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डिजिटल प्लेटफार्म के अत्यधिक इस्तेमाल से हो रहे अवसाद के शिकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 02:36 AM IST
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to much use of digital platefarm is harmful
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। तकनीकि के इस दौर में दुनियां मुट्ठी में आ गई। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर हाथ में मोबाइल फोन है। कोरोना कॉल में तो पढ़ाई भी फोन पर सिमट आई। विशेषज्ञ भी मानते है कि तकनीकि से बहुत कुछ बेहतर हो रहा है लेकिन इसके कई दुष्परिणाम में सामने आ रहे हैं। जिसमें लोगों का तनाव, अवसाद से ग्रसित होना मुख्य माना जा रहा है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बिना डिजिटल तकनीकि के काम नहीं चल रहा है, इसलिए इसका इस्तेमाल तो करें लेकिन इसे अपने ऊपर हावी न होने दें।
विश्व गर्ल चाइल्ड दिवस पर अत्याधनिक की चर्चा और आवश्यक हो जाती है, क्योंकि अब लड़कियों ने भी समान रूप से तकनीकि को अपनाया है। कुछ समय तक भले ही परिवार के मुखिया मोबाइल फोन आदि से बालिकाओं को दूर रखते थे लेकिन आज ऐसा नहीं है। आजकल नौनिहालों के हाथों में फोन थमाकर परिजन खुश होते हैं, जबकि यह सही नहीं है।सोमवार को राजकीय महिला महाविद्यालय की महिला प्रकोष्ठ इकाई की ओर से तकनीक से अवसाद विषय पर एक वेबिनार में करीब 90 छात्राओं ने हिस्सा लिया। गाइडेंस एंड काउंसिलिंग संस्थान की संस्थापक मनोवैज्ञानिक एंजला ने बताया कि आज की पीढ़ी डिजिटल एप के माध्यम से जिस तकनीक का प्रयोग कर रही है, उसके जहां अनेक लाभ हैं तो नुकसान भी हैं। हमें तकनीक को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। फेसबुक, वाट्सएप और इंस्टाग्राम के अत्यधिक प्रयोग से कई तरह की समस्याएं, अवसाद देखने को मिल रहा है।
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उन्होंने कहा कि अपनी पढ़ाई का काम करना और कहानी सुनना इत्यादि काम स्क्रीन पर करने के बजाय पुस्तकों से या नोट्स द्वारा किया जाना चाहिए। सुबह जागने या फिर किसी कार्य के लिए मोबाइल में रिमाइंडर सेट करने के बजाय हमें अपने परिवार के सदस्य से या अपने साथी से ध्यान दिलाने के लिए कहा जाए। कुछ समय के लिए अपने फोन को विश्राम देना बेहद आवश्यक है। उस पर कोई फोन कॉल या कोई मैसेज न सुनें न देखें और धीरे-धीरे इस समय को बढ़ाते जाएं।
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बच्चों से फोन की आदत छुड़वाने के लिए उनके साथ समय बिताएं और उन्हें पुस्तकों और दूसरी प्रक्टिकल चीजों में लगाएं। तनाव मुक्ति के लिए प्राणायाम करें और आंखों को भी समय-समय पर विश्राम देते रहें। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ अनुराधा पूनिया ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। संचालन में डा. एकता अरोड़ा, मंजू शर्मा और आकांक्षा का विशेष योगदान रहा। ब्यूरो
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