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बूंदाबांदी से लुड़का तापमान, बढ़ी ठिठुरन, आग बना सहारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 02:27 AM IST
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The temperature dropped due to drizzle, increased chills, fire became support
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। दिन भर बादल छाए रहने और शाम को बूंदाबांदी के चलते पिछले 24 घंटे की तुलना में अधिकतम तापमान में 4.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दो दिन और बूंदाबांदी व बादल छाए रहने के आसार हैं। जिससे ठंड और ज्यादा सताएगी। लोगों ने ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया। सुबह-शाम सड़कों पर धुंध का प्रभाव होने से वाहनों की रफ्तार धीमी नजर आई। वहीं बढ़ती ठंड के मद्देनजर कर्ण गेट बाजार में ऊनी वस्त्रों की बिक्री बढ़ गई है। यहां काफी भीड़ देखने को मिली।
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 16.0 व न्यूनतम 7.0 डिग्री सेल्सियस रहा। नमी शत प्रतिशत व हवा की औसत गति 0.9 किलोमीटर प्रति घंटा रही। एक दिन पूर्व शनिवार को अधिकतम तापमान 20.6 व न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री सेल्सियस था।
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28 दिसंबर को दोपहर बाद मौसम साफ होने की संभावना है। इसके बाद वातावरण में नमी की मात्रा से आगामी पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। रविवार रात भी जिले के कुछ हिस्सों में बूंदाबांदी व हल्की बारिश हुई है। हवा की रफ्तार भी बढ़ने की संभावना है। ठंड से बचाव के लिए ध्यान रखना होगा।
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- डा. योगेश कुमार, मौसम विशेषज्ञ, जिला स्तरीय कृषि मौसम सेवा इकाई, एनडीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र
गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद
यदि अच्छी बारिश होती है तो गेहूं की फसल को फायदा होगा। फुटाव व बढ़वार अच्छी होगी। अक्तूबर से नवंबर तक बिजाई वाले खेतों में किसान पहली व दूसरी सिंचाई कर चुके हैं। पछेती किस्मों की बिजाई का कार्य भी पूरा हो चुका है। बारिश होने पर पछेती किस्मों में पहली सिंचाई की आवश्यकता नहीं रहेगी। गन्ना कटाई के बाद खाली खेतों में जो किसान अब भी गेहूं बिजाई की योजना बना रहे थे उनकी कार्ययोजना बाधित होगी।

-डॉ. अनुज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान
आलू उत्पादकों की चिंता बढ़ी
बूंदाबांदी के चलते आलू उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। आलू की अगेती किस्मों को उखाड़ने का काम चल रहा है। खराब मौसम के कारण आलू उखाड़ने का काम रोकना पड़ा है। यदि हल्की बारिश रहती है तो फसल को नुकसान नहीं होता बल्कि खेत में नमी रहने से पाले से बचाव होता है। ज्यादा बारिश होने पर आलू खेत में ही सड़ जाता है।
-वेदपाल, प्रगतिशील किसान, गांव चुंडीपुर
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