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पांच गांवों के किसानों ने फिर काटा बवाल
करनाल
Updated Fri, 13 Dec 2013 10:04 PM IST
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करनाल में घरौंडा क्षेत्र के पांच गांवों के किसानों ने चकबंदी मामले में न्याय नहीं मिलने के विरोध में मुख्यमंत्री से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
घरौंडा क्षेत्र के गांव अराईपुरा, भरतपुर, कालरम, अमृतपुर कलां और अमृतपुर खुर्द के ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिला सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ कर दिया है। किसानों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ यहां जमकर बवाल काटा और अधिकारियों पर अनदेखी करने और कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
हालांकि देर शाम को एसपी और डीसी ने ग्रामीणों को जांच करने और मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वे न्याय नहीं मिलने से बेहद परेशान हैं। उन्हीं लोगों की जमीन छीनी जा रही है, उन्हीं लोगों को पुलिस अधिकारियों की साजिश के तहत जेल में ठूंसा गया है। विरोध जताने आए लोगों ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री या तो उन्हें न्याय दें अन्यथा उन्हें आत्महत्या की अनुमति दी जाए। वे लोग अब किसी हाल में न्याय लिए बिना धरना समाप्त करने वाले नहीं है।
शुक्र्रवार को घरौंडा क्षेत्र समेत पांच गांवों की सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने तिरंगा झंडा हाथ में लहराते हुए जोरदार नारेबाजी की और जुलूस की शक्ल में जिला सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के जिला सचिवालय में प्रवेश करते ही चारों ओर पुलिस ने अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी।
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पूरा मीडिया मौके पर पहले से ही मौजूद था। प्रदर्शनकारियों के साथ आप पार्टी के पदाधिकारी एडवोकेट जेपी शेखपुरा समेत काफी कार्यकर्ता मौजूद रहे। महिलाओं ने साफ कहा कि जमीन भी उन लोगों की छीनी जा है और झूठे मुकदमे दर्ज कर जेल में भी उन्हें ठूंसा जा रहा है। महिलाओं पर जेल में अत्याचार किए गए हैं। पुलिस ने महिलाओं से दुर्व्यवहार किया है। किसानों की अगुवाई कर रहे प्रदीप कालरम और एडवोकेट जेपी शेखपुरा ने कहा कि उन लोगों को न्याय पुलिस और अधिकारी नहीं मिलने दे रहे हैं।
पिछले महीने विरोध प्रदर्शन के दौरान उन लोगों ने पुलिस को पहले ही सूचित किया था कि वे लोग न्याय नहीं मिलने के विरोध में रेल लाइन जाम करेंगे। वे रेल लाइन जाम करना नहीं चाहते थे। वह चाहते थे कि पुलिस को सूचित किया जाए ताकि पुलिस उन लोगों को ऐसा नहीं करने देने के लिए रोके लेकिन पुलिस के लोगों ने ही उन्हें रेल लाइन पर जाने के लिए कहा।
वहां पुलिस ने झूठा वादा कर उन लोगों से रेल लाइन का जाम खुलवाया और बाद में उन्हीं लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिए। महिला-पुरुषों को रात में थाना इंद्री की हवालात में रखा गया। रात को करीब एक बजे उन्हें जेल में बंद कराया गया।
इस दौरान पुलिस ने कई मासूम बच्चों को भी उनके माता-पिता के साथ जेल भेज दिया। पुलिस प्रशासन ने आज तक पंचायती सांड के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया। चकबंदी के एसीओ दलबीर को निलंबित नहीं किया गया और न ही उसका स्थानांतरण किया गया। लोगों पर दर्ज मुकदमेे वापस नहीं लिए गए। किसानों ने मांग की कि नंदी के हत्यारों को फांसी दी जाए। वे अब चुप नहीं बैठेंगे। न्याय नहीं मिलने तक जिला सचिवालय में निरंतर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
एसपी और डीसी ने दिया आश्वासन
विरोध जताने वाले लोगों ने उपायुक्त और एसपी के आश्वासन के बाद अपना विरोध समाप्त कर दिया। उपायुक्त विकास यादव और पुलिस अधीक्षक शशांक आनंद के समक्ष प्रदीप कालरम और एडवोकेट जेपी शेखपुरा समेत कई लोगाें ने अपनी मांग और समस्या रखी।
उपायुक्त ने ग्रामीणों के सामने ही चकबंदी विभाग के निदेशक से एसीओ दलबीर के स्थानांतरण तुरंत प्रभाव से कराने का आग्रह किया। इसके अलावा कई अन्य मांगों को ग्रामीणों ने दोनों जिला अधिकारियों को लिखित में दिया है। दोनों अधिकारियों ने कहा कि इन मामलों में वे लोग जांच कराएंगे और निर्दोष लोगों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस आश्वासन पर ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
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घरौंडा क्षेत्र के गांव अराईपुरा, भरतपुर, कालरम, अमृतपुर कलां और अमृतपुर खुर्द के ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिला सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ कर दिया है। किसानों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ यहां जमकर बवाल काटा और अधिकारियों पर अनदेखी करने और कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
हालांकि देर शाम को एसपी और डीसी ने ग्रामीणों को जांच करने और मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वे न्याय नहीं मिलने से बेहद परेशान हैं। उन्हीं लोगों की जमीन छीनी जा रही है, उन्हीं लोगों को पुलिस अधिकारियों की साजिश के तहत जेल में ठूंसा गया है। विरोध जताने आए लोगों ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री या तो उन्हें न्याय दें अन्यथा उन्हें आत्महत्या की अनुमति दी जाए। वे लोग अब किसी हाल में न्याय लिए बिना धरना समाप्त करने वाले नहीं है।
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शुक्र्रवार को घरौंडा क्षेत्र समेत पांच गांवों की सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने तिरंगा झंडा हाथ में लहराते हुए जोरदार नारेबाजी की और जुलूस की शक्ल में जिला सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के जिला सचिवालय में प्रवेश करते ही चारों ओर पुलिस ने अपनी मुस्तैदी बढ़ा दी।
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पूरा मीडिया मौके पर पहले से ही मौजूद था। प्रदर्शनकारियों के साथ आप पार्टी के पदाधिकारी एडवोकेट जेपी शेखपुरा समेत काफी कार्यकर्ता मौजूद रहे। महिलाओं ने साफ कहा कि जमीन भी उन लोगों की छीनी जा है और झूठे मुकदमे दर्ज कर जेल में भी उन्हें ठूंसा जा रहा है। महिलाओं पर जेल में अत्याचार किए गए हैं। पुलिस ने महिलाओं से दुर्व्यवहार किया है। किसानों की अगुवाई कर रहे प्रदीप कालरम और एडवोकेट जेपी शेखपुरा ने कहा कि उन लोगों को न्याय पुलिस और अधिकारी नहीं मिलने दे रहे हैं।
पिछले महीने विरोध प्रदर्शन के दौरान उन लोगों ने पुलिस को पहले ही सूचित किया था कि वे लोग न्याय नहीं मिलने के विरोध में रेल लाइन जाम करेंगे। वे रेल लाइन जाम करना नहीं चाहते थे। वह चाहते थे कि पुलिस को सूचित किया जाए ताकि पुलिस उन लोगों को ऐसा नहीं करने देने के लिए रोके लेकिन पुलिस के लोगों ने ही उन्हें रेल लाइन पर जाने के लिए कहा।
वहां पुलिस ने झूठा वादा कर उन लोगों से रेल लाइन का जाम खुलवाया और बाद में उन्हीं लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज करवा दिए। महिला-पुरुषों को रात में थाना इंद्री की हवालात में रखा गया। रात को करीब एक बजे उन्हें जेल में बंद कराया गया।
इस दौरान पुलिस ने कई मासूम बच्चों को भी उनके माता-पिता के साथ जेल भेज दिया। पुलिस प्रशासन ने आज तक पंचायती सांड के हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया। चकबंदी के एसीओ दलबीर को निलंबित नहीं किया गया और न ही उसका स्थानांतरण किया गया। लोगों पर दर्ज मुकदमेे वापस नहीं लिए गए। किसानों ने मांग की कि नंदी के हत्यारों को फांसी दी जाए। वे अब चुप नहीं बैठेंगे। न्याय नहीं मिलने तक जिला सचिवालय में निरंतर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
एसपी और डीसी ने दिया आश्वासन
विरोध जताने वाले लोगों ने उपायुक्त और एसपी के आश्वासन के बाद अपना विरोध समाप्त कर दिया। उपायुक्त विकास यादव और पुलिस अधीक्षक शशांक आनंद के समक्ष प्रदीप कालरम और एडवोकेट जेपी शेखपुरा समेत कई लोगाें ने अपनी मांग और समस्या रखी।
उपायुक्त ने ग्रामीणों के सामने ही चकबंदी विभाग के निदेशक से एसीओ दलबीर के स्थानांतरण तुरंत प्रभाव से कराने का आग्रह किया। इसके अलावा कई अन्य मांगों को ग्रामीणों ने दोनों जिला अधिकारियों को लिखित में दिया है। दोनों अधिकारियों ने कहा कि इन मामलों में वे लोग जांच कराएंगे और निर्दोष लोगों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस आश्वासन पर ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।