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पानी की सैंपलिंग नहीं, लोगों की सेहत खतरे में
करनाल
Updated Sun, 29 Sep 2013 12:11 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। विभाग की लापरवाही के कारण लोगों को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि अगस्त माह में स्वास्थ्य विभाग ने करीब 130 पंपों के पानी के नमूने ही नहीं लिए हैं, जबकि नियमानुसार हर माह पानी के नमूने लेना अनिवार्य है। विभाग के कर्मियों की लापरवाही पर सीएमओ ने प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों से जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि जल जनित रोगों को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य विभाग मिलकर पानी की सैंपलिंग करते हैं। स्वास्थ्य विभाग को हर माह हर सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूने जांच के लिए लेने होते हैं। इनकी जांच से यह पता किया जाता है कि लोगों को जो पानी की सप्लाई की जा रही है, वह पीने योग्य है या नहीं।
अगर पानी में किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो उसमें सुधार किया जाता है। वहीं, दूसरी ओर इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग के जेई महिंद्र सिंह और रवींद्र जांगड़ा का कहना है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के सभी ट्यूबवेलों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हुए है।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने स्तर पर पानी के नमूने जांच के लिए लेती रहती है। लेकिन उनका स्वास्थ्य विभाग के लोगों से कोई संपर्क नहीं रहता है। हालांकि सही मायने में सैंपलिंग लेने का कार्य स्वास्थ्य विभाग करता है।
यहां-यहां नहीं हुई सैंपलिंग
स्वास्थ्य विभाग का रिकार्ड बताता है कि अगस्त माह में विभाग की ओर से नीलोखेड़ी अस्पताल इलाके में आने वाले पूरे शहर और गांव, प्राथमिक उपचार केंद्र तरावड़ी, सग्गा, मधुबन, गगसीना, उपलाना, बड़ौता के तहत आने वाले गांव और शहरी इलाके के अलावा, करनाल अर्बन डिस्पेंसरी रामनगर और शिव कॉलोनी एरिया से पानी के नमूने लिए ही नहीं गए हैं। इन इलाकों में करीब 130 पंप पड़ते हैं।
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स्थिति यह है कि अगस्त माह में स्वास्थ्य विभाग ने करीब 130 पंपों के पानी के नमूने ही नहीं लिए हैं, जबकि नियमानुसार हर माह पानी के नमूने लेना अनिवार्य है। विभाग के कर्मियों की लापरवाही पर सीएमओ ने प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों से जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि जल जनित रोगों को रोकने के लिए जन स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य विभाग मिलकर पानी की सैंपलिंग करते हैं। स्वास्थ्य विभाग को हर माह हर सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूने जांच के लिए लेने होते हैं। इनकी जांच से यह पता किया जाता है कि लोगों को जो पानी की सप्लाई की जा रही है, वह पीने योग्य है या नहीं।
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अगर पानी में किसी तरह की गड़बड़ी होती है, तो उसमें सुधार किया जाता है। वहीं, दूसरी ओर इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग के जेई महिंद्र सिंह और रवींद्र जांगड़ा का कहना है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के सभी ट्यूबवेलों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हुए है।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम अपने स्तर पर पानी के नमूने जांच के लिए लेती रहती है। लेकिन उनका स्वास्थ्य विभाग के लोगों से कोई संपर्क नहीं रहता है। हालांकि सही मायने में सैंपलिंग लेने का कार्य स्वास्थ्य विभाग करता है।
यहां-यहां नहीं हुई सैंपलिंग
स्वास्थ्य विभाग का रिकार्ड बताता है कि अगस्त माह में विभाग की ओर से नीलोखेड़ी अस्पताल इलाके में आने वाले पूरे शहर और गांव, प्राथमिक उपचार केंद्र तरावड़ी, सग्गा, मधुबन, गगसीना, उपलाना, बड़ौता के तहत आने वाले गांव और शहरी इलाके के अलावा, करनाल अर्बन डिस्पेंसरी रामनगर और शिव कॉलोनी एरिया से पानी के नमूने लिए ही नहीं गए हैं। इन इलाकों में करीब 130 पंप पड़ते हैं।