{"_id":"5ddc3eb98ebc3e54c20b8bc6","slug":"karnal-rise-mil-karnal-news-knl12958597","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई मिलों में बंद पड़ी मिली मशीनरी, स्टाक कहीं कम तो कहीं मिला ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई मिलों में बंद पड़ी मिली मशीनरी, स्टाक कहीं कम तो कहीं मिला ज्यादा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टाक को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से कराई जा रही फिजिकल वेरिफिकेशन में कई राइस मिलों के राज खुलने की संभावना जताई जा रही है। चेकिंग के दौरान मिलों में खामियां सामने आ रही हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जिन्होंने हजारों क्विंटल का स्टाक लिया हुआ है, लेकिन उनकी मशीनरी काफी समय से बंद पड़ी हैै। इसके अलावा, कई मिलों में स्टाक कम और कई में ज्यादा मिला है। सूत्रों का दावा है कि फाइनल रिपोर्ट में करनाल के कई राइस मिलों की भूमिका संदिग्ध मिल सकती है। इसको लेकर राइस मिलर्स में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
बता दें कि धान घोटाले के आरोप लगने के बाद सरकार द्वारा राइस मिलों की वेरिफिकेशन की जा रही है। जिलेभर में 316 राइस मिल हैं। इनकी जांच के लिए जिलाधीश के आदेश के बाद 30 कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटियां अलग अलग जोन में मिलों की जांच कर रही हैं। अभी तक 100 मिलों की जांच की जा चुकी है। सूत्रों का दावा है कि जांच के लिए कई मिलों में मशीनरी बंद मिली है। ऐसे में आशंका है मिल काफी दिनों से बंद पड़े हैं और उनको बिना जांच किए ही धान अलाट कर दी गई। इतना ही नहीं कई मिलों में तो इससे भी ज्यादा खामियां मिली हैं। कई स्थानों पर एक ही राइस मिल को कागजों में दो अलग अलग नामों से दिखाया गया है और दो मिलों के नाम पर धान अलाट कराया गया है। जांच में ये चीजें सामने आने के बाद से मिलर्स में हड़कंप मच गया है और वे किसी भी प्रकार से पीवी रिपोर्ट को अपने पक्ष में कराने की कोशिश कर रहे हैं। जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जांच के दौरान मिलों में खामियां सामने आ रही हैं। केवल स्टाक कम और ज्यादा ही नहीं मिलों में नियमों के मुताबिक चीजें नहीं मिल रही हैं और इनका रिपोर्ट अंकित किया जा रहा है। क्योंकि रिपोर्ट सीधे सीएम मनोहर लाल के पास जानी है, ऐसे में अधिकारी भी किसी प्रकार का रिस्क लेने की स्थिति में नहीं हैं।
जांच पर इसलिए उठ रहे सवाल
पीवी की जांच पर भाकियू शुरू से ही सवाल उठा रही है। पहला तो ये कि इसमें तकनीकी अधिकारियों की बजाए अन्य विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। दूसरा, डीएफएससी द्वारा जांच टीमों को केवल मिलों को अलाट किए गए कुल धान का रिकार्ड दिया गया है, अलग अलग पैडी का नहीं है। जबकि सीजन में कामन और ग्रेड ए धान अलग अलग रेट पर खरीदा गया है। ऐसे में आशंका है कि मिलर्स खुद के लिए खरीदी गई धान को भी सरकारी में काउंट करा रहे हैं। वहीं, इस टीम में भाकियू और पुलिस टीम को शामिल नहीं किया गया, साथ ही न ही इसकी वीडियोग्राफी कराई जा रही है।
विज्ञापन
एक सप्ताह का और लगेगा समय
जिले में कुल 316 राइस मिल हैं। प्रतिदिन 30 टीमें 30 से 35 मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कर पा रही हैं। ऐसे में अब तक केवल 100 मिलों की ही जांच हो पाई है। डीएफएससी अनिल कुमार का कहना है कि अभी कम से कम एक सप्ताह और चेकिंग में लगेगा। फिलहाल रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
रिपोर्ट की जाए सार्वजनिक : मान
इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रत्न मान का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से केवल खानापूर्ति की जा रही है। फिजिकल वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारियों पर मिलर्स को क्लीनचिट देने का दवाब बनाया जा रहा है। इस प्रकार से कभी भी धान घोटाला सामने नहीं आ सकता और इससे किसानों को कभी भी न्याय नहीं मिल सकेगा। भाकियू गलत तरीके से की जा रही पीवी का विरोध करती है और मांग करती है कि इनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
विज्ञापन
बता दें कि धान घोटाले के आरोप लगने के बाद सरकार द्वारा राइस मिलों की वेरिफिकेशन की जा रही है। जिलेभर में 316 राइस मिल हैं। इनकी जांच के लिए जिलाधीश के आदेश के बाद 30 कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटियां अलग अलग जोन में मिलों की जांच कर रही हैं। अभी तक 100 मिलों की जांच की जा चुकी है। सूत्रों का दावा है कि जांच के लिए कई मिलों में मशीनरी बंद मिली है। ऐसे में आशंका है मिल काफी दिनों से बंद पड़े हैं और उनको बिना जांच किए ही धान अलाट कर दी गई। इतना ही नहीं कई मिलों में तो इससे भी ज्यादा खामियां मिली हैं। कई स्थानों पर एक ही राइस मिल को कागजों में दो अलग अलग नामों से दिखाया गया है और दो मिलों के नाम पर धान अलाट कराया गया है। जांच में ये चीजें सामने आने के बाद से मिलर्स में हड़कंप मच गया है और वे किसी भी प्रकार से पीवी रिपोर्ट को अपने पक्ष में कराने की कोशिश कर रहे हैं। जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जांच के दौरान मिलों में खामियां सामने आ रही हैं। केवल स्टाक कम और ज्यादा ही नहीं मिलों में नियमों के मुताबिक चीजें नहीं मिल रही हैं और इनका रिपोर्ट अंकित किया जा रहा है। क्योंकि रिपोर्ट सीधे सीएम मनोहर लाल के पास जानी है, ऐसे में अधिकारी भी किसी प्रकार का रिस्क लेने की स्थिति में नहीं हैं।
विज्ञापन
जांच पर इसलिए उठ रहे सवाल
पीवी की जांच पर भाकियू शुरू से ही सवाल उठा रही है। पहला तो ये कि इसमें तकनीकी अधिकारियों की बजाए अन्य विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया है। दूसरा, डीएफएससी द्वारा जांच टीमों को केवल मिलों को अलाट किए गए कुल धान का रिकार्ड दिया गया है, अलग अलग पैडी का नहीं है। जबकि सीजन में कामन और ग्रेड ए धान अलग अलग रेट पर खरीदा गया है। ऐसे में आशंका है कि मिलर्स खुद के लिए खरीदी गई धान को भी सरकारी में काउंट करा रहे हैं। वहीं, इस टीम में भाकियू और पुलिस टीम को शामिल नहीं किया गया, साथ ही न ही इसकी वीडियोग्राफी कराई जा रही है।
विज्ञापन
एक सप्ताह का और लगेगा समय
जिले में कुल 316 राइस मिल हैं। प्रतिदिन 30 टीमें 30 से 35 मिलों की फिजिकल वेरिफिकेशन कर पा रही हैं। ऐसे में अब तक केवल 100 मिलों की ही जांच हो पाई है। डीएफएससी अनिल कुमार का कहना है कि अभी कम से कम एक सप्ताह और चेकिंग में लगेगा। फिलहाल रिपोर्ट के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
रिपोर्ट की जाए सार्वजनिक : मान
इस बारे में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रत्न मान का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से केवल खानापूर्ति की जा रही है। फिजिकल वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारियों पर मिलर्स को क्लीनचिट देने का दवाब बनाया जा रहा है। इस प्रकार से कभी भी धान घोटाला सामने नहीं आ सकता और इससे किसानों को कभी भी न्याय नहीं मिल सकेगा। भाकियू गलत तरीके से की जा रही पीवी का विरोध करती है और मांग करती है कि इनकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।