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हरियाणा में करीब 160 करोड़ रुपये की मजदूरी फंसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 02:10 AM IST
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one lakh labour not received money
हरियाणा के करनाल सहित 110 अनाज मंडियों में करीब एक लाख श्रमिक गेहूं खरीद के दौरान उतराई, लदान, खाद्यान्न साफ करने आदि का कार्य करते हैं, इनमें अधिकांश श्रमिक बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं जो कि अपने परिवार का भरण पोषण इसी से करते हैं लेकिन 15 मई को गेहूं खरीद खत्म हो गई। करीब 80 प्रतिशत किसानों के खातों में भुगतान भी भेज दिया गया लेकिन राज्यभर में किसी श्रमिक को एक रुपये की मजदूरी भी अभी जारी नहीं की गई है, जो कि करीब 160 करोड़ रुपये बनती है। इस कारण बिना मजदूरी के ही हजारों श्रमिक संबंधित आढ़तियों से कर्ज लेकर निराश होकर अपने घरों को रवाना हो गए हैं, क्योंकि किसी को बच्चों की शादी करनी है तो किसी को अपने परिजनों का आपरेशन कराना है, किसी को अन्य पारिवारिक कार्य करने होते हैं। परिजनों को भी उनके पैसे कमाकर लौटने का इंतजार रहता है।
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इस बार 10.57 रुपये कर दी मजदूरी
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश संगठन मंत्री जंग बहादुर यादव ने बताया कि बिहार, यूपी व अन्य प्रदेशों के साथ-साथ हरियाणा के भी बड़ी संख्या में श्रमिक मंडियों में कार्य करते हैं। पिछले साल तक सरकार द्वारा 12.97 रुपये प्रति कट्टा (50 किग्रा) मजदूरी दी जा रही थी, जिसे इस बार 10.57 रुपये कर दिया गया। पिछले साल लोडिंग चार रुपये प्रति कट्टा थी,26 मार्च को आदेश जारी कर यह 2.60 रुपये प्रति कट्टा कर दिया था। पिछले साल के समान मजदूरी को लेकर सरकार से बात चल रही थी, लेकिन मार्केट कमेटियों के सचिवों ने नए रेट को लेकर ही रिपोर्ट भेजी थी। मजदूरी आई-फार्म (खरीद) व फार्म-जे (गेहूं आने पर) के आधार पर काटी जाती है। जिसका सरकार भुगतान करती है जो अभी तक पूरे प्रदेश में नहीं किया गया है। खरीद खत्म होने के बाद अपने घरेलू कार्य का निपटान करने यूपी-बिहार के श्रमिक घरों को लौटते हैं, हजारों श्रमिक बिना मजदूरी आढ़तियों से किसी तरह अग्रिम भुगतान लेकर गए हैं। लगातार कार्य करने के बावजूद समय से मजदूरी नहीं मिलने से श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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करनाल मंडी में ही पांच हजार लेबर हैं। प्रदेशभर में सभी अनाज मंडियों में लेबर की संख्या एक लाख से अधिक है। प्रदेशभर में जितनी खरीद हुई है, उसके आधार पर करीब 160 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी बनती है। जिसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। अनाज मंडियों में लेबर आढ़तियों के बुलावे पर ही आती है, आढ़ती लेबर का ध्यान भी रखते हैं। इस बार सरकार ने राज्य में किसी भी अनाज मंडी में अभी लेबर को एक रुपया भी भुगतान नहीं दिया है। लेबर का आढ़तियों पर भारी दबाव है। इस बारे में लगातार सरकार के प्रतिनिधियों से बात भी की जा रही है, लेकिन आश्वासन मिल रहा है कि इसी सप्ताह भुगतान कर दिया जाएगा।
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-रजनीश चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष-हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
अभी 15 मई को ही गेहूं खरीद संपन्न हुई है। किसानों आदि का भुगतान लगभग कर दिया है। लेबर को भुगतान करने की प्रक्रिया भी चल रही है। पिछले सालों में भी लेबर का भुगतान बाद में होता रहा है। आगामी दो तीन दिन में ही लेबर को मजदूरी का भुगतान शुरू हो सकता है। -निशांत राठी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक करनाल
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