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केयू निर्माण शाखा के एक्सईएन बर्खास्त
कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 14 Nov 2013 11:42 PM IST
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केयू निर्माण शाखा के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अशोक मलिक को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वीरवार को बर्खास्त कर दिया।
दरअसल, अशोक मलिक को वर्ष 2009 में इस पद पर नियुक्त किया था, जबकि इस पद के लिए उनकी योग्ताएं पूरी नहीं थी।
मलिक को बर्खास्त करने के आदेश केयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीडीएस संधू ने दिए हैं।
इसके साथ ही अशोक मलिक को तीन माह का वेतन एक लाख 58 हजार 208 रुपये का ड्राफ्ट भी संलग्न करके भेजा गया है। इस बात की पुष्टि केयू के रजिस्ट्रार डॉ. केसी रल्हाण ने की है।
गौरतलब है कि अमर उजाला ने बीस मई 2012, 27 मई 2012, 29 मई 2012 और दो जून 2012 को केयू निर्माण शाखा में की अनियमितताओं, घोटाले और अशोक मलिक की नियुक्ति का मामला प्रमुखता से उजागर किया था।
इस बारे में खबरें प्रकाशित होने के बाद अक्तूबर 2013 में संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की गई थी और एक्सईएन अशोक मलिक की नियुक्ति की जांच रिपोर्ट एग्जीक्यूटिव काउंसिल के समक्ष पेश की गई थी।
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रिपोर्ट में जांच कमेटी ने स्पष्ट किया है कि एक्सईएन अशोक मलिक की अयोग्यता की शिकायत पर जांच की गई। इस जांच में विज्ञापन संख्या-1-2008 के तहत जो नियुक्ति हुई थी, उसकी पड़ताल करने पर जांच कमेटी को ऐसे प्रमाण मिले हैं कि एक्सईएन अशोक मलिक की योग्यताएं पद के लिए मांगी गई योग्ताओं से कम थी।
जांच कमेटी के अनुसार इस पद के लिए योग्य पात्र के पास 10 वर्ष डिवीजनल इंजीनियर का अनुभव होना आवश्यक था, लेकिन मलिक के पास यह योग्यता नहीं थी। जांच कमेटी ने पड़ताल के बाद पूरी रिपोर्ट यूनिवर्सिटी की सुप्रीम बॉडी केयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के समक्ष रखी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर तुरंत मलिक को बर्खास्त कर दिया गया।
बेड घोटाले पर गत माह पेश किए तथ्य
नौ अक्तूबर 2013 को जांच कमेटी के समक्ष बेड घोटाले संबंधित तथ्यों की जांच के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी को बुलाया गया था।
जांच कमेटी के समक्ष निर्माण शाखा के अधिकारी बिजेंद्र सिंह ने बेड और अलमारी घोटाले की बात रखी थी। इस अधिकारी ने अशोक मलिक की घोटाले में भूमिका पर न केवल 12 सवाल खड़े किए थे, बल्कि मलिक से इन 12 सवालों का जवाब तलब करने के लिए भी कहा था।
निर्माण शाखा में हुए घोटाले
-अलमारी निर्माण में 92 हजार का घोटाला।
-चारपाई खरीद में छह लाख 49 हजार 900 का घपला।
- डाइनिंग टेबल खरीद में 44 हजार 660 रुपये का गड़बड़झाला
-स्टडी टेबल खरीद में दो लाख 42 हजार 312 रुपये की गड़बड़ी।
-सोफा सेट खरीद में 31 हजार 375 रुपये का गोलमाल।
-विजिटिंग चेयर खरीद में 75 हजार 350 रुपये का घोटाला
-दीवार पर टांगने वाले रेकों में चार लाख 83 हजार 160 रुपये का गोलमाल।
इन सात मामलों के अलावा केयू निर्माण शाखा के ही एक अधिकारी बिजेंद्र सिंह ने ऐसे 16 चीजें बताईं जिनमें घोटाला हुआ था।
नियुक्ति के बाद ही शुरू हो गई थीं शिकायतें
अशोक मलिक की नियुक्ति 18 फरवरी 2009 को हुई थी। नियुक्ति के महज सात माह बाद ही मलिक की शिकायत पंद्रह सितंबर 2009 को वीसी और रजिस्ट्रार तक पहुंच गई थी। इस शिकायत में अशोक मलिक पर उनकी ही शाखा के एक अधिकारी ने पुरानी तारीखों में काम अलाट करने का आरोप लगाया था। मलिक पर आरोप था कि नया सत्र शुरू होने के बावजूद उन्होंने पिछले वित्त वर्ष में एक सरकारी ठेकेदार को गर्ल्स हास्टल नंबर-11 में ग्रिल लगाने का काम अलॉट किया। मामले की जांच अभी भी जारी है।
मलिक के समर्थन में वीसी से मिली कुंटिया
कुंटिया अध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्य मलिक के टर्मिनेशन को रद्द करने की मांग के लिए वीसी से मिले। कुंटिया अध्यक्ष मान सिंह ने बताया कि इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। मान सिंह ने कहा कि केयू प्रशासन को कुंटिया ने एक सप्ताह का समय दिया है। अगर प्रशासन ने आदेश रद्द नहीं किए तो संघर्ष किया जाएगा।
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दरअसल, अशोक मलिक को वर्ष 2009 में इस पद पर नियुक्त किया था, जबकि इस पद के लिए उनकी योग्ताएं पूरी नहीं थी।
मलिक को बर्खास्त करने के आदेश केयू के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीडीएस संधू ने दिए हैं।
इसके साथ ही अशोक मलिक को तीन माह का वेतन एक लाख 58 हजार 208 रुपये का ड्राफ्ट भी संलग्न करके भेजा गया है। इस बात की पुष्टि केयू के रजिस्ट्रार डॉ. केसी रल्हाण ने की है।
गौरतलब है कि अमर उजाला ने बीस मई 2012, 27 मई 2012, 29 मई 2012 और दो जून 2012 को केयू निर्माण शाखा में की अनियमितताओं, घोटाले और अशोक मलिक की नियुक्ति का मामला प्रमुखता से उजागर किया था।
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इस बारे में खबरें प्रकाशित होने के बाद अक्तूबर 2013 में संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की गई थी और एक्सईएन अशोक मलिक की नियुक्ति की जांच रिपोर्ट एग्जीक्यूटिव काउंसिल के समक्ष पेश की गई थी।
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रिपोर्ट में जांच कमेटी ने स्पष्ट किया है कि एक्सईएन अशोक मलिक की अयोग्यता की शिकायत पर जांच की गई। इस जांच में विज्ञापन संख्या-1-2008 के तहत जो नियुक्ति हुई थी, उसकी पड़ताल करने पर जांच कमेटी को ऐसे प्रमाण मिले हैं कि एक्सईएन अशोक मलिक की योग्यताएं पद के लिए मांगी गई योग्ताओं से कम थी।
जांच कमेटी के अनुसार इस पद के लिए योग्य पात्र के पास 10 वर्ष डिवीजनल इंजीनियर का अनुभव होना आवश्यक था, लेकिन मलिक के पास यह योग्यता नहीं थी। जांच कमेटी ने पड़ताल के बाद पूरी रिपोर्ट यूनिवर्सिटी की सुप्रीम बॉडी केयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के समक्ष रखी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर तुरंत मलिक को बर्खास्त कर दिया गया।
बेड घोटाले पर गत माह पेश किए तथ्य
नौ अक्तूबर 2013 को जांच कमेटी के समक्ष बेड घोटाले संबंधित तथ्यों की जांच के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी को बुलाया गया था।
जांच कमेटी के समक्ष निर्माण शाखा के अधिकारी बिजेंद्र सिंह ने बेड और अलमारी घोटाले की बात रखी थी। इस अधिकारी ने अशोक मलिक की घोटाले में भूमिका पर न केवल 12 सवाल खड़े किए थे, बल्कि मलिक से इन 12 सवालों का जवाब तलब करने के लिए भी कहा था।
निर्माण शाखा में हुए घोटाले
-अलमारी निर्माण में 92 हजार का घोटाला।
-चारपाई खरीद में छह लाख 49 हजार 900 का घपला।
- डाइनिंग टेबल खरीद में 44 हजार 660 रुपये का गड़बड़झाला
-स्टडी टेबल खरीद में दो लाख 42 हजार 312 रुपये की गड़बड़ी।
-सोफा सेट खरीद में 31 हजार 375 रुपये का गोलमाल।
-विजिटिंग चेयर खरीद में 75 हजार 350 रुपये का घोटाला
-दीवार पर टांगने वाले रेकों में चार लाख 83 हजार 160 रुपये का गोलमाल।
इन सात मामलों के अलावा केयू निर्माण शाखा के ही एक अधिकारी बिजेंद्र सिंह ने ऐसे 16 चीजें बताईं जिनमें घोटाला हुआ था।
नियुक्ति के बाद ही शुरू हो गई थीं शिकायतें
अशोक मलिक की नियुक्ति 18 फरवरी 2009 को हुई थी। नियुक्ति के महज सात माह बाद ही मलिक की शिकायत पंद्रह सितंबर 2009 को वीसी और रजिस्ट्रार तक पहुंच गई थी। इस शिकायत में अशोक मलिक पर उनकी ही शाखा के एक अधिकारी ने पुरानी तारीखों में काम अलाट करने का आरोप लगाया था। मलिक पर आरोप था कि नया सत्र शुरू होने के बावजूद उन्होंने पिछले वित्त वर्ष में एक सरकारी ठेकेदार को गर्ल्स हास्टल नंबर-11 में ग्रिल लगाने का काम अलॉट किया। मामले की जांच अभी भी जारी है।
मलिक के समर्थन में वीसी से मिली कुंटिया
कुंटिया अध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्य मलिक के टर्मिनेशन को रद्द करने की मांग के लिए वीसी से मिले। कुंटिया अध्यक्ष मान सिंह ने बताया कि इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। मान सिंह ने कहा कि केयू प्रशासन को कुंटिया ने एक सप्ताह का समय दिया है। अगर प्रशासन ने आदेश रद्द नहीं किए तो संघर्ष किया जाएगा।