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अध्यापक आकलन परीक्षा का बहिष्कार करने का फैसला
करनाल
Updated Mon, 26 May 2014 12:17 AM IST
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अध्यापक आकलन परीक्षा को लेकर अध्यापक संघों ने कड़ा रुख अपनाया है। संघों
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ने 26 मई को होने वाले टीएनए का प्रदेश स्तर पर कड़ा विरोध कर इसका पूर्ण
बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
इसी सिलसिले में संघों के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से मिलकर प्रधान सचिव एवं वित्तायुक्त शिक्षा विभाग सरीना राजन व निदेशक मौलिक शिक्षा डी. सुरेश से मिलकर अपना स्पष्ट रुख उनके सामने रख दिया है।
हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ-70 के प्रदेशाध्यक्ष जवाहर गोयल ने बताया कि विभाग के आला अधिकारियों का ध्यान शिक्षकों व विद्यालयों से संबंधित समस्याओं जिनमें पिछले वर्षों से लंबित पड़े एसीपी केस, पदोन्नति मामले, स्थानांतरण नीति का स्पष्ट न होना, विद्यालयों में धरातल पर दी जाने वाली सुविधाएं आदि आवश्यक कार्यों की तरफ न होकर नए-नए फरमान जारी करने पर है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार से विभाग शैक्षणिक माहौल को खराब कर रहा है। उन्हाेंने बताया कि 26 मई को होने वाले टीएनए का पूरे प्रदेश स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा। वहीं प्राथमिक शिक्षा संघ के जिलाध्यक्ष विनोद चौहान ने कहा कि जब से सुरीना राजन आई हैं, तब से विभाग में हर रोज एक के बाद एक नई नीति की घोषणा कर दी जाती है। अध्यापक संघ के प्रांतीय प्रेस सचिव डा. रजनीश कौशिक व हसला के जिलाध्यक्ष डा. अशोक शर्मा ने कहा कि हर अध्यापक की जिम्मेदारी विद्यालय के अंदर ही निर्धारित की जा सकती है।
डा. रजनीश कौशिक ने कहा कि यदि यह टेस्ट ही नहीं है, तो फिर ऐसे में समय बर्बाद करने वाले साधनों से न केवल अध्यापकों की गरिमा को ठेस पहुंचेगी बल्कि शिक्षण पद्धति में भी किसी प्रकार का योगदान नहीं बढ़ेगा। उन्होंने मांग की कि ऐसी परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए।
इस अवसर पर मास्टर वर्ग एसोसिएशन के रमेश राणा, सतप्रकाश सैनी, पवन मित्तल, राजीव धवन, जागर सिंह सैनी, प्रमोद वालिया, अभिषेक, सूबे सिंह, अतुल, सुखविंदर सिंह, नरेश गर्ग, सतबीर और राजेंद्र शास्त्री मौजूद रहे।
इसी सिलसिले में संघों के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से मिलकर प्रधान सचिव एवं वित्तायुक्त शिक्षा विभाग सरीना राजन व निदेशक मौलिक शिक्षा डी. सुरेश से मिलकर अपना स्पष्ट रुख उनके सामने रख दिया है।
हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ-70 के प्रदेशाध्यक्ष जवाहर गोयल ने बताया कि विभाग के आला अधिकारियों का ध्यान शिक्षकों व विद्यालयों से संबंधित समस्याओं जिनमें पिछले वर्षों से लंबित पड़े एसीपी केस, पदोन्नति मामले, स्थानांतरण नीति का स्पष्ट न होना, विद्यालयों में धरातल पर दी जाने वाली सुविधाएं आदि आवश्यक कार्यों की तरफ न होकर नए-नए फरमान जारी करने पर है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार से विभाग शैक्षणिक माहौल को खराब कर रहा है। उन्हाेंने बताया कि 26 मई को होने वाले टीएनए का पूरे प्रदेश स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा। वहीं प्राथमिक शिक्षा संघ के जिलाध्यक्ष विनोद चौहान ने कहा कि जब से सुरीना राजन आई हैं, तब से विभाग में हर रोज एक के बाद एक नई नीति की घोषणा कर दी जाती है। अध्यापक संघ के प्रांतीय प्रेस सचिव डा. रजनीश कौशिक व हसला के जिलाध्यक्ष डा. अशोक शर्मा ने कहा कि हर अध्यापक की जिम्मेदारी विद्यालय के अंदर ही निर्धारित की जा सकती है।
डा. रजनीश कौशिक ने कहा कि यदि यह टेस्ट ही नहीं है, तो फिर ऐसे में समय बर्बाद करने वाले साधनों से न केवल अध्यापकों की गरिमा को ठेस पहुंचेगी बल्कि शिक्षण पद्धति में भी किसी प्रकार का योगदान नहीं बढ़ेगा। उन्होंने मांग की कि ऐसी परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए।
इस अवसर पर मास्टर वर्ग एसोसिएशन के रमेश राणा, सतप्रकाश सैनी, पवन मित्तल, राजीव धवन, जागर सिंह सैनी, प्रमोद वालिया, अभिषेक, सूबे सिंह, अतुल, सुखविंदर सिंह, नरेश गर्ग, सतबीर और राजेंद्र शास्त्री मौजूद रहे।