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एनडीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम को मिला पुरस्कार
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान को एक और पुरस्कार मिलने पर खुशी का माहौल है। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा कार्यक्रम के तहत एनडीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार पूनिया की टीम को कृतज्ञ हैकथॉन पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में बुधवार शाम हुए कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदान किया है।
संस्थान के निदेशक डॉ. एमएस चौहान व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पशु विज्ञान विभाग के उप महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में डॉ. पूनिया की टीम ने 15 अंकीय अल्फा न्यूमेरिक नामकरण प्रणाली पर काम किया। इस प्रणाली में जानवरों की तस्करी को रोकने, बीमारी के प्रकोप और प्राकृतिक आपदा के दौरान जानवरों की उत्पत्ति का अधिक विश्वसनीय तरीके से पता लगाने के लिए जानवरों में एक चिप लगाई गई थी। टीम में तीन पीएचडी छात्र वैशाली दसरिया, हरमीत सिंह ढिल्लो, विशु चौधरी व वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार दीक्षित भी शामिल थे। संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. धीर सिंह ने टीम के पुरस्कृत होने पर खुशी जताई।
डॉ. पूनिया ने कहा कि देश में पशुओं की गिनती संबंधी बहुत सी समस्याएं हैं। यदि एनीमल की कोडिंग भी कर दें तो बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं। इससे चोरी भी रुक सकती है। बीमारी की रोकथाम व अन्य समस्याओं का समाधान हो सकता है। सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सकता है।
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करनाल। राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान को एक और पुरस्कार मिलने पर खुशी का माहौल है। राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा कार्यक्रम के तहत एनडीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार पूनिया की टीम को कृतज्ञ हैकथॉन पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में बुधवार शाम हुए कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदान किया है।
संस्थान के निदेशक डॉ. एमएस चौहान व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पशु विज्ञान विभाग के उप महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में डॉ. पूनिया की टीम ने 15 अंकीय अल्फा न्यूमेरिक नामकरण प्रणाली पर काम किया। इस प्रणाली में जानवरों की तस्करी को रोकने, बीमारी के प्रकोप और प्राकृतिक आपदा के दौरान जानवरों की उत्पत्ति का अधिक विश्वसनीय तरीके से पता लगाने के लिए जानवरों में एक चिप लगाई गई थी। टीम में तीन पीएचडी छात्र वैशाली दसरिया, हरमीत सिंह ढिल्लो, विशु चौधरी व वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार दीक्षित भी शामिल थे। संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. धीर सिंह ने टीम के पुरस्कृत होने पर खुशी जताई।
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डॉ. पूनिया ने कहा कि देश में पशुओं की गिनती संबंधी बहुत सी समस्याएं हैं। यदि एनीमल की कोडिंग भी कर दें तो बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं। इससे चोरी भी रुक सकती है। बीमारी की रोकथाम व अन्य समस्याओं का समाधान हो सकता है। सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सकता है।
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