75 गज का प्लॉट और बिल 62 हजार
करनाल नगर निगम ने हाउस टैक्स की रिकवरी के लिए अब तक करीब 1.15 लाख उपभोक्ताओं को बिल भेजे हैं, लेकिन इनमें से करीब 60 प्रतिशत गलत हैं। इससे निगम के काउंटरों पर हाउस टैक्स जमा करवाने वालों से अधिक बिल ठीक करवाने वालों की भीड़ जुट रही है। वहीं इस बार भी निगम को पूरा टैक्स मिलने की उम्मीदें कम नजर आ रही हैं। बिलों में गड़बड़ी के लिए उपभोक्ता जहां निगम प्रशासन को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं, निगम ने बिलों में गड़बड़ी का ठीकरा उपभोक्ताओं के सिर पर ही फोड़ा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं की ओर से सेल्फ सर्वे में प्रॉपर्टी का गलत ब्योरा दिया है। इसकी वजह से बिलों में गड़बड़ी हुई है।
हजारों के बिल देख उपभोक्ताओं के होश उड़े
उपभोक्ताओं को भेजे गए बिलों में पिछले वर्षों में जमा हुए टैक्स की कटौती नहीं की है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सैकड़ों के बिलों की बजाय हजारों रुपये के बिल भेजे हैं। हाउस टैक्स के भारी भरकम बिलों को देख उपभोक्ताओं के होश उड़ गए हैं। उपभोक्ता अब बिल ठीक करवाने के लिए निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं। बिलों को ठीक करने के लिए भी निगम अधिकारी उनसे जमीन का पूरा रिकॉर्ड व पुराने बिलों की रसीदें तलब रहे हैं। जिनके पास ये सभी कागजात नहीं है, उनके लिए बिलों में किसी प्रकार की रियायत मिलने के कोई आसार नहीं है। ऐसे में बर्षों से हजारों रुपये के बिलों का भुगतान कर चुके उपभोक्ता फिर से बिल जमा करवाने को तैयार नही हैं। इससे उपभोक्ताओं व निगम अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हो रही है। वीरवार को बिल ठीक करवाने आए कुछ उपभोक्ताओं ने निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए प्रदर्शन भी किया है।
बिल ठीक करवाने निगम कार्यालय पहुंचे रामकिशन ने बताया कि उसका घर सदर बाजार में है। इसका क्षेत्रफल 75 वर्ग गज है। निगम ने उसका एक साल का हाउस टैक्स 62 हजार रुपये भेजा है। इसे ठीक करवाने के लिए कई दिनों से निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा इसका बिल 62 से 65 के आसपास आना चाहिए। सेक्टर-3 निवासी ईश कुमार ने बताया कि निगम ने उसके रेसिडेंशियल प्लॉट को कमर्शियल दिखाकर 52 हजार रुपये का हाउस टैक्स बिल भेजा है। जबकि रेसिडेंशियल स्लैब के मुताबिक उसका हाउस टैक्स चार से साढ़े चार हजार रुपये बनता है। अब निगम अधिकारी बिलों को ठीक करवाने के लिए पुरानी रसीदें लेकर आने की बात कह रहे हैं। उसका कहना है कि वह पिछले कई सालों से निगम के पास जो टैक्स जमा करवा रहे हैं, उसका कोई भी रिकार्ड नहीं है। यह समस्या केवल इन दो लोगों की नहीं बल्कि 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं की है। जिन्हें निगम प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
अव्यवस्थित हुए प्रॉपर्टी के आंकड़े
नगर निगम ने उपभोक्ताओं को अपनी प्रॉपर्टी का सेल्फ सर्वे कर हाउस टैक्स के बिल जनरेट करने का मौका दिया था। उस दौरान लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी को कागजात में बढ़ाने के लिए गलत इंफॉरमेेशन अपडेट की थी। इसी वजह से बिलों में गड़बड़ी हुई है। इसके अलावा निगम ने शहर की प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड एक प्राइवेट एजेंसी से ऑनलाइन करवाया है। कंपनियों की कर्मियों की लापरवाही से भी प्रॉपर्टी के आंकड़े अव्यवस्थित हुए हैं। इसकी वजह से अब बिलों में गड़बड़ी हो रही है।
मिशन 27 करोड़ का लक्ष्य फेल होने के आसार
निगम की ओर से इस बार शहर में 1.35 लाख उपभोक्ताओं से 27 करोड़ रुपये के हाउस टैक्स की वसूली का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 1.15 लाख उपभोक्ताओं को हाउस टैक्स के बिल भेजे गए हैं। इनमें से करीब 60 प्रतिशत बिल गलत हैं। ऐसे में मिशन 27 करोड़ के लक्ष्य को पूरा होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
हाउस टैक्स की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन होने की चलते पुराने डेटा को अपडेट करने में कई जगह पर त्रुटियां हुई हैं। इस वजह से बिलों में गड़बड़ी हुई है। उपभोक्ता अपने पुराने बिल दिखाकर प्रॉपर्टी डिटेल व बिलों में गड़बड़ी ठीक करवा सकते हैं। इसके लिए निगम में अलग से तीन काउंटर भी लगाए गए हैं, ताकि लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।
- रेनू बाला गुप्ता, मेयर, नगर निगम