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रोज अस्पताल से चले जाते हैं सौ मरीज
अमर उजाला, करनाल
Updated Mon, 07 Oct 2013 11:23 PM IST
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करनाल में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले आठ माह से आयुर्वेदिक दवाओं का स्टॉक समाप्त है। इसके चलते यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज बेहाल हो रहे हैं, तो कुछ आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही इलाज छोड़ने पर मजबूर हैं।
क्योंकि बाजार में आयुर्वेदिक दवा का मूल्य अधिक है। जबकि रोजाना यहां आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास सौ से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। दवा समाप्त होने का कारण बजट की मंजूरी नहीं मिलना बताया जा रहा है।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आयुष विभाग की ओर से दो आयुर्वेदिक डाक्टर नियुक्त हैं। इनका काम लोगों को आयुर्वेद पद्धति से इलाज देना और दवा-दारु करना है। लेकिन आयुर्वेदिक मेडिसन के काउंटर पर पिछले आठ महिनाें से दवाई ही नहीं है। इस कारण लोगों को बाजार से दवाई खरदीनी पड़ती है।
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आयुर्वेदिक क्लीनिक में रोजाना करीब अस्सी से सो मरीज इलाज के लिए आते हैं। दवाई नहीं होने के कारण इनमें से ज्यादातर रोगी उपचार को बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं। बाकी लोग बाजार से महंगी दवाई खरीद कर अपना इलाज करा रहे हैं।
रूटीन की भी नहीं है दवा
आयुर्वेदिक विभाग में रोजाना करीब 80 से सो मरीजों की ओपीडी में वृद्ध रोगी जोड़ दर्द, दमा व शुगर के होते हैं। बच्चों मेें पेट के कीड़े, कमजोरी, निमोनिया और अस्थमा के रोगियों की संख्या अधिक होती है, जबकि महिलाओं में लकोरिया संबंधी बीमारियां अधिक होती है, लेकिन रूटीन की इन दवाओं का भी टोटा होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। जबकि आयुष विभाग की ओर से शनिवार को किशोरियों की समस्याओं के समाधान के लिए अर्श एवं मित्रता क्लीनिक भी चलाया जाता है, लेकिन जब दवाई ही नहीं होगी, तो आप मित्रता क्लीनिक के मायने समझ सकते हैं। इसमें 10 से 19 वर्ष तक की किशोरियां शामिल होती है।
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क्योंकि बाजार में आयुर्वेदिक दवा का मूल्य अधिक है। जबकि रोजाना यहां आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास सौ से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। दवा समाप्त होने का कारण बजट की मंजूरी नहीं मिलना बताया जा रहा है।
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आयुष विभाग की ओर से दो आयुर्वेदिक डाक्टर नियुक्त हैं। इनका काम लोगों को आयुर्वेद पद्धति से इलाज देना और दवा-दारु करना है। लेकिन आयुर्वेदिक मेडिसन के काउंटर पर पिछले आठ महिनाें से दवाई ही नहीं है। इस कारण लोगों को बाजार से दवाई खरदीनी पड़ती है।
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आयुर्वेदिक क्लीनिक में रोजाना करीब अस्सी से सो मरीज इलाज के लिए आते हैं। दवाई नहीं होने के कारण इनमें से ज्यादातर रोगी उपचार को बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं। बाकी लोग बाजार से महंगी दवाई खरीद कर अपना इलाज करा रहे हैं।
रूटीन की भी नहीं है दवा
आयुर्वेदिक विभाग में रोजाना करीब 80 से सो मरीजों की ओपीडी में वृद्ध रोगी जोड़ दर्द, दमा व शुगर के होते हैं। बच्चों मेें पेट के कीड़े, कमजोरी, निमोनिया और अस्थमा के रोगियों की संख्या अधिक होती है, जबकि महिलाओं में लकोरिया संबंधी बीमारियां अधिक होती है, लेकिन रूटीन की इन दवाओं का भी टोटा होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। जबकि आयुष विभाग की ओर से शनिवार को किशोरियों की समस्याओं के समाधान के लिए अर्श एवं मित्रता क्लीनिक भी चलाया जाता है, लेकिन जब दवाई ही नहीं होगी, तो आप मित्रता क्लीनिक के मायने समझ सकते हैं। इसमें 10 से 19 वर्ष तक की किशोरियां शामिल होती है।