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आखिर बंद हो गया मेला राम स्कूल, जांच हो तो कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं
अनिल भारद्वाज/अमित कौशिक, करनाल
Updated Thu, 15 May 2014 12:22 AM IST
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सरकार से सहायता प्राप्त दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मेला राम) को आखिरकार भू-माफिया ने निगल ही लिया। शिक्षा विभाग ने स्कूल को आखिरकार बंद कर दिया है।
स्कूल के शिक्षकों से लेकर बच्चों को भी अन्य स्कूलों में ऐडजस्ट करने के निर्देश आए हैं। शिक्षा विभाग के निदेशक चंद्र शेखर का पत्र आने के बाद तो मेलाराम स्कूल में एक सफाई कर्मी तक भी नहीं बचा है।
पूरे प्लान के तहत स्कूल को भू-माफिया के सुपुर्द किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की कीमती जमीन पर सत्ताधारी नेता से लेकर विपक्ष के नेताओं की भी भूमिका सामने आ रही है।
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मेलाराम स्कूल के बच्चों को तो दूसरे स्कूलों में ऐडजस्ट कर दिया गया है लेकिन स्कूल स्टाफ को अन्य स्कूल ज्वाइन नहीं करा रहे।
जिला शिक्षा विभाग भी इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। शिक्षा विभाग के निदेशक का पत्र आने के बाद स्कूल की भूमि खाली हो गई है।
भूमि पर नजर गड़ाए बैठे भू-माफिया की मौज हो गई है। कुछ दिन पहले स्कूल के नाम को मिटा दिया था और अगले ही दिन स्कूल पर ताला जड़ दिया गया।
स्कूल की भूमि पर कई दर्जन दुकानें बनी हैं। डीईओ ने भी स्कूल स्टाफ और बच्चों को सेशन शुरू होने से पहले ही नजदीक के सरकारी या प्राइवेट स्कूल में ऐडजस्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लगभग 60 बच्चों को लिविंग सर्टिफिकेट दे दिया था।
तबादले के निर्देश, लेकिन ज्वाइन नहीं
दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मेला राम) में कार्यरत साइंस टीचर वीरेंद्र कुमार को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, एसएस टीचर ओमप्रकाश को डीएवी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, एसएस टीचर बीके चावला को जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, गणित टीचर सविता को ललिता शास्त्री एसडी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नीलोखेड़ी, हिंदी टीचर मीना को एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, पंजाबी टीचर सुदेश बाला को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, संस्कृत टीचर मीना कुमारी को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल में स्थानांतरित किया गया है।
क्लर्क उत्तमचंद अरोड़ा को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, चपड़ासी धनीराम को गुरुनानक गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, चौकीदार राजेंद्र प्रसाद को मोरमाजरा गुरुकुल, स्वीपर जागृति को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल में तबादला किया है।
इनको ज्वाइन करने को लेकर संबंधित स्कूल तैयार नहीं होने पर जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत कर चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला है।
स्कूल की हो गई रजिस्ट्री
मेलाराम स्कूल की रजिस्ट्री किसी भी मायने में नहीं हो सकती। नियमों को ताक पर रखकर रजिस्टरी करा ली गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलीभगत कर रजिस्ट्री कराने में अहम भूमिका निभाई।
फिलहाल प्रशासन रजिस्टरी में स्टांप ड्यूटी कम लगाने जाने की कराने की जांच का राग अलाप रहा है। लोगों का कहना है कि जांच करने वाले भी वहीं अफसर और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले भी वहीं अफसर। इस स्थिति में इंसाफ मिलना बहुत मुश्किल है।
मिलीभगत का उदाहरण
मेलाराम स्कूल को एक नीतिगत व्यवस्था के तहत धीरे-धीरे बंद कर दिया गया। खरीददारों ने व्यवस्था के तहत पहले अपने आप को संस्था का सदस्य बनाया और बाद में अपने नाम ही रजिस्टरी करा ली और अब न केवल इस स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया बल्कि पढ़ा रहे शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में ऐडजस्ट किया जा रहा है। अगर इस मुद्दे की गंभीरता से जांच हो तो कई परतें सामने आ सकती हैं।
ओमप्रकाश, एसएस टीचर, मेलाराम स्कूल ने बताया कि शिक्षा विभाग के निदेशक का पत्र मिल चुका है। संबंधित स्कूल ज्वाइन नहीं करा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी को मिल चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। बुधवार को भी सभी टीचर सड़क पर हैं।
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स्कूल के शिक्षकों से लेकर बच्चों को भी अन्य स्कूलों में ऐडजस्ट करने के निर्देश आए हैं। शिक्षा विभाग के निदेशक चंद्र शेखर का पत्र आने के बाद तो मेलाराम स्कूल में एक सफाई कर्मी तक भी नहीं बचा है।
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पूरे प्लान के तहत स्कूल को भू-माफिया के सुपुर्द किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की कीमती जमीन पर सत्ताधारी नेता से लेकर विपक्ष के नेताओं की भी भूमिका सामने आ रही है।
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मेलाराम स्कूल के बच्चों को तो दूसरे स्कूलों में ऐडजस्ट कर दिया गया है लेकिन स्कूल स्टाफ को अन्य स्कूल ज्वाइन नहीं करा रहे।
जिला शिक्षा विभाग भी इसमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। शिक्षा विभाग के निदेशक का पत्र आने के बाद स्कूल की भूमि खाली हो गई है।
भूमि पर नजर गड़ाए बैठे भू-माफिया की मौज हो गई है। कुछ दिन पहले स्कूल के नाम को मिटा दिया था और अगले ही दिन स्कूल पर ताला जड़ दिया गया।
स्कूल की भूमि पर कई दर्जन दुकानें बनी हैं। डीईओ ने भी स्कूल स्टाफ और बच्चों को सेशन शुरू होने से पहले ही नजदीक के सरकारी या प्राइवेट स्कूल में ऐडजस्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लगभग 60 बच्चों को लिविंग सर्टिफिकेट दे दिया था।
तबादले के निर्देश, लेकिन ज्वाइन नहीं
दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल (मेला राम) में कार्यरत साइंस टीचर वीरेंद्र कुमार को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, एसएस टीचर ओमप्रकाश को डीएवी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, एसएस टीचर बीके चावला को जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, गणित टीचर सविता को ललिता शास्त्री एसडी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नीलोखेड़ी, हिंदी टीचर मीना को एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, पंजाबी टीचर सुदेश बाला को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, संस्कृत टीचर मीना कुमारी को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल में स्थानांतरित किया गया है।
क्लर्क उत्तमचंद अरोड़ा को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, चपड़ासी धनीराम को गुरुनानक गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल, चौकीदार राजेंद्र प्रसाद को मोरमाजरा गुरुकुल, स्वीपर जागृति को डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल में तबादला किया है।
इनको ज्वाइन करने को लेकर संबंधित स्कूल तैयार नहीं होने पर जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत कर चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला है।
स्कूल की हो गई रजिस्ट्री
मेलाराम स्कूल की रजिस्ट्री किसी भी मायने में नहीं हो सकती। नियमों को ताक पर रखकर रजिस्टरी करा ली गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलीभगत कर रजिस्ट्री कराने में अहम भूमिका निभाई।
फिलहाल प्रशासन रजिस्टरी में स्टांप ड्यूटी कम लगाने जाने की कराने की जांच का राग अलाप रहा है। लोगों का कहना है कि जांच करने वाले भी वहीं अफसर और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले भी वहीं अफसर। इस स्थिति में इंसाफ मिलना बहुत मुश्किल है।
मिलीभगत का उदाहरण
मेलाराम स्कूल को एक नीतिगत व्यवस्था के तहत धीरे-धीरे बंद कर दिया गया। खरीददारों ने व्यवस्था के तहत पहले अपने आप को संस्था का सदस्य बनाया और बाद में अपने नाम ही रजिस्टरी करा ली और अब न केवल इस स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया बल्कि पढ़ा रहे शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में ऐडजस्ट किया जा रहा है। अगर इस मुद्दे की गंभीरता से जांच हो तो कई परतें सामने आ सकती हैं।
ओमप्रकाश, एसएस टीचर, मेलाराम स्कूल ने बताया कि शिक्षा विभाग के निदेशक का पत्र मिल चुका है। संबंधित स्कूल ज्वाइन नहीं करा रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी को मिल चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। बुधवार को भी सभी टीचर सड़क पर हैं।