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धनतेरस पर श्रीलक्ष्मी-नारायण पूजन के दो शुभ मुहूर्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। धनतेरस पर दो नवंबर को पूजन के लिए घर-घर तैयारियां की जा रही हैं। इस बार पंचांग अनुसार धनतेरस पर सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक तथा दोपहर 2:25 बजे से शाम 4:10 बजे तक दोनों मुहुर्त में सामान खरीदना और श्रीलक्ष्मी-नारायण जी की पूजा भी शुभ रहेगी।
पंडित शिवकुमार शास्त्री ने बताया कि धनतेरस से भैया दूज के बीच में पांच दिन तक दीपावली के उपलक्ष्य में पूजन किया जाता है। इस बार चतुर्दशी त्रयोदशी तिथि में समाहित हो गई है। इसलिए तीन नवंबर को छोटी दीपावली मनेगी। इस बार दीपावली के उपलक्ष्य में लक्ष्मी पूजन के लिए चार नवंबर की शाम 6:10 बजे से रात को 8:10 बजे तक का समय उत्तम रहेगा। रात को 1:10 बजे से 1:50 के बीच जो मां काली सिद्धि पूजन का उत्तम समय है।
छह नंबर को भैयादूज
शास्त्री ने बताया कि धरतेरस के दिन लोग श्री लक्ष्मी-नारायण जी के साथ कुबेर की भी पूजा करते हैं। इसी दिन यम दीप का भी दान करते हैं। यमराज को प्रसन्न करने के लिए दीपक बलि दी जाती है। इस दिन लोग बर्तन, गहने, वस्त्र आदि खरीदते हैं और अपने मिलने वालों को मिठाई भी भेंट करते हैं। लोकाचार के अनुसार इस दिन लोग झाड़ू को लक्ष्मी का रूप मानकर खरीदकर लाते हैं ताकि उनके घर में लक्ष्मी की कमी न आए। उन्होंने बताया कि पांच नवंबर को गोवर्धन पूजन शाम छह बजे होगा। छह नवंबर को भैयादूज का त्योहार मनाया जाएगा। सभी बहनें अपने भाई को तिलक करेंगी। भाई अपनी बहन को उपहार देंगे। सबसे पहले यमुना ने अपने भाई यमराज के लिए यह त्योहार मनाया था। तभी से यह परंपरा परंपरा चल रही है।
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करनाल। धनतेरस पर दो नवंबर को पूजन के लिए घर-घर तैयारियां की जा रही हैं। इस बार पंचांग अनुसार धनतेरस पर सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक तथा दोपहर 2:25 बजे से शाम 4:10 बजे तक दोनों मुहुर्त में सामान खरीदना और श्रीलक्ष्मी-नारायण जी की पूजा भी शुभ रहेगी।
पंडित शिवकुमार शास्त्री ने बताया कि धनतेरस से भैया दूज के बीच में पांच दिन तक दीपावली के उपलक्ष्य में पूजन किया जाता है। इस बार चतुर्दशी त्रयोदशी तिथि में समाहित हो गई है। इसलिए तीन नवंबर को छोटी दीपावली मनेगी। इस बार दीपावली के उपलक्ष्य में लक्ष्मी पूजन के लिए चार नवंबर की शाम 6:10 बजे से रात को 8:10 बजे तक का समय उत्तम रहेगा। रात को 1:10 बजे से 1:50 के बीच जो मां काली सिद्धि पूजन का उत्तम समय है।
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छह नंबर को भैयादूज
शास्त्री ने बताया कि धरतेरस के दिन लोग श्री लक्ष्मी-नारायण जी के साथ कुबेर की भी पूजा करते हैं। इसी दिन यम दीप का भी दान करते हैं। यमराज को प्रसन्न करने के लिए दीपक बलि दी जाती है। इस दिन लोग बर्तन, गहने, वस्त्र आदि खरीदते हैं और अपने मिलने वालों को मिठाई भी भेंट करते हैं। लोकाचार के अनुसार इस दिन लोग झाड़ू को लक्ष्मी का रूप मानकर खरीदकर लाते हैं ताकि उनके घर में लक्ष्मी की कमी न आए। उन्होंने बताया कि पांच नवंबर को गोवर्धन पूजन शाम छह बजे होगा। छह नवंबर को भैयादूज का त्योहार मनाया जाएगा। सभी बहनें अपने भाई को तिलक करेंगी। भाई अपनी बहन को उपहार देंगे। सबसे पहले यमुना ने अपने भाई यमराज के लिए यह त्योहार मनाया था। तभी से यह परंपरा परंपरा चल रही है।
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