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फसल बीमा योजना में सुधार की जरूरत

Fri, 10 Jan 2014 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/निसिंग
अमर उजाला ब्यूरो/निसिंग Updated Fri, 10 Jan 2014 12:17 AM IST
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Need to improve crop insurance scheme
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में लागू की गई कृषि बीमा योजना के विरोध में भाकियू नेताओं ने निसिंग स्थित उपतहसील में नायब तहसीलदार राजाराम को ज्ञापन सौंपा। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष सेवा सिंह आर्य ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से बीमा योजना सर्वप्रथम जिला करनाल व कैथल में शुरू की गई।
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इसका खंडन करते भाकियू नेताओं ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट में दो वर्ष पूर्व जस्टिस संजय कौल की अदालत में केस दायर किया था, जिसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि यह केस एग्रीकल्चर फाइनेंस कमिश्नर के अंतर्गत आता है।
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उन्होेंने कहा कि कमिश्नर रोशनलाल ने सरकार को लिखित पत्र भेजकर बीमा योजना में सुधार कर किसानों के हित में लागू करने की मांग की। इससे पूर्व गुरुद्वारा रोड़ी साहिब स्थित बारात घर में भाकियू नेताओं की ओर से ब्लाक प्रधान की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बीमा योजना को किसान विरोधी करार दिया गया।
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भाकियू जिला प्रधान पृथ्वी सिंह ने बताया कि किसानों को बीमा योजना का लाभ तब मिलेगा, जब पूरे गांव की फसल किसी प्राकृतिक आपदा और बीमारी से खराब हो जाएगी, जबकि पूरे गांव की फसल बाढ़, ओलावृष्टि व बीमारी आने से एक साथ कभी खराब नहीं होती।

उन्होंने बताया कि गांव की बजाय प्रति एकड़ को इकाई मानकर इच्छुक किसान का बीमा किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि करनाल जिला में बीमा योजना के तहत किसान से तीन सौ 74 रुपये और कैथल में 470 रुपये प्रति एकड़ प्रति फसल के हिसाब से किया जाएगा।

बैठक में किसानों ने सरकार से फसल बीमा पालिसी तुरंत बंद करने की मांग की है। उन्होंने सरकार पर बीमा पालिसी के जरिए किसानों को लूटने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि बैंकों व सोसाइटी में खाताधारक उपभोक्ताओं के बीमा के नाम पर पैसे काटे जा रहे हैं।


यदि सरकार ने फसल बीमा पालिसी को तुरंत बंद नहीं किया तो भाकियू इसके विरोध में आंदोलन करेगी। बैठक में जिला उपप्रधान सरदार सुखासिंह,  मांगे सिंह, सुखचैन सिंह, महेंद्र सिंह, अंग्रेज सिंह, राजकुमार, पालाराम, लखपतराय, नसीबसिंह, जसपाल धुत्थड, बाबूराम व सेवा सिंह हथलाना सहित दर्जनों किसान मौजूद थे।  

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