हड़ताल तोड़ने की सरकार ने की थी तैयारी

कैथल Updated Wed, 22 Jan 2014 12:03 AM IST
The government was preparing to break strike
चंडीगढ़ में हुई बैठक के बाद बेशक हरियाणा रोडवेज ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है लेकिन सरकार भी यही प्रयास कर रही थी कि हड़ताल लंबी न चले। सरकार ने नए भर्ती हुए चालकों और परिचालकों की सोमवार शाम को ज्वाइनिंग करवाकर अन्य विकल्पों पर भी विचार करना शुरू कर दिया था। जिलास्तर पर अधिकारियों को किसी भी सूरत में हड़ताल तुड़वाकर बसें चालू करवाए जाने के निर्देश जारी किए जा चुके थे।

सरकार ने यह भी फैसला ले लिया था कि यदि ठेके पर भर्ती कर्मचारियों को टर्मिनेट करना पड़े तो सरकार पीछे नहीं हटेगी। 20 जनवरी को शुरू हुई रोडवेज की हड़ताल को तोड़ने के लिए सरकार ने हरसंभव कदम उठाने का फैसला लिया था। इसी के तहत सोमवार शाम ही प्रदेश भर से रोडवेज में नई भर्ती किए जाने की अफवाहों ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया। इन अफवाहों को जींद में नए चालक-परिचालकों से आवेदन लेने की शुरू हुई प्रक्रिया के बाद और ज्यादा बल मिला। इस कारण रात 10 बजे तक ये अफवाहें पूरे प्रदेश में फैल गईं। हालांकि कैथल में नई भर्ती के लिए आवेदन आदि लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

नए चालकों से चलवाई थी बसें
विभाग ने यह निर्णय लिया गया था कि यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो नए भर्ती हुए चालक-परिचालकों से बसें चलवाई जाएंगी। इसके लिए सभी नए भर्ती हुए चालकों-परिचालकों को तुरंत प्रभाव से ड्यूटी ज्वाइन करने के निर्देश जारी किए गए थे जिसमें से रात को करीब दस कर्मचारियों ने ज्वाइनिंग भी की। इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे रात को 10 बजे पांच बसें ढांड, राजौंद, पिहोवा, पूंडरी रूटों के लिए रवाना की गईं।

कांट्रेक्ट पर लगे कर्मचारियों को एसएमएस
विभाग द्वारा हड़ताल को तोड़ने के लिए कांट्रैक्ट पर लगे कर्मचारियों को एसएमएस किया गया। इसमें कहा गया था कि यदि मंगलवार सुबह ड्यूटी ज्वाइन नहीं की तो उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाएगा। इस संदेश से कई कर्मचारी दहशत में आ गए थे। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अकेले कैथल में 100 से अधिक कांट्रेक्ट पर लगे कर्मचारियों को टर्मिनेट करने के कागजात तैयार किए जा चुके थे लेकिन सुबह हड़ताल समाप्ति की सूचना मिलने पर न केवल कर्मचारियों ने राहत की सांस ली, बल्कि यात्रियों को भी राहत मिली।

एक्शन प्लान तैयार था
जीएम रोडवेज कैथल रामकुमार ने कहा कि हड़ताल समाप्त हो गई है। यह सही है कि सरकार द्वारा हड़ताल लंबा चलने की सूरत में एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया था जिसके चलते मंगलवार सुबह बसें चलवाए जाने का प्रयास किया जाता। नए भर्ती हुए कर्मचारियों की सहायता से सोमवार रात भी पांच बसें चलाई गई थीं लेकिन हड़ताल खुलने से किसी प्रकार की कार्रवाई करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैथल में नई भर्ती के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई थी।

वैकल्पिक व्यवस्था की थी तैयारी
डीसी एनके सोलंकी ने कहा कि सरकार द्वारा नए भर्ती हुए स्टॉफ से जरूरत अनुसार बसें चलाए जाने के आदेश जारी किए गए थे। उन्हें बुला भी लिया गया था।

निजी परमिट मामले में होगा फैसला
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान सतीश शर्मा ने कहा कि रोडवेज द्वारा 20 व 21 को हड़ताल का आह्वान किया गया था जिसमें 20 की हड़ताल के बाद रात को चंडीगढ़ में हुई बातचीत में सरकार ने अन्य मांगों को पूरा किए जाने के साथ-साथ निजी परमिट को लेकर सरकार ने कहा है कि परमिट का मामला कानूनी प्रक्रिया में चल रहा है। इसको लेकर कर्मचारियों के छह प्रतिनिधियों व सरकार के सात प्रतिनिधियों में आपसी सहमति से ही अगला निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैथल में नई भर्ती शुरू नहीं की गई थी, कुछ कर्मचारियों में दबाव बनाने की रणनीति के तहत एसएमएस जरूर कर दिए गए थे।

हड़ताल खुलना दुर्भाग्यपूर्ण
उधर सर्वकर्मचारी संघ से संबंधित हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन के नेता जसबीर सिंह ने कहा कि 19 जनवरी को वार्ता विफल होने के बाद एसकेएस से संबंधित नेताओं को छोड़कर अन्य कर्मचारी नेताओं को बातचीत के लिए बुलाकर 3519 परमिटों को रद्द किए बिना ही कुछ यूनियनों ने हड़ताल वापसी की घोषणा कर दी है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। कर्मचारी नेता नरेश कुमार ने कहा कि जब पूरे प्रदेश के कर्मचारी हड़ताल पर हैं तो यह फैसला सही नहीं हो सकता। एसकेएस की हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।

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