुलझा लेंगे। साथ ही सामाजिक संगठनों ने कहा कि प्रशासन सख्त कार्रवाई करने के साथ इस समस्या को पूरी तरह से खत्म करने के लिए जल्द से जल्द सभी सामाजिक-व्यापारिक संगठनों व शहर के बुद्धजीवियों के साथ एक बैठक करे। जिसमें समस्या के समाधान का हल जानने के साथ लोगों से संकल्प कराया जाए कि वे कभी अतिक्रमण में भागीदार नहीं बनेंगे। अगर इसके बाद भी कोई अतिक्रमण में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़ता है उसका सामाजिक वहिष्कार किया जाए।

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प्रशासन पहल करे, हम साथ : बाठ 
प्रयास संस्था के अध्यक्ष के एनएस बाठ ने कहा कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की सख्त जरूरत है। आज शहर में हालात यह हो गया है कि बाजारों में पैदल चलना भी मुश्किल है। इस अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन सख्त कार्रवाई करे, हम प्रशासन के साथ हैं। केएनएस बाठ ने कहा कि चंडीगढ़ की तरह अगर यहां पर भी प्रशासन को कार्रवाई करना चाहिए। सड़कों पर बेतरतीब तरीके से खड़ी गाड़ियों को तुरंत हुक कर उठाया जाए। साथ ही सड़कों तक अवैध कब्जा कर दुकान लगाने वाले दुकानदारों पर भी भारी जुर्माना लगाया जाए। अगर प्रशासन एकबार सख्त कार्रवाई करता है तो नियम तोड़ने वाले लोग अपने आप सुधर जाएंगे।
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वही लोग अतिक्रमण कर रहे जिनके कंधे पर जिम्मेदारी : पन्नू
नेशनल इंटीग्रेशन फोरम ऑफ आर्टिस्ट के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शहर के सभी व्यापारिक संगठन यहां के सामाजिक संगठन का भी हिस्सा है। इसलिए सामाजिक संगठन भी खुलकर इस मुद्दे को नहीं उठा पा रहे। साथ ही अतिक्रमण करने वाले भी वही लोग हैं जो शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की वकालत कर रहे हैं। लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि  बिना अतिक्रमण हटे शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सकता। प्रशासन पर ऐसे लोगों का दबाव है, इसलिए प्रशासन भी खुलकर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने का सबसे अच्छा विकल्प यह है कि प्रशासन सभी संगठनों के साथ पहले बात करे और अगर उसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाते तो बिना दबाव सख्त कार्रवाई करे।  
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डरते हैं अधिकारी, नहीं करते कार्रवाई 
प्रतिमा रक्षा सम्मान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि शहर में अतिक्रमण और जाम का मुद्दा इस समय शहर का सबसे बड़ा मुद्दा है। अमर उजाला ने यह अभियान शुरू कर सामाजिक संगठनों को रास्ता दिखाया हैै। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने में सभी सामाजिक संगठन सहयोग करेंगे। नरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि हमारे ही कुछ लोग हैं जो अतिक्रमण कर सभी के लिए समस्या पैदा कर रहे हैं। इनको प्रशासन का भी डर नहीं है, इसके उलट यहां के प्रशासनिक अधिकारी इनसे डरते हैं। यहां के नेहरू प्लेस बाजार में कई बार अधिकारी अतिक्रमण हटाने आए, लेकिन व्यापारियों से डरकर लौट गए। अब प्रशासन को सख्त कदम उठाना होगा, नहीं तो सामाजिक संगठन सड़कों पर उतरेंगे



 प्रशासन के साथ हमें भी होना होगा जागरूक
श्रीकृष्ण कृपा युवा मंच के चेयरमैन रामा मदान ने कहा कि शहर में अतिक्रमण जितना जिम्मेदार दुकानदार हैं उतना ही हम लोग भी हैं। एक तरफ जहां दुकानदार अतिक्रमण कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार में हम अपने वाहनों को इधर-उधर खड़ा कर जाम लगा देते हैं। प्रशासन अतिक्रमण हटाने के साथ बाजारों में वाहनों के आने पर भी पाबंदी लगाए। साथ ही ऐसी व्यवस्था भी बनाए कि यहां से हटाए गए रेहड़ी और फड़ी वालों को कहीं और बैठाया जा सके। जिससे अतिक्रमण भी न हो और लोगों का रोजगार भी न छिने।

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