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पति पर्ची के लिए भटका, बेंच पर डिलीवरी
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Wed, 23 Jul 2014 12:26 AM IST
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मंगलवार सुबह इंसानियत शर्मशार हुई।
डॉक्टर से लेकर नर्सों की लापरवाही के कारण काछवा स्थित पाल नगर की सात महीने की गर्भवती महिला को ट्रामा सेंटर के सामने और सिटी स्कैन के साइड में खुले में बच्चे को जन्म देना पड़ा।
इस ओपन डिलीवरी को लोग खड़े देखते रहे, लेकिन अस्पताल के किसी भी डॉक्टर या नर्स ने सुध नहीं ली। बच्चे के जन्म के दस मिनट बाद जच्चा और बच्चा को वार्ड में ले जाया गया। जहां दोनों स्वस्थ हैं।
पूरे दो घंटे तक मेडिकल कॉलेज में महिला तड़पती रही। सुबह सात बजे महिला आई और नौ बजकर दस मिनट पर बच्चे का जन्म हुआ। नौ बजकर 17 मिनट पर महिला और बच्चे को दाखिल कर लिया गया।
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मंगलवार सुबह सात बजे काछवा स्थित पाल नगर निवासी मनोज पत्नी को बाइक पर लेकर आया। मनोज ने महिला को बैंच पर लेटाकर ट्रामा सेंटर पहुंचा और समस्या बताई।
डॉक्टरों ने उसको पर्ची लेकर आने को कहा और उसके बाद इलाज की बात कहीं। महिला सात महीने की गर्भवती थी, इसलिए डॉक्टरों ने केस को गंभीरता से नहीं लिया।
मेडिकल कॉलेज में आठ बजे पर्ची कटनी शुरू होती है और तब तक मरीजों की लंबी लाइन लग जाती है। वह पर्ची कटवाने के लिए लाइन में ही था।
नौ बजकर दस मिनट पर महिला ने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान दर्द से तड़पती महिला को शिव कालोनी निवासी दर्शना ने देखा तो तुरंत उसने दाई की भूमिका निभाई।
ओपन डिलीवरी ने अकेली महिला ने बच्चे को जन्म दिलवा दिया। इस स्थिति में महिला का पति मनोज हालत को कोसता रहा और बेचैन रहा। दाई की भूमिका निभा रही दर्शना ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
नर्स को मना कर दिया बच्चा देने से
जब मेडिकल कालेज की नर्सों को पता चला कि ओपन में डिलीवरी हो गई तो अफरातफरी मच गई।
ट्रामा सेंटर के सामने से स्टाफ नर्स कांता के साथ कई नर्स आई और उनको वार्ड में ले जाने लगी। इस पर मनोज ने आपत्ति जताई और उन्हें रोक दिया।
अपने हाथों में कपड़े में लपेटे खड़ा मनोज ने बच्चे को भी उनको देने से मना कर दिया। लोगों के समझाने के बाद मनोज ने पत्नी और बच्चे को जच्चा-बच्चा विभाग में जाने दिया।
मनोज ने कहा कि ऐसी स्थिति है अस्पतालों की। आग लगा देनी चाहिए ऐसे अस्पतालों को। जहां मरीज आने के बाद भी इलाज को तरसते हैं।
दस साल के बाद निभाई दाई की भूमिका
शिव कॉलोनी वासी दर्शना ने मंगवार को जो डिलीवरी कराई उसके लिए सभी लोगों ने उसकी प्रशंसा की। दर्शना ने बताया कि वह दस साल पहले दाई का काम करती थी। मंगलवार को वह दवा लेेन आई थी। देखा तो महिला को आधे से ज्यादा बच्चा बाहर आया हुआ था। उसने तुरंत दाई की भूमिका निभाकर महिला की डिलीवरी कराई।
सिर से उतारकर दिया परना
बच्चे के जन्म लेने के बाद उसके पिता मनोज ने उसको बाहों में लिया और उसको साफ करने के लिए कपड़ा तक नहीं था। एक मरीज ने अपने सिर से परना उतारकर मनोज को दिया। लोगों ने कहा कि यहां पर डॉक्टर नहीं कसाई हैं, जिनमें इंसानियत एक प्रतिशत भी नहीं है।
इंफेक्शन का भी था खतरा
महिला रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि आसमान में बादल थे, हवा चल रही थी और खुले आसमान के नीचे डिलीवरी के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों को इंफेक्शन का खतरा हो जाता है। जन्म देने के बाद महिला का शरीर कमजोर हो जाता है और वह मामूली से इंफेक्शन को सहन नहीं कर पाती। इस स्थिति में जच्चा-बच्चा की मौत हो जाती है। दूसरी ओर डा. सुरेंद्र कुमार कश्यप का कहना है कि ओपन डिलीवरी होना बड़ी बात नहीं है। पूरे केस की रिपोर्ट मांग ली, जांच कर रहे हैं।
पांच सौ रुपये में की एडमिट कराने की बात
मनोज ने मेडिकल कालेज के अधिकारियों को बताया कि उससे पांच सौ रुपये एक पुलिसकर्मी ने मांगे और अस्पताल में एडमिट कराने का दावा करने लगा। पैसे के अभाव में वह पांच रुपये की पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगा। इस तरह पैसे मांगने और अस्पताल में महिला के पति को गुमराह करने के चक्कर में सुरक्षाकर्मी पर अधिकारियों का शक है।
जांच की है, महिला नहीं गई डॉक्टर तक
मेडिकल कालेज के डिप्टी अधीक्षक डा. योगेश बताते हैं कि ट्रामा सेंटर में ड्यूटी दे रहे डॉक्टर और लेबर से बात की है। इस तरह का केस उनके पास नहीं गया है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल लिए गए हैं। हो सकता है कि महिला का पति अकेला गया हो और वह डॉक्टरों को सिर्फ सात महीने की गर्भवती की बात कहकर चेकअप के लिए कहता हो।
ट्रामा सेंटर में चेकअप करने के लिए पर्ची लेनी पड़ती है। जच्चा-बच्चा विभाग में इस तरह के केस में पर्ची की आवश्यकता नहीं पड़ती।
वह बाइक पर आया और आते ही ट्रामा सेंटर के बाहर बेंच पर महिला को लेटा दिया। इसमें मेडिकल कालेज की ओर से कोई गलती नहीं है।
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डॉक्टर से लेकर नर्सों की लापरवाही के कारण काछवा स्थित पाल नगर की सात महीने की गर्भवती महिला को ट्रामा सेंटर के सामने और सिटी स्कैन के साइड में खुले में बच्चे को जन्म देना पड़ा।
इस ओपन डिलीवरी को लोग खड़े देखते रहे, लेकिन अस्पताल के किसी भी डॉक्टर या नर्स ने सुध नहीं ली। बच्चे के जन्म के दस मिनट बाद जच्चा और बच्चा को वार्ड में ले जाया गया। जहां दोनों स्वस्थ हैं।
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पूरे दो घंटे तक मेडिकल कॉलेज में महिला तड़पती रही। सुबह सात बजे महिला आई और नौ बजकर दस मिनट पर बच्चे का जन्म हुआ। नौ बजकर 17 मिनट पर महिला और बच्चे को दाखिल कर लिया गया।
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मंगलवार सुबह सात बजे काछवा स्थित पाल नगर निवासी मनोज पत्नी को बाइक पर लेकर आया। मनोज ने महिला को बैंच पर लेटाकर ट्रामा सेंटर पहुंचा और समस्या बताई।
डॉक्टरों ने उसको पर्ची लेकर आने को कहा और उसके बाद इलाज की बात कहीं। महिला सात महीने की गर्भवती थी, इसलिए डॉक्टरों ने केस को गंभीरता से नहीं लिया।
मेडिकल कॉलेज में आठ बजे पर्ची कटनी शुरू होती है और तब तक मरीजों की लंबी लाइन लग जाती है। वह पर्ची कटवाने के लिए लाइन में ही था।
नौ बजकर दस मिनट पर महिला ने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान दर्द से तड़पती महिला को शिव कालोनी निवासी दर्शना ने देखा तो तुरंत उसने दाई की भूमिका निभाई।
ओपन डिलीवरी ने अकेली महिला ने बच्चे को जन्म दिलवा दिया। इस स्थिति में महिला का पति मनोज हालत को कोसता रहा और बेचैन रहा। दाई की भूमिका निभा रही दर्शना ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
नर्स को मना कर दिया बच्चा देने से
जब मेडिकल कालेज की नर्सों को पता चला कि ओपन में डिलीवरी हो गई तो अफरातफरी मच गई।
ट्रामा सेंटर के सामने से स्टाफ नर्स कांता के साथ कई नर्स आई और उनको वार्ड में ले जाने लगी। इस पर मनोज ने आपत्ति जताई और उन्हें रोक दिया।
अपने हाथों में कपड़े में लपेटे खड़ा मनोज ने बच्चे को भी उनको देने से मना कर दिया। लोगों के समझाने के बाद मनोज ने पत्नी और बच्चे को जच्चा-बच्चा विभाग में जाने दिया।
मनोज ने कहा कि ऐसी स्थिति है अस्पतालों की। आग लगा देनी चाहिए ऐसे अस्पतालों को। जहां मरीज आने के बाद भी इलाज को तरसते हैं।
दस साल के बाद निभाई दाई की भूमिका
शिव कॉलोनी वासी दर्शना ने मंगवार को जो डिलीवरी कराई उसके लिए सभी लोगों ने उसकी प्रशंसा की। दर्शना ने बताया कि वह दस साल पहले दाई का काम करती थी। मंगलवार को वह दवा लेेन आई थी। देखा तो महिला को आधे से ज्यादा बच्चा बाहर आया हुआ था। उसने तुरंत दाई की भूमिका निभाकर महिला की डिलीवरी कराई।
सिर से उतारकर दिया परना
बच्चे के जन्म लेने के बाद उसके पिता मनोज ने उसको बाहों में लिया और उसको साफ करने के लिए कपड़ा तक नहीं था। एक मरीज ने अपने सिर से परना उतारकर मनोज को दिया। लोगों ने कहा कि यहां पर डॉक्टर नहीं कसाई हैं, जिनमें इंसानियत एक प्रतिशत भी नहीं है।
इंफेक्शन का भी था खतरा
महिला रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि आसमान में बादल थे, हवा चल रही थी और खुले आसमान के नीचे डिलीवरी के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों को इंफेक्शन का खतरा हो जाता है। जन्म देने के बाद महिला का शरीर कमजोर हो जाता है और वह मामूली से इंफेक्शन को सहन नहीं कर पाती। इस स्थिति में जच्चा-बच्चा की मौत हो जाती है। दूसरी ओर डा. सुरेंद्र कुमार कश्यप का कहना है कि ओपन डिलीवरी होना बड़ी बात नहीं है। पूरे केस की रिपोर्ट मांग ली, जांच कर रहे हैं।
पांच सौ रुपये में की एडमिट कराने की बात
मनोज ने मेडिकल कालेज के अधिकारियों को बताया कि उससे पांच सौ रुपये एक पुलिसकर्मी ने मांगे और अस्पताल में एडमिट कराने का दावा करने लगा। पैसे के अभाव में वह पांच रुपये की पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगा। इस तरह पैसे मांगने और अस्पताल में महिला के पति को गुमराह करने के चक्कर में सुरक्षाकर्मी पर अधिकारियों का शक है।
जांच की है, महिला नहीं गई डॉक्टर तक
मेडिकल कालेज के डिप्टी अधीक्षक डा. योगेश बताते हैं कि ट्रामा सेंटर में ड्यूटी दे रहे डॉक्टर और लेबर से बात की है। इस तरह का केस उनके पास नहीं गया है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल लिए गए हैं। हो सकता है कि महिला का पति अकेला गया हो और वह डॉक्टरों को सिर्फ सात महीने की गर्भवती की बात कहकर चेकअप के लिए कहता हो।
ट्रामा सेंटर में चेकअप करने के लिए पर्ची लेनी पड़ती है। जच्चा-बच्चा विभाग में इस तरह के केस में पर्ची की आवश्यकता नहीं पड़ती।
वह बाइक पर आया और आते ही ट्रामा सेंटर के बाहर बेंच पर महिला को लेटा दिया। इसमें मेडिकल कालेज की ओर से कोई गलती नहीं है।