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एनडीआरआई को मिला ग्लोबल वाटर अवार्ड
सार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से प्रदत्त जल संरक्षण हेतु पशुधन में परियोजना पर संस्थान ने 2016 में काम शुरू किया था। संस्थान ने ऐसे उपाय विकसित किए जिससे पशुशाला से निकलने वाले जल का शुद्धिकरण करके उसे पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है।
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ndri
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) को जल संरक्षण के क्षेत्र में ग्लोबल वाटर अवार्ड-2021 से नवाजा गया है। यह पुरस्कार ऊर्जा एवं पर्यावरण फाउंडेशन की ओर से 21 व 22 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री राजेंद्र शेखावत ने संस्थान के निदेशक डा. मनमोहन सिंह चौहान को प्रदान किया। इससे संस्थान के वैज्ञानिकों में खुशी है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से प्रदत्त जल संरक्षण हेतु पशुधन में परियोजना पर संस्थान ने 2016 में काम शुरू किया था। संस्थान ने ऐसे उपाय विकसित किए जिससे पशुशाला से निकलने वाले जल का शुद्धिकरण करके उसे पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है। इन तकनीकों को किसान कम खर्च में इस्तेमाल कर सकते हैं।
नल से 30 मिनट में बह जाता है 28800 लीटर पानी
संस्थान के निदेशक डा. एमएस चौहान का कहना है कि आधा इंच गोलाकार पाइप का नल यदि दस घंटे लगातार चलता है तो उससे 28 हजार 800 लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। घरों में छत पर रखी टंकी में इस्तेमाल होने वाले बॉल कॉर्क को पशुशाला में पशुओं के पानी वाले स्रोत में लगाने से ही पानी व्यर्थ बहने पर रोक लग जाती है। पशुशाला का फर्श धोने में जेट पंप के इस्तेमाल से ही 80 प्रतिशत तक पानी की बचत हो जाती है।
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ऐसे कर सकते हैं अपशिष्ट जल का शुद्धिकरण -
-अपशिष्ट जल को एक होद या टंकी में इकट्ठा कर लें।
- प्रति 100 लीटर जल में 100 ग्राम पिसी हुई फिटकरी डालकर उसे 25 मिनट तक हिलाते रहें।
- 30 से 40 मिनट बाद अपशिष्ट जल मिश्रण में 50 ग्राम पिसा कोयला या चारकोल पाउडर प्रति 100 लीटर जल के हिसाब से मिला दें।
- फिर जल को 30 से 40 मिनट तक हिलाएं और 40 मिनट के लिए छोड़ दें।
- इसके बाद सभी अपशिष्ट कण होद की तलहटी में बैठ जाएंगे।
- होद से जल की स्वच्छ सतह को दूसरी टंकी में एकत्रित कर लें।
- अब इस पारदर्शी एवं स्वच्छ जल को जीवाणु रहित करने के लिए 250 मिली लिक्विड क्लोरीन या 60 मिली लिक्विड क्लोरीन प्रति सौ लीटर जल में मिला दें।
इस जल को दो घंटे उपरांत इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से प्रदत्त जल संरक्षण हेतु पशुधन में परियोजना पर संस्थान ने 2016 में काम शुरू किया था। संस्थान ने ऐसे उपाय विकसित किए जिससे पशुशाला से निकलने वाले जल का शुद्धिकरण करके उसे पुन: इस्तेमाल किया जा सकता है। इन तकनीकों को किसान कम खर्च में इस्तेमाल कर सकते हैं।
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नल से 30 मिनट में बह जाता है 28800 लीटर पानी
संस्थान के निदेशक डा. एमएस चौहान का कहना है कि आधा इंच गोलाकार पाइप का नल यदि दस घंटे लगातार चलता है तो उससे 28 हजार 800 लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। घरों में छत पर रखी टंकी में इस्तेमाल होने वाले बॉल कॉर्क को पशुशाला में पशुओं के पानी वाले स्रोत में लगाने से ही पानी व्यर्थ बहने पर रोक लग जाती है। पशुशाला का फर्श धोने में जेट पंप के इस्तेमाल से ही 80 प्रतिशत तक पानी की बचत हो जाती है।
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ऐसे कर सकते हैं अपशिष्ट जल का शुद्धिकरण -
-अपशिष्ट जल को एक होद या टंकी में इकट्ठा कर लें।
- प्रति 100 लीटर जल में 100 ग्राम पिसी हुई फिटकरी डालकर उसे 25 मिनट तक हिलाते रहें।
- 30 से 40 मिनट बाद अपशिष्ट जल मिश्रण में 50 ग्राम पिसा कोयला या चारकोल पाउडर प्रति 100 लीटर जल के हिसाब से मिला दें।
- फिर जल को 30 से 40 मिनट तक हिलाएं और 40 मिनट के लिए छोड़ दें।
- इसके बाद सभी अपशिष्ट कण होद की तलहटी में बैठ जाएंगे।
- होद से जल की स्वच्छ सतह को दूसरी टंकी में एकत्रित कर लें।
- अब इस पारदर्शी एवं स्वच्छ जल को जीवाणु रहित करने के लिए 250 मिली लिक्विड क्लोरीन या 60 मिली लिक्विड क्लोरीन प्रति सौ लीटर जल में मिला दें।
इस जल को दो घंटे उपरांत इस्तेमाल में लाया जा सकता है।