{"_id":"9848a754009a72dbf0cad05afe147c85","slug":"farmers-suffering-hoisted-black-flags","type":"story","status":"publish","title_hn":"चकबंदी पीड़ित गांवों के किसानों ने फहराया काला झंडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चकबंदी पीड़ित गांवों के किसानों ने फहराया काला झंडा
करनाल
Updated Tue, 28 Jan 2014 04:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पांच गांव लालूपुरा, भरतपुर, अराईपुरा, कालरम, अमृतपुरखुर्द के किसानों ने
विज्ञापन
अराईपुरा डेरे पर गणतंत्र दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया। काले झंडे
को किसान प्रदीप कालरम की 105 वर्षीय दादी बसंती देवी ने फहराया।
बसंती देवी ने कहा कि यह जमीन उन्होंने सन 1935-36 में खरीदी थी और यह एक विरान जंगल के रूप में थी। इस जमीन को उन्होंने दिन-रात मेहनत करके उपजाऊ भूमि बनाई। जब तक लगान प्रथा रही इस भूमि का लगान भी दिया है। इसकी रसीद अब भी उनके पास है।
इस जमीन पर उन्होंने ऋण भी ले रखे हैं और बिजली के कनेक्शन भी लिए हैं। जमीन के मालिकाना हक उनके पास हैं। किसानों ने कहा कि इस जमीन को काले कानून के तहत हमारे से हड़पा गया है। उन्होंने मांग की कि या तो उनके कागजात को गैरकानूनी साबित करो या जमीन को वापस करो। इस मुद्दे को लेकर इन पांच गांवों के किसान दिवाली, दशहरे जैसे त्योहारों पर भी काला दिवस मनाते आए हैं।
किसान प्रदीप कालरम, श्रीराम कालरम, नरेंद्र, अकल सिंह, राजबल, सुनील कुमार, नरेंद्र शर्मा, डॉ. रोशन, अनिल जोगी, ईश्वर जोगी, प्रवीण, सतीश राणा आदि किसानों ने कहा कि जब 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ था तब देश के किसानों के लिए अच्छी-अच्छी योजनाएं बनाईं गईं थी।
लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने 1995-96 की चकबंदी के दौरान आजादी से पहले की पूर्वजों के द्वारा खरीदी गई जमीन को भूमाफियाओं के साथ मिलकर हड़प लिया और हजारों किसानों के परिवारों को उजाड़ दिया। पांचों गांवों के किसानों में काफी रोष है कि प्रशासन ने भूमाफियों के दबाव में आकर उनकी पुश्तैनी व खरीदी जमीन को हड़प लिया और ए, बी व सी वर्गीकरण की जालसाजी करके पीड़ित किसानों की खरीदी जमीन को भूमाफिया को सौंप दी। चल रही चकबंदी के विरोध में पीड़ित पांच गांवों के किसान लगातार आठ महीनों से सामूहिक तौर पर आंदोलन कर रहे हैं और अपनी खरीदी जमीन की मांग कर रहे हैं।
श्रेणियों में बांटकर लूटी जमीन
किसानों का आरोप है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने एक समान भूमि को तीन प्रकार की ए, बी, सी श्रेणी बनाकर भूमाफियाें को फायदा पहुंचाया है और किसानों को और उनके बच्चों को उनका हक छीनकर दरबदर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया है। एक समान भूमि होने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित किसानों को 25 एकड़ में से 4 देकर और चालीस एकड़ में 6 एकड़ देकर और 10 एकड़ में से 1 एकड़ भूमि देकर उनकी जमीन को ए श्रेणी में लगा दिया। उसी जमीन को अधिकारियों ने सी श्रेणी में देकर पूंजीपतियों और भूमाफिया को कई गुणा जमीन बढ़ा कर फायदा पहुंचाया है।
चुनाव का होगा पूर्ण बहिष्कार
पांच गांवों की कमेटी के प्रधान प्रदीप कालरम ने कहा कि जब तक हम में अपने पूर्वजों द्वारा खरीदी गई जमीन नहीं मिल जाती तब तक वो चैन से नहीं बैठेंगे और बढ़-चढ़कर आंदोलन चलता रहेंगे। आने वाले चुनावों में वो सामूहिक तौर पर बहिष्कार करेंगे क्योंकि इस मुसीबत की घड़ी में किसी भी नेता ने इन गरीब, पीड़ित किसानों का हाल नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि गरीब किसानों के ऊपर इतने अत्याचार हुए है, इतनी यातनाएं दी गईं है कि वे इच्छामृत्यु तक की भी मांग कर चुके हैं।
यह है किसानों की मांग
किसानों की मांग है कि आजादी से पहले पीड़ित किसानों के पूर्वजों द्वारा खरीदी जमीन किसानों को दी जाए। पीड़ित किसानों की औरतों व बच्चों पर प्रशासन द्वारा किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह, प्रदीप पटवारी, नफे सिंह आदि अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जाए।
बसंती देवी ने कहा कि यह जमीन उन्होंने सन 1935-36 में खरीदी थी और यह एक विरान जंगल के रूप में थी। इस जमीन को उन्होंने दिन-रात मेहनत करके उपजाऊ भूमि बनाई। जब तक लगान प्रथा रही इस भूमि का लगान भी दिया है। इसकी रसीद अब भी उनके पास है।
इस जमीन पर उन्होंने ऋण भी ले रखे हैं और बिजली के कनेक्शन भी लिए हैं। जमीन के मालिकाना हक उनके पास हैं। किसानों ने कहा कि इस जमीन को काले कानून के तहत हमारे से हड़पा गया है। उन्होंने मांग की कि या तो उनके कागजात को गैरकानूनी साबित करो या जमीन को वापस करो। इस मुद्दे को लेकर इन पांच गांवों के किसान दिवाली, दशहरे जैसे त्योहारों पर भी काला दिवस मनाते आए हैं।
किसान प्रदीप कालरम, श्रीराम कालरम, नरेंद्र, अकल सिंह, राजबल, सुनील कुमार, नरेंद्र शर्मा, डॉ. रोशन, अनिल जोगी, ईश्वर जोगी, प्रवीण, सतीश राणा आदि किसानों ने कहा कि जब 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ था तब देश के किसानों के लिए अच्छी-अच्छी योजनाएं बनाईं गईं थी।
लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने 1995-96 की चकबंदी के दौरान आजादी से पहले की पूर्वजों के द्वारा खरीदी गई जमीन को भूमाफियाओं के साथ मिलकर हड़प लिया और हजारों किसानों के परिवारों को उजाड़ दिया। पांचों गांवों के किसानों में काफी रोष है कि प्रशासन ने भूमाफियों के दबाव में आकर उनकी पुश्तैनी व खरीदी जमीन को हड़प लिया और ए, बी व सी वर्गीकरण की जालसाजी करके पीड़ित किसानों की खरीदी जमीन को भूमाफिया को सौंप दी। चल रही चकबंदी के विरोध में पीड़ित पांच गांवों के किसान लगातार आठ महीनों से सामूहिक तौर पर आंदोलन कर रहे हैं और अपनी खरीदी जमीन की मांग कर रहे हैं।
श्रेणियों में बांटकर लूटी जमीन
किसानों का आरोप है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने एक समान भूमि को तीन प्रकार की ए, बी, सी श्रेणी बनाकर भूमाफियाें को फायदा पहुंचाया है और किसानों को और उनके बच्चों को उनका हक छीनकर दरबदर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया है। एक समान भूमि होने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित किसानों को 25 एकड़ में से 4 देकर और चालीस एकड़ में 6 एकड़ देकर और 10 एकड़ में से 1 एकड़ भूमि देकर उनकी जमीन को ए श्रेणी में लगा दिया। उसी जमीन को अधिकारियों ने सी श्रेणी में देकर पूंजीपतियों और भूमाफिया को कई गुणा जमीन बढ़ा कर फायदा पहुंचाया है।
चुनाव का होगा पूर्ण बहिष्कार
पांच गांवों की कमेटी के प्रधान प्रदीप कालरम ने कहा कि जब तक हम में अपने पूर्वजों द्वारा खरीदी गई जमीन नहीं मिल जाती तब तक वो चैन से नहीं बैठेंगे और बढ़-चढ़कर आंदोलन चलता रहेंगे। आने वाले चुनावों में वो सामूहिक तौर पर बहिष्कार करेंगे क्योंकि इस मुसीबत की घड़ी में किसी भी नेता ने इन गरीब, पीड़ित किसानों का हाल नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि गरीब किसानों के ऊपर इतने अत्याचार हुए है, इतनी यातनाएं दी गईं है कि वे इच्छामृत्यु तक की भी मांग कर चुके हैं।
यह है किसानों की मांग
किसानों की मांग है कि आजादी से पहले पीड़ित किसानों के पूर्वजों द्वारा खरीदी जमीन किसानों को दी जाए। पीड़ित किसानों की औरतों व बच्चों पर प्रशासन द्वारा किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। चकबंदी अधिकारी दलबीर सिंह, प्रदीप पटवारी, नफे सिंह आदि अधिकारियों की संपत्ति की जांच कराई जाए।