फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   The claims in grain markets, incomplete preparations, grains, karnal

मंडियों में दावे पूरे, तैयारियां अधूरी

Wed, 30 Mar 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Wed, 30 Mar 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
The claims in grain markets, incomplete preparations, grains, karnal
अनाज मंडी - फोटो : अमर उजाला

किसानों का गेहूं पककर लगभग तैयार है। एक सप्ताह बाद गेहूं की कटाई का कार्य भी शुरू हो जाएगा। सरकार की ओर से भी मंडियों में गेहूं की खरीद पहली अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन अभी भी क्षेत्र की मंडियों में गेहूं के रखरखाव के इंतजाम अधूरे हैं। उगी घास, टूटी स्ट्रीट लाइटें, चल रही सीवरेज खुदाई आदि के चलते जिले की मंडियों में अव्यवस्था का आलम है। वहीं, मार्केट कमेटी के अधिकारी गेहूं की आवक शुरू होने तक सारे काम पूरे कर लेने का दावा कर रहे हैं। दावों की पोल तस्वीर खोल रही हैं। न किसानों के लिए कोई व्यवस्था है और न ही गेहूं के लिए। न तिरपाल की उचित व्यवस्था है और न ही उठान के लिए कोई ठोस प्रबंध। ऐसे में एक बार फिर से किसानों को सरकार और अधिकारी भगवान के भरोसे छोड़कर आराम से बस दावे करने में जुटे हैं।

विज्ञापन


जिले के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं की कटाई भी शुरू हो चुकी है। मंडियों में 10 अप्रैल तक गेहूं की आवक होने का अनुमान है। हर बार की तरह इस बार भी मंडी प्रशासन के इंतजाम अधूरे हैं। जिले की अनाज मंडियां अभी गेहूं की खरीद करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में अपनी उपज लेकर मंडी जाने वाले किसानों को ज्यादा राहत मिलने वाली नहीं है। आढ़तियों के पास खुले में रखी गेहूं को खराब मौसम में ढकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था भी नहीं है। किसान विश्राम गृहों के हालात भी बद्तर हैं। मंडी में ज्यादातर स्ट्रीट लाइटें भी खराब पड़ी हैं।
विज्ञापन


जुंडला गेट की तरफ से मंड़ी की ओर जाने वाली सड़क भी जगह-जगह पर टूटी हुई है। ऐसे में किसानों के लिए अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचना इतना सहज नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर शेडों की भी कायदे से सफाई नहीं हुई है। धान के सीजन में विभिन्न मंडियों में लगे इलेक्ट्रानिक वेट ब्रिज भी नहीं चले थे। इस बार भी मंडियों में व्यवस्था कोई ज्यादा ठीक नहीं। हालांकि कस्बे की कस्बे की मंडियों में इस बार करोड़ो रुपये की लागत से निर्माण कार्य करवाए गए हैं। कई जगह पर तो पानी की निकासी के लिए नालों के निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। जो बरसात के समय किसानों के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले की मंडियों में ये हैं समस्याएं
जिले की मंडियों में सबसे बड़ी समस्या सफाई व्यवस्था का अभाव है। मंडियों में किसानों और मजदूरों की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालय मंडियों के शुरू होने से पहले ही जाम हो गए हैं। ऐसे में अपनी फसल लेकर मंडी आने वाले किसानों को परेशानी हो सकती है। करनाल अनाजमंडी में जुंडला गेट की तरफ से बनी सड़क की हालत खस्ता है। वहां से खाली वाहनों का निकला भी मुश्किल हैं। ऐसे में गेहूं से भरी ट्रालियां वहां से कैसे मंडी पहुंचेगी, यह सबसे बड़ा चिंता का विषय है। मंडियों में लगी हाई मास्ट लाइटें भी पूर्ण रूप से दुरुस्त नहीं है। किसानों व मजदूरों के लिए पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। किसानों के लिए बनाए गए विश्राम गृहों की हालत भी नाजुक है। मंडियों में लगे स्ट्रीट लाइट के खंभे भी सही संतुलन में नज़र नहीं आ रहे हैं। रात के समय मंडी से बिजली गुल होने पर मंडी प्रशासन के पास बिजली का कोई अल्टरनेटिव स्त्रोत भी नहीं है। इसके अलावा खराब मौसम में खुले में पड़े गेहूं को ढांपने के लिए भी आढ़तियों के पास तिरपाल की सुविधा नहीं है। हर बार इन अव्यवस्थाओं की वजह से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  

धर्मकांटों में गड़बड़ी से किसानों को नुकसान
जिले की अनाज मंडियों में लगे धर्मकांटों में गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रहीं है। लेकिन मंडी प्रशासन द्वारा इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। इस बार भी धर्मकांटों के संचालन का काम प्राईवेट एजेंसियों को ही सौंपा गया है। ऐसे किसानों को गेहूं के तोल के समय सचेत रहने की जरूरत है।

घरौंडा अनाजमंडी में निर्माण कार्य अधूरे
घरौंडा की अनाजमंडी में तो अभी सड़क निर्माण कार्य भी अूधरा पड़ा है। जीटी रोड से मंडी में प्रवेश करने वाली जीटी रोड़ के अंडरब्रिज को भी अभी तक नहीं खोला गया है। वहीं गेटी नंबर-1 से मंडी में जाने वाली सड़क निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है तथा गेट नंबर-दो निर्माण कार्य अभी अधूरा पड़ा है। ऐसे में इस बार अनाजमंडी में केवल एक पार्ट पर ही गेहूं रख पाना संभव है। यदि इस बार गेहूं की सीजन में बरसात हुई तो मंडी से पानी की निकासी कोई रास्ता नहीं है। ऐसे में किसानों व गेहूं की खरीद एजेंसियों को भारी नुकसान होने की आशंका है।

इंद्री अनाजमंडी के हालात भी बदतर
इंद्री की अनाजमंडी में फड़ व शेड बनने की वजह से हालात में कुछ सुधार हुआ है। लेकिन सफाई व्यवस्था का व्यवस्था, बिजली, पानी व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। किसान यूनियन भी सफाई व्यवस्था को लेकर कई बार मंडी प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट कर चुकी है।

वर्जन
हर बार मंडियों के लिए सरकार बजट भेजती है, लेकिन यह केवल कागजों में ही खर्च होता है और अधिकारी किसानों के नाम पर मोटी रकम डकार जाते हैं। मैंने खुद मंडियों का दौरा किया है, किसानों के लिए बैठने की तो क्या पानी पीने की भी व्यवस्था नहीं है। इस बार किसानों की मांगों को लेकर और जोर से आंदोलन करेंगे, जरूरत पड़ी तो मंडियों को बंद भी कराएंगे। किसी भी सूरत में किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। सरकार और अधिकारी केवल झूठे दावे कर रहे हैं।

रत्न मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।

वर्जन
प्रदेश में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू होने जा रही है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसानों के लिए रेस्ट हॉउस में बिजली पानी की सुविधा व मंडी में आढ़तियों  को तिरपाल रखने के भी निर्देश दिए हैं। अनाजमंडी में सफाई के साथ लाइट व सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए हैं।
आशा रानी, मार्केट कमेटी, सचिव, करनाल।


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed