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जहर खाकर आत्महत्या करने वाले अधिकतर युवा

Fri, 07 Feb 2014 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल Updated Fri, 07 Feb 2014 11:33 PM IST
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Most youth who committed suicide by consuming poison
युवा अवस्था में पारिवारिक कलह, इच्छाएं पूरी न होना, प्रेम संबंध और डिप्रेशन के शिकार लोगों के आत्महत्या करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इनमें अधिकतर मामले 20 से 40 वर्ष की आयु के हैं।
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अमृतधारा अस्पताल के डाक्टरों द्वारा किए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि आत्महत्या करने के लिए युवा सल्फास और कीटनाशक दवाइयाें का अधिक उपयोग करते हैं। इसमें 25 प्रतिशत लोग ही बच पाते हैं, जबकि 75 प्रतिशत दम तोड़ देते हैं।
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मरने वाले अधिकतर लोग उपचार से पूर्व घर पर ही दम तोड़ देते हैं या उपचार के लिए डाक्टर के पास आने में देरी होने के कारण उनकी मौत हो जाती है।

यह आंकडे़ दुर्घटनाआें में पुरुषों की मौत, प्रसूति के दौरान महिलाओं की मौत के बराबर आत्महत्या से मरने वालों का आंकड़ा लगभग बराबर है। पाया गया है कि अधिकतर युवा अवस्था में ही आत्महत्या करने व आत्महत्या का प्रयास करने वालाें की संख्या अधिक है।
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तीन माह में 84 ने गटका जहर
अमृतधारा अस्पताल के डॉ. अनिल द्वारा किए गए सर्वे में पाया कि तीन महीने में 84 लोगों ने आत्महत्या करने के इरादे से जहर गटका, जिसमें 69 लोग उपचार के दौरान ठीक होकर घर लौट गए, जबकि 17 ने दम तोड़ दिया।

इनमें 58 महिलाएं, 45 पुरुष व एक किन्नर शामिल था। यदि 84 मरीजों को आयु के अनुसार देखे तो दस वर्ष तक के दो बच्चे, जिन्होंने गलती व चूर्ण आदि समझकर कीटनाशक दवाई के पाउच से ही निकाल कर खा लिया।

ज्यादातर इस आयु वर्ग के लोग
10 से 20 वर्ष तक की आयु के 17 मरीज, 20 से 30 आयु वर्ष तक के 38 मरीज, 30 से 40 आयु वर्ष के 17 मरीज, 40 से 50 आयु वर्ष के छह मरीज, 50 से 60 आयु वर्ष के चार मरीज जहर गटकने के बाद अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे।


इनमें 30 लोगों ने सल्फास खाकर आत्महत्या का प्रयास किया, 41 ने कीटनाशक दवाई पीकर, आत्महत्या का प्रयास करने वाले 15 ड्रग्स लेने वाले और 31 डिप्रेशन के शिकार मरीज थे। डॉ. अनिल ने आत्महत्या का प्रयास करने वाले व मरने वालों के परिजनों से बात कर सर्वे किया कि 50 प्रतिशत लोग पारिवारिक कलह के कारण आत्महत्या करने का प्रयास करते हैं।



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