गरीबों के प्लाटों पर निगम का कब्जा, प्लाट धारकों ने जताया रोष
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गांव बुढ़ाखेड़ा की पूर्व पंचायत द्वारा गरीबों को दिए गए 100-100 गज के प्लाटों पर नगर निगम द्वारा कब्जा करने का मामला प्रकाश में आया है। नगर निगम ने प्लाटों पर कब्जे के लिए नींव खुदवा दी। जब ग्रामीणों को इस बात का पता चला तो ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर इसका विरोध किया और निगम द्वारा चलाया जा रहा निर्माण कार्य रुकवाया। ग्रामीणों ने भारी संख्या में इकट्ठा होकर निगम और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में वार्ड 1 के पार्षद बलविंद्र सिंह ने ग्रामीणों को समझाया और उनके प्लाटों को वापस देने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही ग्रामीण शांत हुए।
नगर निगम के अंतर्गत आने वाले गांव बुढ़ाखेड़ा की पूर्व ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी आवास योजना के तहत 2009 में गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत करने वाले लोगों को गांव की पंचायती जमीन में 100-100 गज के प्लाट दिए गए थे। गांव बुढ़ाखेड़ा की पंचायती जमीन होटल नूरमहल और न्यू वर्ल्ड रेसीडेंसी के पास स्थित है। पंचायत ने उस जमीन में गांव के 90 लोगों को प्लाट दिए थे।
उसके बाद उनका गांव निगम के अधीन आ गया। निगम में आने के बाद उन्हें अभी तक जमीन पर कब्जा नहीं मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि निगम जबरदस्ती उनसे यह जमीन लेना चाहता है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में केस किया था। हाईकोर्ट ने भी फैसला उनके पक्ष मे दिया है, लेकिन फिर भी निगम जबरदस्ती उनकी जमीन पर कब्जा कर रहा है।
ग्रामीणों ने निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष व्यक्त किया। बाद में वार्ड दो के पार्षद बलविंद्र ने आकर लोगों को समझाया कि उनके प्लाटों को उन्हें दिलवाया जाएगा। ग्रामीणों ने आकर निगम द्वारा किया जा रहा दिवार बनाने का कार्य भी रुकवा दिया।
ग्रामीण सुरता राम ने बताया कि उनको पंचायत द्वारा मुफ्त प्लाट दिए गए थे, लेकिन निगम और सरकार के कुछ लोग जबरदस्ती उनके प्लाटों पर कब्जा करना चाहतेे हैं।
सुशील कुमार ने बताया कि उन्होंने प्लाट के कब्जे को लेकर हाईकोर्ट में केस किया था। वहां भी केस जीत जाने के बाद भी उन्हे प्लाट नहीं दिए जा रहे। अब निगम उनके प्लाटो को हड़पना चाहता है।
प्लाट धारक रामकुमार ने बताया कि पंचायत ने तो उन्हे प्लाट दे दिए थे। परंतु जब से निगम बना है तब से उनकी समस्याएं ओर ज्यादा बढ़ गई है। काफी दिनों से उन्हे प्लाटों पर कब्जा नहीं मिल रहा है।
ग्रामीण प्रदीप ने बताया कि उनके पास प्लाट का आबंटन पत्र है। फिर भी निगम जबरदस्ती उनके प्लाटों पर निर्माण कार्य करवा रहा है। अगर उनके प्लाट उन्हे नहीं मिले तो उन्हे संघर्ष करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
ग्रामीण रवि ने बताया कि सरकार के कुछ लोग उनके प्लाटों को हड़पने के लिए निगम द्वारा यह कार्य करवा रहे हैं, लेकिन वह अपने प्लाटों को लेने के लिए हर प्रकार के संघर्ष के लिए तैयार है।
जब तक लोगों को कब्जा नहीं दिया तब तक वह जमीन नगर निगम की रहेगी। नगर निगम अपनी जमीन पर चारदिवारी करवा रहा है। इससे उन लोगों को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।
-धीरज कुमार कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम करनाल