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पोर्टल की खामी मुनाफा कमाने वालों के लिए वरदान बनी
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करनाल। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर धान की फसल का पंजीकरण जारी है लेकिन पोर्टल की एक खामी मुनाफा कमाने वालों के लिए वरदान बन रही है। बताते हैं कि फर्जी फसल पंजीकरण कराकर दोहरा मुनाफा कमाने का रास्ता आढ़तियों व राइस मिलर्स ने निकाल लिया है। इसके तहत बासमती के रकबे को ग्रेड-ए के स्थान पर दर्ज किया जा रहा है। मामले की मुख्यमंत्री से शिकायत भी की गई है।
हरियाणा सरकार ने भले ही फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए पोर्टल पर फसल का रजिस्ट्रेशन कराने और सीधे किसानों के खातों में धनराशि भेजे जाने की व्यवस्था शुरू की हो लेकिन पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में कहीं भी प्रजाति लिखने का कोई कॉलम नहीं है। ऐसे में पोर्टल की यह खामी मुनाफा कमाने वालों के लिए वरदान साबित हो सकती है। यह कमी क्यों छोड़ी गई, इस पर सरकारी महकमे पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। इसका फायदा उठाते हुए कारोबारियों ने बड़ी संख्या में किसानों के नाम पर महीन धान (नॉन एमएसपी) का पंजीकरण मोटे धान के तौर पर कराना शुरू कर दिया है। इससे महीन धान का लाभ तो मिलेगा, उसके पंजीकरण पर बाहर से लाया गया या फिर खरीद से पहले सस्ते में खरीदे गए धान को एमएसपी पर बेचा जा सकेगा।
बताते हैं कि पोर्टल में उन किसानों भी पंजीकरण कर दिया गया जिनके खेतों में बासमती की प्रजाति 1509, 1121 व सी-30 आदि खड़ी हैं जबकि इन प्रजातियों का धान सरकार नहीं खरीदती है। पिछले एक महीने से बासमती की 1509 प्रजाति की धान अनाज मंडियों में आ रहा है। इसकी खरीद भी चावल कारोबारी कर रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने बासमती की अन्य प्रजातियों के धान को भी लगाया है। खेल यह है कि बासमती के क्षेत्रफल को भी पोर्टल पर पंजीकृत कराया जा रहा है। इससे पहला फायदा तो बासमती की फसल बेचकर होगा, दूसरा फायदा इसी फसल के पंजीकरण पर सस्ता खरीदा गया धान सरकारी रेट पर बेचकर होगा।
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इन प्रजातियों का धान एमएसपी पर खरीदती है सरकार
सरकार एमएसपी पर सिर्फ ग्रेड ए का मोटा धान ही खरीदती है, जिसमें पीआर 106, पीआर 114, एचआर 120, एचआर 109, पूसा-44 तथा कॉमन सी ग्रेड के धान की आईआर 8, 64 व पीआर-113 प्रजातियां शामिल हैं।
1960 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी खरीद
इस बार हरियाणा सरकार ने ग्रेड-ए व सामान्य प्रजाति के धान को खरीदने के लिए भाव पहले ही घोषित कर रखा है। इसके तहत ग्रेड-ए प्रजातियों के धान को 1960 रुपये व कॉमन धान को 1940 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। जो पिछले साल से 72 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर प्रजाति दर्ज करने का विकल्प नहीं होने का फायदा मुनाफा कमाने वाले उठाते हैं। बड़ी संख्या में पोर्टल पर बासमती की प्रजातियों के रकबे को मोटे धान के तौर पर पंजीकृत कराया जा रहा है। जिसमें आढ़ती व राइस मिलर्स के साथ साथ कई बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। सरकार ने पोर्टल व किसानों के खातों में सीधे भुगतान लागू करके फर्जीवाड़े को कुछ हद तक रोका है लेकिन यह नया रास्ता निकाल लिया गया है। मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पोर्टल पर पंजीकरण के सहारे किए जा रहे खेल से अवगत कराया गया है। पत्र में मुख्यमंत्री से बासमती किस्मों के धान का सत्यापन कराकर वैरीफिकेशन अलग रिकार्ड में ब्योरा दर्ज कराने की मांग की गई है। -ईलम सिंह पूर्व चेयरमैन मार्केट कमेटी कुंजपुरा। (फोटो)
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हरियाणा सरकार ने भले ही फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए पोर्टल पर फसल का रजिस्ट्रेशन कराने और सीधे किसानों के खातों में धनराशि भेजे जाने की व्यवस्था शुरू की हो लेकिन पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में कहीं भी प्रजाति लिखने का कोई कॉलम नहीं है। ऐसे में पोर्टल की यह खामी मुनाफा कमाने वालों के लिए वरदान साबित हो सकती है। यह कमी क्यों छोड़ी गई, इस पर सरकारी महकमे पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। इसका फायदा उठाते हुए कारोबारियों ने बड़ी संख्या में किसानों के नाम पर महीन धान (नॉन एमएसपी) का पंजीकरण मोटे धान के तौर पर कराना शुरू कर दिया है। इससे महीन धान का लाभ तो मिलेगा, उसके पंजीकरण पर बाहर से लाया गया या फिर खरीद से पहले सस्ते में खरीदे गए धान को एमएसपी पर बेचा जा सकेगा।
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बताते हैं कि पोर्टल में उन किसानों भी पंजीकरण कर दिया गया जिनके खेतों में बासमती की प्रजाति 1509, 1121 व सी-30 आदि खड़ी हैं जबकि इन प्रजातियों का धान सरकार नहीं खरीदती है। पिछले एक महीने से बासमती की 1509 प्रजाति की धान अनाज मंडियों में आ रहा है। इसकी खरीद भी चावल कारोबारी कर रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने बासमती की अन्य प्रजातियों के धान को भी लगाया है। खेल यह है कि बासमती के क्षेत्रफल को भी पोर्टल पर पंजीकृत कराया जा रहा है। इससे पहला फायदा तो बासमती की फसल बेचकर होगा, दूसरा फायदा इसी फसल के पंजीकरण पर सस्ता खरीदा गया धान सरकारी रेट पर बेचकर होगा।
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इन प्रजातियों का धान एमएसपी पर खरीदती है सरकार
सरकार एमएसपी पर सिर्फ ग्रेड ए का मोटा धान ही खरीदती है, जिसमें पीआर 106, पीआर 114, एचआर 120, एचआर 109, पूसा-44 तथा कॉमन सी ग्रेड के धान की आईआर 8, 64 व पीआर-113 प्रजातियां शामिल हैं।
1960 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी खरीद
इस बार हरियाणा सरकार ने ग्रेड-ए व सामान्य प्रजाति के धान को खरीदने के लिए भाव पहले ही घोषित कर रखा है। इसके तहत ग्रेड-ए प्रजातियों के धान को 1960 रुपये व कॉमन धान को 1940 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। जो पिछले साल से 72 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर प्रजाति दर्ज करने का विकल्प नहीं होने का फायदा मुनाफा कमाने वाले उठाते हैं। बड़ी संख्या में पोर्टल पर बासमती की प्रजातियों के रकबे को मोटे धान के तौर पर पंजीकृत कराया जा रहा है। जिसमें आढ़ती व राइस मिलर्स के साथ साथ कई बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। सरकार ने पोर्टल व किसानों के खातों में सीधे भुगतान लागू करके फर्जीवाड़े को कुछ हद तक रोका है लेकिन यह नया रास्ता निकाल लिया गया है। मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पोर्टल पर पंजीकरण के सहारे किए जा रहे खेल से अवगत कराया गया है। पत्र में मुख्यमंत्री से बासमती किस्मों के धान का सत्यापन कराकर वैरीफिकेशन अलग रिकार्ड में ब्योरा दर्ज कराने की मांग की गई है। -ईलम सिंह पूर्व चेयरमैन मार्केट कमेटी कुंजपुरा। (फोटो)