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नारद ने किया विष्णु को श्राप तो भावुक हुए दर्शक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 02:21 AM IST
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Narada cursed Vishnu and the audience got emotional
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नारद दर्पण में स्वयं का बंदर रूप देखकर जब क्रोधित हो जाते हैं तो वे विष्णु भगवान को को श्राप देते हैं कि आपको भी धरती पर आना पड़ेगा और आप भी महिला के लिए वन-वन घूमेंगे। यह दृश्य देखकर दर्शक भी भावुक हो गए और उन्होंने तालियों के साथ कलाकारों का हौसला भी बढ़ाया। मौका था नारद मोह नाटक के मंचन का। जिसका जीवंत दृश्य श्री रामायण पाठक सभा के कलाकारों ने वीरवार को दर्शाया। श्री राम लीला भवन में रामलीला मंचन शुरू हो गया है। शुक्रवार को दूसरे दिन श्री राम जन्म का मंचन किया जाएगा।
पहले दिन कलाकारों ने मंचन में दर्शाया कि देवर्षि नारद को घमंड हो जाता है कि उनसे बड़ा तपस्वी कोई नहीं है। उनका घमंड तोड़ने के लिए प्रभु विष्णु द्वारा माया रची जाती है। देवर्षि नारद एक जगह विश्व मोहिनी से मिलते हैं। मोहिनी उन्हें पसंद आ जाती हैं। इस बीच नारद को खबर मिलती है कि विश्व मोहिनी के स्वयंवर का आयोजन किया गया है। तब नारद प्रभु विष्णु के पास पहुंचते हैं और हरि जैसा रूप मांगते हैं। प्रभु विष्णु उन्हें हरि (बंदर) का रूप प्रदान कर देते हैं। नारद उत्साहित होकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। सभी राजा उन्हें देखकर हंसने लगते हैं। नारद को कुछ समझ में नहीं आता है। सारे राजा नारद का उपहास करते हैं। नारद दर्पण में स्वयं का बंदर रूप देखकर क्रोधित हो जाते हैं। लेकिन भगवान विष्णु जानते थे कि नारद उनके परम भक्त हैं, मगर उनमें अहम का भाव आ गया है।
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कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला.. से गूंजा मैदान
-भगवान राम के जन्म पर गूंजे जयकारे, दर्शक दिखे उत्साहित
घरौंडा। श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में मंगलवार को अयोध्या नगरी बना रामलीला मैदान खुशियों से झूम उठा। दीपावली की तरह मिठाईयां बांटी गई और आकर्षक सजावट की गई। मौका था भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का। भगवान के जन्म के साथ ही पूरी अयोध्या नगरी प्रभु राम की एक झलक पाने को व्याकुल हो रही थी।
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बुधवार की रात रामलीला मैदान में हुई लीला के मंचन में दर्शाया गया कि राजा दशरथ के संतान न होने के कारण अपने कुलगुरु वशिष्ठ जी के पास जाते है। जहां वशिष्ठ जी द्वारा श्रृंगी ऋषि द्वारा शुभ पुत्र कामेष्ठि यज्ञ करवाते है। यज्ञ कुंड से अग्नि देवता का प्रकट होकर खीर प्रदान करते है। जिसके बाद राजा दशरथ द्वारा तीनों रानियों कौशल्या, कैकई और सुमित्रा को खीर प्रदान की जाती है और खीर खाकर तीनों रानियों का गर्भवती होने की लीला हुई। भगवान राम के साथ तीनों भाईयों के जन्म लेते ही राजा दशरथ और रानी कौशल्या बड़े ही उत्साहित थे। अवध में चारों ओर बधाई गान गाए गए। कौशल्या जायो लल्ला, अवध में मचो हल्ला, अवध में जनमे रघराई, कौशल्या रानी दे दो बधाई। रामलीला मंचन से कलाकारों ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
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