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ये बंदर बड़े शैतान, जनता परेशान, ठेकेदार भी छोड़ गए मैदान
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर के सेक्टरों व कॉलोनियों में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। लेकिन लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नगर निगम बंदरों को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहा है। हालात ये हैं निगम के ठेकेदार भी बंदरों को न पकड़ पाने के कारण ठेका बीच में छोड़कर जा चुके हैं।
अब वर्तमान में भी कोई ठेकेदार टेंडर में रुचि नहीं दिखा रहा। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों की परेशानी इस कदर बढ़ गई है कि शहर की गुड़ मंडी, सदर बाजार, कोट मोहल्ला, जुंडला गेट, रामनगर, सेक्टर 6, 7, 8, 9 में इतने बंदर हो गए हैं ये घर का सामान उठाने के साथ-साथ लोगों पर हमला भी कर रहे हैं। ऐसे में खासकर बच्चों का घरों से बाहर व छतों पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन नगर निगम बंदरों को पकड़ने के लिए ठेकेदारों को ही तैयार नहीं कर पा रहा है।
5 साल में 12 ठेकेदार बीच में ही छोड़ गए
अधिकारियों ने बताया कि पिछले 5 साल में करीब 12 बार टेंडर हुआ। जिसमें ठेकेदार बंदर न पकड़ पाने के कारण बीच में छोड़कर चले गए। अंतिम बार हुए टेंडर में प्रति बंदर पकड़ने के लगभग 800 रुपये दिए गए पर समस्या खत्म नहीं हो पाई।
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विशेषज्ञ टीम पर खर्च हो रहे एक लाख प्रतिमाह
निगम अधिकारियों के अनुसार ठेकेदार न होने के चलते निगम की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। जिनको प्रतिदिन के हिसाब से 3-4 हजार रुपये दिए जाएंगे। ऐसे में निगम प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये खर्च कर रहा है।
बंदरों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। जिन्होंने 10-15 बंदर पकड़े भी हैं। धीरे-धीरे सभी बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगलों में छुड़वा दिया जाएगा। टेंडर के लिए भी कॉल की जा रही है। शहरवासियों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम
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करनाल। शहर के सेक्टरों व कॉलोनियों में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। लेकिन लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नगर निगम बंदरों को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहा है। हालात ये हैं निगम के ठेकेदार भी बंदरों को न पकड़ पाने के कारण ठेका बीच में छोड़कर जा चुके हैं।
अब वर्तमान में भी कोई ठेकेदार टेंडर में रुचि नहीं दिखा रहा। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों की परेशानी इस कदर बढ़ गई है कि शहर की गुड़ मंडी, सदर बाजार, कोट मोहल्ला, जुंडला गेट, रामनगर, सेक्टर 6, 7, 8, 9 में इतने बंदर हो गए हैं ये घर का सामान उठाने के साथ-साथ लोगों पर हमला भी कर रहे हैं। ऐसे में खासकर बच्चों का घरों से बाहर व छतों पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। लेकिन नगर निगम बंदरों को पकड़ने के लिए ठेकेदारों को ही तैयार नहीं कर पा रहा है।
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5 साल में 12 ठेकेदार बीच में ही छोड़ गए
अधिकारियों ने बताया कि पिछले 5 साल में करीब 12 बार टेंडर हुआ। जिसमें ठेकेदार बंदर न पकड़ पाने के कारण बीच में छोड़कर चले गए। अंतिम बार हुए टेंडर में प्रति बंदर पकड़ने के लगभग 800 रुपये दिए गए पर समस्या खत्म नहीं हो पाई।
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विशेषज्ञ टीम पर खर्च हो रहे एक लाख प्रतिमाह
निगम अधिकारियों के अनुसार ठेकेदार न होने के चलते निगम की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। जिनको प्रतिदिन के हिसाब से 3-4 हजार रुपये दिए जाएंगे। ऐसे में निगम प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये खर्च कर रहा है।
बंदरों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। जिन्होंने 10-15 बंदर पकड़े भी हैं। धीरे-धीरे सभी बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगलों में छुड़वा दिया जाएगा। टेंडर के लिए भी कॉल की जा रही है। शहरवासियों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम