{"_id":"d8e0c9fe3b919a982eea40f451526510","slug":"kuntia-strike-call-back","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुंटिया की हड़ताल वापस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुंटिया की हड़ताल वापस
कुरुक्षेत्र
Updated Wed, 09 Oct 2013 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र में केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) ने बुधवार रात को पेन-टूल डाउन हड़ताल को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। केयू प्रशासन के रुख और वीसी की ओर से प्रेसवार्ता में मानी गई मांगों के बाद कुंटिया ने यह निर्णय लिया।
इसकी पुष्टि केयू के डीपीआर डॉ.बृजेश साहनी और कुंटिया अध्यक्ष मान सिंह ने की है। मान सिंह के बताया कि वीरवार को वह कुंटिया सदस्यों की बैठक बुलाकर सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा करेंगे।
इससे पहले केयू के वीसी डॉ.डीडीएस संधू ने कहा है कि कुंटिया की मांगों को लेकर गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को 10 बार लिखित और छह बार मौखिक रूप से निमंत्रण भेजकर बातचीत के लिए बुलाया जा चुका है। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यूनियन की तरफ से बातचीत के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ।
विज्ञापन
डॉ.संधू ने बुधवार को केयू फैकल्टी लॉंज में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को कुंटिया की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन एवं इनकी मांगों के बारे में जानकारी दे रहे थे।
वीसी ने कहा कि कुंटिया का सदस्यता शुल्क कर्मचारियों के वेतन से काटने संबंधी मांग पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कानूनी राय ली है। यह शुल्क उन्हीं कर्मचारियों के वेतन में से काटा जा सकता है जो इसके बारे में लिखित रूप से प्रशासन को सहमति देंगे।
डॉ.संधू ने बताया कि कानूनी तौर पर कर्मचारी संघ कोई सरकारी एजेंसी नहीं है, इसलिए बिना कर्मचारियों के लिखित सहमति के कोई भी पैसा नहीं काटा जा सकता। वीसी के मुताबिक पिछले 56 साल से कर्मचारी संघ अपना चंदा रसीद कटवाकर इकट्ठा कर रहे हैं जो कि अब भी किया जा सकता है।
बिना मैट्रिक पास नहीं कर सकते पदोन्नति
डॉ.संधू ने बताया कि कुंटिया की मांग है कि लाइब्रेरी में कार्यरत जोगिंद्र सिंह की पदोन्नति की जाए, जबकि केयू प्रशासन ने यह स्पष्ट कर चुका है कि जोगिंद्र सिंह मैट्रिक पास नहीं है। वर्ष 2010 के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन योग्यता के अनुरूप ही पदोन्नति कर रहा है।
सहायकों की 3600-3200 ग्रेड पे के बारे में वीसी ने बताया कि यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है, इसलिए केयू प्रशासन अब सहायकों को बिना आडिट के सेलरी देने में असमर्थ है। उन्होंने यह भी साफ किया कि गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के आंतरिक मामलों में प्रशासन का कोई हाथ नहीं है।
अगर कर्मचारियों का कोई समूह अलग से संगठन बनाना चाहता है तो देश के संविधान के अनुसार उसे इस बात की पूर्ण स्वतंत्रता है। खाली पड़े गैर शिक्षक कर्मचारियों के पदों को भरने के बारे में बताया कि इन पदों को जल्द ही नई आरक्षण नीति के तहत भरा जाएगा।
ये मांगें मान ली गई हैं
वीसी ने बताया कि कुंटिया की मांग है कि परीक्षा शाखा में एक सैट पर 10 हजार से अधिक फार्म नहीं होने चाहिए, जिसे 24 सितंबर को मान लिया गया था। टेक्निकल एवं लैब स्टाफ के पारिश्रमिक को बढ़ाने का प्रस्ताव मान लिया गया है। इसे आगामी कार्यकारिणी परिषद की बैठक में रखा जाएगा।
सहायक कुलसचिव की दो ओपन पोस्ट के स्थान पर दो पदोन्नतियां पहले से कार्यरत कर्मचारियों को देने के बारे में निर्देश कर दिए गए हैं। बिना लाभ व हानि के पैट्रन पर एक वर्ष के लिए कर्मचारियों के लिए कैंटीन स्थापित करने की मांग मान ली गई है। एच टाइप, सी व सी वन टाइप घरों में स्ट्रीट लाइट लगवा दी गई है। प्रेस के नजदीक स्कूटर, कार पार्किंग के लिए स्थान बनाने के लिए आदेश दे दिए गए हैं।
विज्ञापन
इसकी पुष्टि केयू के डीपीआर डॉ.बृजेश साहनी और कुंटिया अध्यक्ष मान सिंह ने की है। मान सिंह के बताया कि वीरवार को वह कुंटिया सदस्यों की बैठक बुलाकर सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा करेंगे।
विज्ञापन
इससे पहले केयू के वीसी डॉ.डीडीएस संधू ने कहा है कि कुंटिया की मांगों को लेकर गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को 10 बार लिखित और छह बार मौखिक रूप से निमंत्रण भेजकर बातचीत के लिए बुलाया जा चुका है। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यूनियन की तरफ से बातचीत के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ।
विज्ञापन
डॉ.संधू ने बुधवार को केयू फैकल्टी लॉंज में प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को कुंटिया की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन एवं इनकी मांगों के बारे में जानकारी दे रहे थे।
वीसी ने कहा कि कुंटिया का सदस्यता शुल्क कर्मचारियों के वेतन से काटने संबंधी मांग पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कानूनी राय ली है। यह शुल्क उन्हीं कर्मचारियों के वेतन में से काटा जा सकता है जो इसके बारे में लिखित रूप से प्रशासन को सहमति देंगे।
डॉ.संधू ने बताया कि कानूनी तौर पर कर्मचारी संघ कोई सरकारी एजेंसी नहीं है, इसलिए बिना कर्मचारियों के लिखित सहमति के कोई भी पैसा नहीं काटा जा सकता। वीसी के मुताबिक पिछले 56 साल से कर्मचारी संघ अपना चंदा रसीद कटवाकर इकट्ठा कर रहे हैं जो कि अब भी किया जा सकता है।
बिना मैट्रिक पास नहीं कर सकते पदोन्नति
डॉ.संधू ने बताया कि कुंटिया की मांग है कि लाइब्रेरी में कार्यरत जोगिंद्र सिंह की पदोन्नति की जाए, जबकि केयू प्रशासन ने यह स्पष्ट कर चुका है कि जोगिंद्र सिंह मैट्रिक पास नहीं है। वर्ष 2010 के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन योग्यता के अनुरूप ही पदोन्नति कर रहा है।
सहायकों की 3600-3200 ग्रेड पे के बारे में वीसी ने बताया कि यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है, इसलिए केयू प्रशासन अब सहायकों को बिना आडिट के सेलरी देने में असमर्थ है। उन्होंने यह भी साफ किया कि गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के आंतरिक मामलों में प्रशासन का कोई हाथ नहीं है।
अगर कर्मचारियों का कोई समूह अलग से संगठन बनाना चाहता है तो देश के संविधान के अनुसार उसे इस बात की पूर्ण स्वतंत्रता है। खाली पड़े गैर शिक्षक कर्मचारियों के पदों को भरने के बारे में बताया कि इन पदों को जल्द ही नई आरक्षण नीति के तहत भरा जाएगा।
ये मांगें मान ली गई हैं
वीसी ने बताया कि कुंटिया की मांग है कि परीक्षा शाखा में एक सैट पर 10 हजार से अधिक फार्म नहीं होने चाहिए, जिसे 24 सितंबर को मान लिया गया था। टेक्निकल एवं लैब स्टाफ के पारिश्रमिक को बढ़ाने का प्रस्ताव मान लिया गया है। इसे आगामी कार्यकारिणी परिषद की बैठक में रखा जाएगा।
सहायक कुलसचिव की दो ओपन पोस्ट के स्थान पर दो पदोन्नतियां पहले से कार्यरत कर्मचारियों को देने के बारे में निर्देश कर दिए गए हैं। बिना लाभ व हानि के पैट्रन पर एक वर्ष के लिए कर्मचारियों के लिए कैंटीन स्थापित करने की मांग मान ली गई है। एच टाइप, सी व सी वन टाइप घरों में स्ट्रीट लाइट लगवा दी गई है। प्रेस के नजदीक स्कूटर, कार पार्किंग के लिए स्थान बनाने के लिए आदेश दे दिए गए हैं।