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सीएम सिटी में कर्मचारियों ने भरी हुंकार
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:24 AM IST
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केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और कर्मचारी संघों की ओर से मंगलवार को आयोजित महारैली में प्रदेश से हजारों कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो दो सितंबर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत बिजली, पानी, रोडवेज बसें और स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अब वे आश्वासन लेकर पीछे नहीं हटेंगे, बल्कि मांग पूरी होने पर ही रुकेंगे। इस दौरान रोड ट्रांसपोर्ट बिल के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किया गया।
सेक्टर-12 के हुडा ग्राउंड में आयोजित महारैली में सर्व कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष धर्मबीर फौगाट ने कहा कि प्रदेश सरकार को पूंजीपति चला रहे हैं। कर्मचारी मजदूरों को दमनकारी नीतियों से कुचला जा रहा है। सरकार कर्मचारी-मजदूर व जनविरोधी नीतियां अपना रही हैं। श्रम कानून कॉरपोरेट्स के हित में बनाए गए हैं। आंदोलनों को एस्मा जैसे कानून लगाकर कुचलने पर उतारू है और उन तमाम जन विरोधी नीतियों को पूरा करने में जुटी हुई है जिन्हें पूर्व सरकार अधूरा छोड़ गई। फौगाट ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश को निजी कंपनियों के हाथों लूटवा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी ऐसा कतई नहीं होने देंगे।
रैली के दौरान जनसमूह ने दो सितंबर की हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही फौगाट ने मंच से घोषणा की कि अगर सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं की तो दो सितंबर की रैली में बिजली-पानी से लेकर स्वास्थ्य और परिवहन तक व्यवस्थाएं ठप कर दी जाएंगी। रैली ने केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए रोड ट्रांसपोर्ट बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर इंटक के राज्य अध्यक्ष अमित यादव, एटक के अध्यक्ष बलदेव घणघस, एचएमएस के राज्य अध्यक्ष आरडी यादव, सीटू के प्रदेश महासचिव जयभगवान, एआईयूटीयूसी के राज्य अध्यक्ष सत्यवान, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष धर्मबीर फौगाट, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष कंवर सिंह यादव, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच जेपीए के राज्य महासचिव सूबे सिंह, हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन, एआईबीईए के चेयरमैन एनपी मुंझाल आदि ने महारैली को संबोधित किया।
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ये हैं मांगें
न्यूनतम वेतन 18000 रुपये हो, श्रम कानून लागू हो, नया श्रम कानून निरस्त हो, ठेका प्रथा समाप्त हो, ठेका-कैजुअल-आउटसोर्सिंग व कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। राज्य में नौकरी से निकाले गए मजदूरों-कर्मचारियों को बहाल किया जाए, पंजाब के कर्मचारियों के समान वेतनमान दिया जाए, लाखों खाली पड़े पदों पर स्थायी भर्ती की जाए। बिजली, रोडवेज, पब्लिक हेल्थ, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित तमाम सरकारी विभागों/संस्थाओं/संसाधनों का निजीकरण बंद हो। बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौतों को लागू किया जाए। भवन निर्माण श्रमिकों को मिलने वाले लाभ की प्रक्रिया सरल की जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील समेत स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। खेत मजदूर, मनरेगा सहित असंगठित क्षेत्र के सभी मजदूरों को 500 रुपये दिहाड़ी व सालभर काम मिले। बैंक, बीमा, रेलवे, रक्षा व अन्य सरकारी विभागों व खुदरा व्यापार में एफडीआई पर रोक लगे। सभी मजदूरों-कर्मचारियों को ईएसआई, पीएफ व पेंशन के दायरे में लाया जाए। पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए। समान काम-समान वेतन, स्थायी काम-स्थायी भर्ती लागू हो।
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सेक्टर-12 के हुडा ग्राउंड में आयोजित महारैली में सर्व कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष धर्मबीर फौगाट ने कहा कि प्रदेश सरकार को पूंजीपति चला रहे हैं। कर्मचारी मजदूरों को दमनकारी नीतियों से कुचला जा रहा है। सरकार कर्मचारी-मजदूर व जनविरोधी नीतियां अपना रही हैं। श्रम कानून कॉरपोरेट्स के हित में बनाए गए हैं। आंदोलनों को एस्मा जैसे कानून लगाकर कुचलने पर उतारू है और उन तमाम जन विरोधी नीतियों को पूरा करने में जुटी हुई है जिन्हें पूर्व सरकार अधूरा छोड़ गई। फौगाट ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश को निजी कंपनियों के हाथों लूटवा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी ऐसा कतई नहीं होने देंगे।
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रैली के दौरान जनसमूह ने दो सितंबर की हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही फौगाट ने मंच से घोषणा की कि अगर सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं की तो दो सितंबर की रैली में बिजली-पानी से लेकर स्वास्थ्य और परिवहन तक व्यवस्थाएं ठप कर दी जाएंगी। रैली ने केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए रोड ट्रांसपोर्ट बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर इंटक के राज्य अध्यक्ष अमित यादव, एटक के अध्यक्ष बलदेव घणघस, एचएमएस के राज्य अध्यक्ष आरडी यादव, सीटू के प्रदेश महासचिव जयभगवान, एआईयूटीयूसी के राज्य अध्यक्ष सत्यवान, सर्व कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष धर्मबीर फौगाट, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष कंवर सिंह यादव, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच जेपीए के राज्य महासचिव सूबे सिंह, हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन, एआईबीईए के चेयरमैन एनपी मुंझाल आदि ने महारैली को संबोधित किया।
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न्यूनतम वेतन 18000 रुपये हो, श्रम कानून लागू हो, नया श्रम कानून निरस्त हो, ठेका प्रथा समाप्त हो, ठेका-कैजुअल-आउटसोर्सिंग व कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। राज्य में नौकरी से निकाले गए मजदूरों-कर्मचारियों को बहाल किया जाए, पंजाब के कर्मचारियों के समान वेतनमान दिया जाए, लाखों खाली पड़े पदों पर स्थायी भर्ती की जाए। बिजली, रोडवेज, पब्लिक हेल्थ, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित तमाम सरकारी विभागों/संस्थाओं/संसाधनों का निजीकरण बंद हो। बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौतों को लागू किया जाए। भवन निर्माण श्रमिकों को मिलने वाले लाभ की प्रक्रिया सरल की जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील समेत स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। खेत मजदूर, मनरेगा सहित असंगठित क्षेत्र के सभी मजदूरों को 500 रुपये दिहाड़ी व सालभर काम मिले। बैंक, बीमा, रेलवे, रक्षा व अन्य सरकारी विभागों व खुदरा व्यापार में एफडीआई पर रोक लगे। सभी मजदूरों-कर्मचारियों को ईएसआई, पीएफ व पेंशन के दायरे में लाया जाए। पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए। समान काम-समान वेतन, स्थायी काम-स्थायी भर्ती लागू हो।